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दो जून की रोटी की तलाश में खो रहा बचपन

Tue, 02 Jun 2020 01:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2020 01:00 AM IST
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Missing childhood age to get two time bread
जेल चौराहा से इलाहाबाद बैंक चौराहा जाने वाली सड़क के किनारे झाडू और पंखा बेचती नैंसी।
झांसी। पढ़ाई कर कुछ करने की चाह रखने वाला बचपन दो जून की रोटी की तलाश में खो रहा है। लॉकडाउन में सब कुछ बंद होने से रोजगार छिन गया। सोमवार को अनलॉक होने के बाद नन्हे कदम भी रोटी की जुगाड़ में निकल पड़े। बेटी ने भी मेहनत के सहारे ही परिवार की मदद का जज्बा दिखाया। हाथ में झाड़ू और पंखे लेकर नैन्सी परिवार को चलाने के लिए जद्दोजेहद करती नजर आई।
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लॉकडाउन के दौरान जिले में तमाम परिवार बेरोजगार हो गए। मेहनत के जरिए अपनी जिंदगी चला रहे परिवारों के आगे संकट खड़ा हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। शहर के जेल चौराहे पर झाड़ू बेच रही नैन्सी ने मेहनत को ही सब कुछ माना। नैन्सी ने बताया कि उसके पिता नहीं है। घर पर मां और पांच बहनें हैं। लॉकडाउन मेें सबकुछ बंद होने से बहुत दिक्कत होने लगी थी। उनकी मां झाड़ू और पंखे बनाती हैं। जिसे वे जेल चौराहे पर बेचने पहुंची। पूरे दिन में महज दो या तीन झाड़ू बिक पाती हैं। उन्होंने कहा कि अपना सहारा खुद बनना है। इसलिए मेहनत के जरिए कमाकर ही जिंदगी चलाएंगे।
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