{"_id":"370e4ea738f0f773baa881c11230f0d3","slug":"millions-are-poor-dakar-railway-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गरीबों के लाखों रुपये डकार जाता है रेलवे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गरीबों के लाखों रुपये डकार जाता है रेलवे
ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। रेलवे ने जब से जनरल टिकट पर तीन घंटे में वापसी व्यवस्था शुरू की है, तब से प्रतिदिन गरीब यात्रियों के लाखों रुपये रेलवे के खाते में जा रहे हैं। यात्रियों के लिए यह व्यवस्था एक बड़ी परेशानी बन गई है। व्यवस्था में बदलाव के लिए शिकायतें भी खूब हो रही हैं, इस कारण रेल प्रशासन ने अब ‘तीन घंटे में ही वैलिड होगा आपका जनरल टिकट’ पर आम राय मांगना शुरू कर दी है।
रेलवे ने पहले जनरल टिकट खरीदने पर उसकी वापसी के लिए व्यवस्था कर रखी थी कि जिस तिथि में टिकट खरीदा जाता था, उसे रात में बारह बजे तिथि बदलने के तीन घंटे तक वापस किया जा सकता था। मगर अब टिकट खरीदने के तीन घंटे बाद तक ही उसे वापस किया जा सकता है।
चूंकि, जनरल टिकट किसी ट्रेन विशेष के लिए जारी नहीं होता है। जिस ट्रेन से यात्री को जाना है और अगर वह तीन घंटे से अधिक विलंबित हो गई तो समझिये टिकट बेकार हो गया। तीन घंटे बाद यात्री को बिना टिकट ही माना जाएगा। हां, इतना जरूर है कि वह जल्द ही दूसरी ट्रेन में सवार हो जाए, नहीं तो पकड़े जाने पर उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है।
विज्ञापन
उदाहरण के तौर पर वाराणसी से वाया बीना होकर अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस सुबह के समय झांसी से गुजरती है। अक्सर यह गाड़ी दो से तीन घंटे लेट हो जाती है। इस ट्रेन के जनरल कोचों में पैर रखने की जगह नहीं होती है। अगर किसी यात्री को अहमदाबाद जाना है तो वह ट्रेन आने के पूर्व ही जनरल टिकट खरीद लेता है।
ट्रेन आने पर इतनी अधिक भीड़ जनरल कोचों में होती हैं कि कई बार यात्री चढ़ ही नहीं पाता है। ऐसे में न तो उसे रुपये वापस मिलते हैं और न ही अहमदाबाद के लिए दूसरी ट्रेन उपलब्ध रहती है। एक नहीं कई ट्रेनों में इसी तरह की समस्या का सामना यात्रियों को करना पड़ता है। इस स्थिति में प्रतिदिन रेलवे का खजाना भर रहा है। इस व्यवस्था को लेकर शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। इस कारण रेल प्रशासन ने व्यवस्था को लेकर आम यात्रियों व मीडिया की राय जान रहा है।
विज्ञापन
रेलवे ने पहले जनरल टिकट खरीदने पर उसकी वापसी के लिए व्यवस्था कर रखी थी कि जिस तिथि में टिकट खरीदा जाता था, उसे रात में बारह बजे तिथि बदलने के तीन घंटे तक वापस किया जा सकता था। मगर अब टिकट खरीदने के तीन घंटे बाद तक ही उसे वापस किया जा सकता है।
विज्ञापन
चूंकि, जनरल टिकट किसी ट्रेन विशेष के लिए जारी नहीं होता है। जिस ट्रेन से यात्री को जाना है और अगर वह तीन घंटे से अधिक विलंबित हो गई तो समझिये टिकट बेकार हो गया। तीन घंटे बाद यात्री को बिना टिकट ही माना जाएगा। हां, इतना जरूर है कि वह जल्द ही दूसरी ट्रेन में सवार हो जाए, नहीं तो पकड़े जाने पर उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है।
विज्ञापन
उदाहरण के तौर पर वाराणसी से वाया बीना होकर अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस सुबह के समय झांसी से गुजरती है। अक्सर यह गाड़ी दो से तीन घंटे लेट हो जाती है। इस ट्रेन के जनरल कोचों में पैर रखने की जगह नहीं होती है। अगर किसी यात्री को अहमदाबाद जाना है तो वह ट्रेन आने के पूर्व ही जनरल टिकट खरीद लेता है।
ट्रेन आने पर इतनी अधिक भीड़ जनरल कोचों में होती हैं कि कई बार यात्री चढ़ ही नहीं पाता है। ऐसे में न तो उसे रुपये वापस मिलते हैं और न ही अहमदाबाद के लिए दूसरी ट्रेन उपलब्ध रहती है। एक नहीं कई ट्रेनों में इसी तरह की समस्या का सामना यात्रियों को करना पड़ता है। इस स्थिति में प्रतिदिन रेलवे का खजाना भर रहा है। इस व्यवस्था को लेकर शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। इस कारण रेल प्रशासन ने व्यवस्था को लेकर आम यात्रियों व मीडिया की राय जान रहा है।