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मीटर रीडिंग देखी नहीं, भेज दिया बिल
झांसी / ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2015 12:27 AM IST
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विद्युत टीम ने झोकन बाग में रहने वाले परमानंद श्रीवास्तव का चार माह पहले मीटर बदलकर परिसर के बाहर लगाया था। मीटर बदलते समय उनको सीलिंग सर्टिफिकेट तो दे दिया गया, मगर मीटर शाखा द्वारा सीलिंग सर्टिफिकेट कंप्यूटर में फीड न करने से हर माह उन्हें आरडीएफ (बिना रीडिंग) का बिल थमाया जा रहा है। वह संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों से कई बार संपर्क कर चुके हैं, मगर अब तक सीलिंग सर्टिफिकेट कंप्यूटर में नहीं चढ़ सका है। इससे वह बेहद परेशान हैं।
ऐसा हाल उनका ही नहीं, बल्कि नगर के सैकड़ों उपभोक्ताओं का है। मीटर बदले जाने के बाद भी विद्युत उपभोक्ताओं के आरडीएफ (बिना रीडिंग) बिल भेजे जा रहे हैं। दरअसल, मीटर बदलने के बाद सीलिंग प्रमाणपत्र कंप्यूटर में फीड किया जाता है। इसके बाद ही उपभोक्ता के मीटर में आने वाली यूनिट के हिसाब से बिल बन पाता है। आरडीएफ में विभाग एक न्यूनतम राशि उपभोक्ता से जमा करा लेता है। मगर सर्टिफिकेट के फीड होने के बाद जब उपभोक्ता के मीटर में आ रही यूनिटों के हिसाब से बिल बनाया जाता है तो उसे एक बड़ी राशि का सामना करना पड़ता है। इसके बाद उपभोक्ता के बिल संशोधन को लेकर परेशानी शुरू हो जाती है। क्योंकि, उपभोक्ता जो आईडीएफ बिल का न्यूनतम जमा कर चुका है उसे कम कराने के लिए उसे कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह परेशानी किसी मुसीबत से कम नहीं है।
वहीं, विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सीलिंग सर्टिफिकेट चढ़वाने के लिए हाइडिल कॉलोनी स्थित मीटर शाखा में एक बाक्स लगा रखा है। मगर उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बाक्स में सर्टिफिकेट की छाया प्रति डालने के बाद भी प्रमाणपत्र की डिटेल कंप्यूटर में फीड नहीं हो पा रही है।
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ऐसा हाल उनका ही नहीं, बल्कि नगर के सैकड़ों उपभोक्ताओं का है। मीटर बदले जाने के बाद भी विद्युत उपभोक्ताओं के आरडीएफ (बिना रीडिंग) बिल भेजे जा रहे हैं। दरअसल, मीटर बदलने के बाद सीलिंग प्रमाणपत्र कंप्यूटर में फीड किया जाता है। इसके बाद ही उपभोक्ता के मीटर में आने वाली यूनिट के हिसाब से बिल बन पाता है। आरडीएफ में विभाग एक न्यूनतम राशि उपभोक्ता से जमा करा लेता है। मगर सर्टिफिकेट के फीड होने के बाद जब उपभोक्ता के मीटर में आ रही यूनिटों के हिसाब से बिल बनाया जाता है तो उसे एक बड़ी राशि का सामना करना पड़ता है। इसके बाद उपभोक्ता के बिल संशोधन को लेकर परेशानी शुरू हो जाती है। क्योंकि, उपभोक्ता जो आईडीएफ बिल का न्यूनतम जमा कर चुका है उसे कम कराने के लिए उसे कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह परेशानी किसी मुसीबत से कम नहीं है।
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वहीं, विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सीलिंग सर्टिफिकेट चढ़वाने के लिए हाइडिल कॉलोनी स्थित मीटर शाखा में एक बाक्स लगा रखा है। मगर उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बाक्स में सर्टिफिकेट की छाया प्रति डालने के बाद भी प्रमाणपत्र की डिटेल कंप्यूटर में फीड नहीं हो पा रही है।
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