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मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में अब नहीं हो पाएगा खेल
Jhansi
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:26 AM IST
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medical store
- फोटो : demo
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मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में आईडी नंबर से होने वाला खेल अब नहीं चलेगा। ड्रग विभाग नया सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है, जिसके तहत मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के लिए दुकानदार और फार्मासिस्ट को आईडी नंबर दिया जाएगा। इंडियन फार्मेसी काउंसिल और ड्रग कंट्रोलर इसी आईडी नंबर पर दुकानदार-फार्मासिस्ट का विवरण का सत्यापन करेंगे। इसके बाद आवेदक को ऑनलाइन लाइसेंस मिलेगा।
अभी झांसी में 900 फुटकर मेडिकल स्टोर और थोक दवा प्रतिष्ठान हैं। अभी तक ऑनलाइन आवेदन के बाद कंप्यूटर से चालान निकलता था। बैंक में फीस भरने के बाद पुराने लाइसेंस की कॉपी ड्रग विभाग को सौंप दी जती थी। यहां से मुहर लगने के बाद लाइसेंस रिन्युअल होता था। अब ड्रग विभाग नया सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है। इसमें लाइसेंस के रिन्युअल और आवेदन के लिए दुकानदार-फार्मासिस्ट से जुड़े सभी प्रमाणपत्र स्कैन कर अपलोड करने होंगे। फीस भी ऑनलाइन जमा होगी। हालांकि, एक जनवरी से नया सॉफ्टवेयर प्रभावी होना था लेकिन इसमें कुछ समय और लगेगा। ड्रग इंस्पेक्टर उमेश भारती ने बताया कि दुकानदार और फार्मासिस्ट के अलग-अलग आईडी नंबर होंगे। फर्मासिस्ट जब दुकानदार को अपना ओटीपी नंबर देगा, तब ही पंजीकरण हो पाएगा। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च से नया सॉफ्टवेयर प्रभावी हो सकता है।
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अभी झांसी में 900 फुटकर मेडिकल स्टोर और थोक दवा प्रतिष्ठान हैं। अभी तक ऑनलाइन आवेदन के बाद कंप्यूटर से चालान निकलता था। बैंक में फीस भरने के बाद पुराने लाइसेंस की कॉपी ड्रग विभाग को सौंप दी जती थी। यहां से मुहर लगने के बाद लाइसेंस रिन्युअल होता था। अब ड्रग विभाग नया सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है। इसमें लाइसेंस के रिन्युअल और आवेदन के लिए दुकानदार-फार्मासिस्ट से जुड़े सभी प्रमाणपत्र स्कैन कर अपलोड करने होंगे। फीस भी ऑनलाइन जमा होगी। हालांकि, एक जनवरी से नया सॉफ्टवेयर प्रभावी होना था लेकिन इसमें कुछ समय और लगेगा। ड्रग इंस्पेक्टर उमेश भारती ने बताया कि दुकानदार और फार्मासिस्ट के अलग-अलग आईडी नंबर होंगे। फर्मासिस्ट जब दुकानदार को अपना ओटीपी नंबर देगा, तब ही पंजीकरण हो पाएगा। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च से नया सॉफ्टवेयर प्रभावी हो सकता है।
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