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कमेटी ने नकारे डॉक्टर के आरोप, कहा-जो भी हुआ वो सहमति से
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाने वाली स्टाफ नर्स प्रकरण की जांच कर रही जेंडर हैरिसमेंट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टाफ नर्स पर ब्लैकमेलिंग का आरोप गलत है। वहीं, स्टाफ नर्स के आरोपों पर कमेटी ने कहा कि जो भी हुआ वो आपसी सहमति से था। वायरल चैट के मामले की जांच साइबर सेल से कराने की संस्तुति की गई है।
मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स ने जूनियर डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। स्टाफ नर्स का आरोप है कि इंटरनल प्रमोशन का लालच देकर जूनियर डॉक्टर ने उसे जाल में फंसाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उससे नजदीकी बढ़ता चला गया और फिर शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए। फिर दोस्त के साथ भी संबंध बनाने का दबाव बनाने लगा। जब उसने इंकार कर दिया तो उसका दोस्त उसे बदनाम करने की धमकी देने लगा। मामले की शिकायत पुलिस और कॉलेज प्रशासन से की गई। वहीं, जूनियर डॉक्टर ने उल्टा स्टाफ नर्स पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगा दिया।
कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच जेंडर हैरिसमेंट कमेटी को सौंप दी। कमेटी ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि जूनियर डॉक्टर के स्टाफ नर्स पर लगाए गए ब्लैकमेल करने के आरोप गलत पाए गए हैं। वहीं, कमेटी ने कहा है कि स्टाफ नर्स और जूनियर डॉक्टर के बीच अच्छी दोस्ती थी। उनके बीच जो भी हुआ, वो आपसी सहमति से था। कमेटी ने चैट वायरल होने की जांच साइबर सेल से कराने की संस्तुति की है। इस मामले को साइबर सेल को रेफर किया जाएगा।
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पुलिस नहीं दर्ज कर रही मुकदमा: नर्स
स्टाफ नर्स ने फिर से पुलिस पर मुकदमा दर्ज न करने का आरोप लगाया है। नर्स का कहना है कि सोमवार शाम को छह बजे विश्वविद्यालय चौकी से पुलिस कर्मचारी ने फोन कर आने को कहा। वहां पर जूनियर डॉक्टर को भी बुला लिया। नर्स के मुताबिक उसे पक्ष रखने का ज्यादा मौका भी नहीं दिया। पुलिस भेदभाव कर रही है। वह किसी के दबाव में आकर कतई समझौता नहीं करेगी। पुलिस ने फिर से मंगलवार को सुबह 11 बजे चौकी बुलाया है। जब तक मुकदमा दर्ज नहीं हो जाता, तब तक वह चुप नहीं बैठेगी।
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मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स ने जूनियर डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। स्टाफ नर्स का आरोप है कि इंटरनल प्रमोशन का लालच देकर जूनियर डॉक्टर ने उसे जाल में फंसाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उससे नजदीकी बढ़ता चला गया और फिर शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए। फिर दोस्त के साथ भी संबंध बनाने का दबाव बनाने लगा। जब उसने इंकार कर दिया तो उसका दोस्त उसे बदनाम करने की धमकी देने लगा। मामले की शिकायत पुलिस और कॉलेज प्रशासन से की गई। वहीं, जूनियर डॉक्टर ने उल्टा स्टाफ नर्स पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगा दिया।
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कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच जेंडर हैरिसमेंट कमेटी को सौंप दी। कमेटी ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि जूनियर डॉक्टर के स्टाफ नर्स पर लगाए गए ब्लैकमेल करने के आरोप गलत पाए गए हैं। वहीं, कमेटी ने कहा है कि स्टाफ नर्स और जूनियर डॉक्टर के बीच अच्छी दोस्ती थी। उनके बीच जो भी हुआ, वो आपसी सहमति से था। कमेटी ने चैट वायरल होने की जांच साइबर सेल से कराने की संस्तुति की है। इस मामले को साइबर सेल को रेफर किया जाएगा।
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पुलिस नहीं दर्ज कर रही मुकदमा: नर्स
स्टाफ नर्स ने फिर से पुलिस पर मुकदमा दर्ज न करने का आरोप लगाया है। नर्स का कहना है कि सोमवार शाम को छह बजे विश्वविद्यालय चौकी से पुलिस कर्मचारी ने फोन कर आने को कहा। वहां पर जूनियर डॉक्टर को भी बुला लिया। नर्स के मुताबिक उसे पक्ष रखने का ज्यादा मौका भी नहीं दिया। पुलिस भेदभाव कर रही है। वह किसी के दबाव में आकर कतई समझौता नहीं करेगी। पुलिस ने फिर से मंगलवार को सुबह 11 बजे चौकी बुलाया है। जब तक मुकदमा दर्ज नहीं हो जाता, तब तक वह चुप नहीं बैठेगी।