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मंत्री जी! बयान नहीं, कार्रवाई करो
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 07 Dec 2015 01:39 AM IST
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झांसी। मेडिकल कॉलेज के सरकारी चिकित्सक खुलेआम प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। न उन्हें शासन का डर है और न प्रशासन का। स्थिति यह है कि हाल ही में चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री द्वारा डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस बंद न करने पर जेल भेज देने तक की चेतावनी का भी कोई असर जनपद में दिखाई नहीं दे रहा है।
प्रदेश मंत्रिमंडल में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद चिकित्सा-शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा मिलने पर राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस बंद करने के सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं हो रहा है, इससे पहले भी मंत्रियों द्वारा ऐसी चेतावनी दी जा चुकी हैं। यही कारण है कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों पर मंत्री की चेतावनी का कोई असर नहीं है। सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पहले की भांति जारी है। मेडिकल कॉलेज कैंपस में ही धड़ल्ले से दिनभर प्राइवेट प्रैक्टिस की जाती है। विभिन्न नर्सिंग होम से भी चिकित्सक नियमित रूप से जाते हैं। वहां मरीज देखने, ऑपरेशन करने का उन्हें मुंह मांगा पैसा मिलता है।
रिश्तेदारों के नाम पर अस्पताल!
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कुछ चिकित्सकों ने अपनी दुकान का धंधा बढ़ाने के लिए अपने रिश्तेदारों के नाम पर अस्पताल खोल लिए हैं, जिनमें कुछ चिकित्सक तो मौका पाकर मेेडिकल कालेज में ओपीडी छोड़कर भी नर्सिंग होम में मरीज देखने चले जाते हैं। कई बार अधिकारियों के निरीक्षण में यह बात सामने भी आ चुकी है। ठोस कार्रवाई न होने पर चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं।
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अधिकारी भी नहीं पीछे
नर्सिंग होम में प्राइवेट प्रैक्टिस करने के मामले में मेडिकल कॉलेज के अधिकारी भी पीछे नहीं हैं। एक डॉक्टर कॉलेज के पास स्थित ही निजी अस्पताल में शाम को बैठते हैं। अब जब अधिकारी खुद ही यह काम कर रहे हैं, तो उनसे भला अधीनस्थों पर कार्रवाई करने की क्या उम्मीद की जा सकती है?
ओपीडी के बाद इमरजेंसी का होता जिम्मा
ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक रहता है। जिस सरकारी चिकित्सक की ओपीडी में ड्यूटी लगती है, उसे दो बजे के बाद इमरजेंसी में भी अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं। किसी चिकित्सक की सप्ताह में दो से तीन दिन, तो किसी-किसी का पंद्रह दिन में एक बार ओपीडी का नंबर आता है। इसके बावजूद चिकित्सक ड्यूटी पर कम ही मिलते हैं ।
जल्द करूंगा झांसी, जालौन का दौरा: मंत्री
चिकित्सा-शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि वह जल्द ही झांसी और जालौन जनपद का दौरा करेंगे। इस दौरान वह मेडिकल कॉलेज की स्थिति का जायजा लेंगे। प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ जरूर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि विभाग चूंकि मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए वह सीधे सीएम को रिपोर्ट करते हैं। हाल ही में आगरा मेडिकल कॉलेज में मिली खामियों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री को भेजने के लिए तैयार की जा रही है।
इंसेट--5
गोपनीय जांच कराई जाएगी: आयुक्त
बीच-बीच में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर हकीकत से रूबरू होने वाले कमिश्नर के. राम मोहन राव का कहना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों को बख्शा नहीं जाएगा। मेडिकल कॉलेज का जो भी सरकारी चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करता है, उसकी गोपनीय जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदेश मंत्रिमंडल में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद चिकित्सा-शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा मिलने पर राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस बंद करने के सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं हो रहा है, इससे पहले भी मंत्रियों द्वारा ऐसी चेतावनी दी जा चुकी हैं। यही कारण है कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों पर मंत्री की चेतावनी का कोई असर नहीं है। सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पहले की भांति जारी है। मेडिकल कॉलेज कैंपस में ही धड़ल्ले से दिनभर प्राइवेट प्रैक्टिस की जाती है। विभिन्न नर्सिंग होम से भी चिकित्सक नियमित रूप से जाते हैं। वहां मरीज देखने, ऑपरेशन करने का उन्हें मुंह मांगा पैसा मिलता है।
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रिश्तेदारों के नाम पर अस्पताल!
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कुछ चिकित्सकों ने अपनी दुकान का धंधा बढ़ाने के लिए अपने रिश्तेदारों के नाम पर अस्पताल खोल लिए हैं, जिनमें कुछ चिकित्सक तो मौका पाकर मेेडिकल कालेज में ओपीडी छोड़कर भी नर्सिंग होम में मरीज देखने चले जाते हैं। कई बार अधिकारियों के निरीक्षण में यह बात सामने भी आ चुकी है। ठोस कार्रवाई न होने पर चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं।
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अधिकारी भी नहीं पीछे
नर्सिंग होम में प्राइवेट प्रैक्टिस करने के मामले में मेडिकल कॉलेज के अधिकारी भी पीछे नहीं हैं। एक डॉक्टर कॉलेज के पास स्थित ही निजी अस्पताल में शाम को बैठते हैं। अब जब अधिकारी खुद ही यह काम कर रहे हैं, तो उनसे भला अधीनस्थों पर कार्रवाई करने की क्या उम्मीद की जा सकती है?
ओपीडी के बाद इमरजेंसी का होता जिम्मा
ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक रहता है। जिस सरकारी चिकित्सक की ओपीडी में ड्यूटी लगती है, उसे दो बजे के बाद इमरजेंसी में भी अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं। किसी चिकित्सक की सप्ताह में दो से तीन दिन, तो किसी-किसी का पंद्रह दिन में एक बार ओपीडी का नंबर आता है। इसके बावजूद चिकित्सक ड्यूटी पर कम ही मिलते हैं ।
जल्द करूंगा झांसी, जालौन का दौरा: मंत्री
चिकित्सा-शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि वह जल्द ही झांसी और जालौन जनपद का दौरा करेंगे। इस दौरान वह मेडिकल कॉलेज की स्थिति का जायजा लेंगे। प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ जरूर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि विभाग चूंकि मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए वह सीधे सीएम को रिपोर्ट करते हैं। हाल ही में आगरा मेडिकल कॉलेज में मिली खामियों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री को भेजने के लिए तैयार की जा रही है।
इंसेट--5
गोपनीय जांच कराई जाएगी: आयुक्त
बीच-बीच में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर हकीकत से रूबरू होने वाले कमिश्नर के. राम मोहन राव का कहना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों को बख्शा नहीं जाएगा। मेडिकल कॉलेज का जो भी सरकारी चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करता है, उसकी गोपनीय जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।