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एमबीबीएस डॉक्टरों को स्पेशल ट्रेनिंग की योजना
झांसी / ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2015 11:59 PM IST
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जनपद में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इसका तोड़ निकाल लिया है। योजना बनाई गई है कि शासकीय सेवा में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों को सिजेरियन प्रसव के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। स्पेशल ट्रेनिंग के लिए ईएमओसी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना भी कराई जाएगी।
गौरतलब है कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सामान्य प्रसव के अतिरिक्त सिजेरियन प्रसव की सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मौजूदा समय में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू के रूप में विकसित करने में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। इसी के मद्देनजर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद कुमार यादव ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने हेतु भारत सरकार द्वारा अनुमोदित विभिन्न पाठ्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शासकीय सेवा में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों को एनस्थीसिया, नवजात शिशु प्रबंधन एवं सिजेरियन प्रसव आदि प्रशिक्षण द्वारा एफआरयू का संचालन एक बेहतर विकल्प है।
इस प्रकार का एक प्रशिक्षण लाइफ सेविंग एनस्थेटिक स्किल फॉर इमरजेंसी ऑब्स्टेट्रिक केयर (एलएसएएस) मेडिकल कॉलेज के एनस्थेसिया विभाग द्वारा पूर्व से संचालित है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक की अध्यक्षता में बीती 25 जून को हुई मातृ स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ईएमओसी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने पर चर्चा हुई थी। इसी क्रम में सीएमओ ने कॉलेज प्रशासन से शासकीय सेवा में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों को सिजेरियन प्रसव के लिए प्रशिक्षित किए जाने के लिए स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इमरजेंसी ऑब्स्टेट्रिक केयर (ईएमओसी) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कराने की सहमति मांगी है।
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गौरतलब है कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सामान्य प्रसव के अतिरिक्त सिजेरियन प्रसव की सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मौजूदा समय में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू के रूप में विकसित करने में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। इसी के मद्देनजर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद कुमार यादव ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने हेतु भारत सरकार द्वारा अनुमोदित विभिन्न पाठ्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शासकीय सेवा में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों को एनस्थीसिया, नवजात शिशु प्रबंधन एवं सिजेरियन प्रसव आदि प्रशिक्षण द्वारा एफआरयू का संचालन एक बेहतर विकल्प है।
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इस प्रकार का एक प्रशिक्षण लाइफ सेविंग एनस्थेटिक स्किल फॉर इमरजेंसी ऑब्स्टेट्रिक केयर (एलएसएएस) मेडिकल कॉलेज के एनस्थेसिया विभाग द्वारा पूर्व से संचालित है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक की अध्यक्षता में बीती 25 जून को हुई मातृ स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ईएमओसी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने पर चर्चा हुई थी। इसी क्रम में सीएमओ ने कॉलेज प्रशासन से शासकीय सेवा में कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों को सिजेरियन प्रसव के लिए प्रशिक्षित किए जाने के लिए स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इमरजेंसी ऑब्स्टेट्रिक केयर (ईएमओसी) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कराने की सहमति मांगी है।
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