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लगाई जाए 272, संलिप्तों पर हो कठोर कार्रवाई

Fri, 05 Feb 2016 12:39 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Fri, 05 Feb 2016 12:39 AM IST
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May bear 272, drastic action on Snlipton
झांसी। नकली व मिलावटी शराब की बिक्री पर अंकुश को जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। ऐसे मामलों में जिलाधिकारी ने पुलिस को कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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जिले में नकली व मिलावटी शराब का कारोबार खूब फलफूल रहा है। इसके अलावा कच्ची शराब की भी बिक्री धड़ल्ले से जारी है। लेकिन, पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत कार्रवाई कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है। इस धारा में अभियोग पंजीकृत होेने पर ज्यादातर आरोपी थाने से ही छूट जाते हैं।
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जबकि, इस तरह के मामलों में आईपीसी की धारा 272 का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। कार्रवाई कमजोर होने की वजह से अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
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इस समस्या को अमर उजाला के बृहस्पतिवार के अंक में प्रकाशित खबर ‘धारा 60 ही क्यों?, 272 में क्यों नहीं होती कार्रवाई’ के माध्यम से उजागर किया गया था। इसका खासा असर हुआ है। शराब के गोरखधंधे पर अंकुश को जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है।

इस संबंध में जिलाधिकारी अनुराग यादव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा है, जिसकी प्रति जिला आबकारी अधिकारी को भी भेजी गई है। पत्र में अमर उजाला की खबर का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अवैध /नकली शराब पकड़े जाने के मामलों में कड़ी धाराओं में कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि, अवैध /नकली शराब की बिक्री से राजस्व को खासा नुकसान हो रहा है।

साथ ही इसका जन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने एसएसपी से कहा कि वह समस्त अधीनस्थों को निर्देशित करें कि जिन मामलों में आईपीसी की धारा 272 में कार्रवाई अपेक्षित हो, वहां अवश्य की जाए। अवैध शराब के व्यवसाय में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

एसडीएम को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी- के राममोहन
झांसी। नकली व मिलावटी शराब की बिक्री पर मंडलायुक्त का रुख भी सख्त है। इस मसले पर मंडलायुक्त के राममोहन राव ने कहा कि अवैध व मिलावटी शराब का कारोबार राजस्व को हानि पहुंचाता है। मंडलीय समीक्षा बैठक में एसडीएम को जिम्मेदारी दी जाएगी कि वह अपने क्षेत्र में अवैध व मिलावटी शराब के खिलाफ कार्रवाई करें। शराब के अवैध व्यापार में यदि आबकारी या अन्य किसी विभाग के कर्मचारी की संलिप्तता मिलती है तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सूचना मिलेगी तो पुलिस कार्रवाई करेगी: सुभाष
झांसी। एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि शराब की दुकानों की मॉनीटरिंग करने के लिए ही आबकारी विभाग बना है। इन दुकानों की जांच करना पुलिस विभाग का प्राथमिक कार्य नहीं है। आबकारी विभाग जब फोर्स मांगता है, तो उपलब्ध कराई जाती है। हां, यदि अपमिश्रण की सूचना मिलती है, तो पुलिस सीधे कार्रवाई करती है, जैसे सात जनवरी को नवाबाद के कंबल गोदाम क्षेत्र में की गई। इस तरह की जब भी सूचना मिलेगी तब पुलिस कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।


आबकारी विभाग के पास नहीं है अधिकार- प्रेमनारायण
झांसी। जिला आबकारी अधिकारी प्रेमनारायण ने बताया कि विभाग के पास आबकारी अधिनियम की धारा 60 ही है, जिसके तहत विभाग कार्रवाई कर सकता है। आईपीसी की धारा 272 के तहत मुकदमा पंजीकृत करने के लिए विभाग को पुलिस से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस साल में अब तक आधा दर्जन मामलों में आईपीसी की धारा 272 के तहत कार्रवाई की गई है। आगे इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाएगा।
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