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नगर आयुक्त ने लेखाधिकारी के कतरे पर, मंडलायुक्त तक पहुंचा मामला
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झांसी। नगर निगम के प्रशासनिक अमले में इन दिनों तेज हलचल है। नगर आयुक्त ने जिलाधिकारी से विशेष अनुमति लेकर बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी को नगर निगम में तैनात करा दिया। इसे जिलाधिकारी की ओर से निगम के आंतरिक प्रशासन में दखल के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, निगम के प्रभारी लेखाधिकारी ने इसे अधिनियम का उल्लंघन बताते हुए मंडलायुक्त से इसकी शिकायत कर दी।
नगर निगम में आय-व्यय का ब्यौरा रखने की जिम्मेदारी लेखाधिकारी के जिम्मे होती है। उनकी अनुपस्थिति में सहायक लेखाकार यह काम करते हैं। यह केंद्रीयत सेवा का पद है। फरवरी माह आगरा निगम से स्थानंतरण के बाद झांसी में उल्लास वर्मा की तैनाती हुई। बतौर प्रभारी लेखाधिकारी उन्होंने यहां कई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां पकड़ीं। प्रभारी लेखाधिकारी ने बिना टेंडर एवं कुटेशन के लाखों रुपये से कार्य कराने, वाहनों की लॉगबुक में गड़बड़ी किए जाने, डीजल-पेट्रोल के नाम पर हर महीने लाखों रुपये की गड़बड़ी पाई और भुगतान रोककर फाइलों में आपत्तियां लगा दीं।
वहीं, इन सबके बीच नगर आयुक्त अवनीश कुमार राय ने 24 जून को जिलाधिकारी आंद्रा वामसी से विशेष अनुमति लेते हुए बीएसए दफ्तर में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी राममुरारी लाल को नगर निगम में तैनात करा दिया। जिलाधिकारी की विशेष अनुमति के बाद 30 जून को उन्होंने कामकाज भी संभाल लिया। नगर आयुक्त ने लेखाधिकारी उल्लास वर्मा के पर कतरकर बीएसए कार्यकाल से आए राममुरारी लाल को जिम्मा सौंप दिया। उधर, नगर आयुक्त के इस फैसले से लेखाधिकारी उल्लास वर्मा नाराज हो गए। उन्होंने इसे नगर निगम अधिनियम का उल्लंघन ठहराते हुए मंडलायुक्त के पास शिकायत दर्ज करा दी। उनका कहना है कि नगर निगम में वित्त सेवा के किसी अधिकारी को तैनात नहीं किया जा सकता। इससे नगर निगम की स्वायत्ता नष्ट हुई है। मंडलायुक्त के पास मामला पहुंचने के बाद नगर निगम में चर्चा शुरू हो गई है हालांकि नगर आयुक्त अवनीश राय का कहना है कि निगम मेें उक्त सेवा के अधिकारी की कमी थी, इस वजह से उनकी तैनाती की गई है।
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नगर निगम में आय-व्यय का ब्यौरा रखने की जिम्मेदारी लेखाधिकारी के जिम्मे होती है। उनकी अनुपस्थिति में सहायक लेखाकार यह काम करते हैं। यह केंद्रीयत सेवा का पद है। फरवरी माह आगरा निगम से स्थानंतरण के बाद झांसी में उल्लास वर्मा की तैनाती हुई। बतौर प्रभारी लेखाधिकारी उन्होंने यहां कई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां पकड़ीं। प्रभारी लेखाधिकारी ने बिना टेंडर एवं कुटेशन के लाखों रुपये से कार्य कराने, वाहनों की लॉगबुक में गड़बड़ी किए जाने, डीजल-पेट्रोल के नाम पर हर महीने लाखों रुपये की गड़बड़ी पाई और भुगतान रोककर फाइलों में आपत्तियां लगा दीं।
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वहीं, इन सबके बीच नगर आयुक्त अवनीश कुमार राय ने 24 जून को जिलाधिकारी आंद्रा वामसी से विशेष अनुमति लेते हुए बीएसए दफ्तर में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी राममुरारी लाल को नगर निगम में तैनात करा दिया। जिलाधिकारी की विशेष अनुमति के बाद 30 जून को उन्होंने कामकाज भी संभाल लिया। नगर आयुक्त ने लेखाधिकारी उल्लास वर्मा के पर कतरकर बीएसए कार्यकाल से आए राममुरारी लाल को जिम्मा सौंप दिया। उधर, नगर आयुक्त के इस फैसले से लेखाधिकारी उल्लास वर्मा नाराज हो गए। उन्होंने इसे नगर निगम अधिनियम का उल्लंघन ठहराते हुए मंडलायुक्त के पास शिकायत दर्ज करा दी। उनका कहना है कि नगर निगम में वित्त सेवा के किसी अधिकारी को तैनात नहीं किया जा सकता। इससे नगर निगम की स्वायत्ता नष्ट हुई है। मंडलायुक्त के पास मामला पहुंचने के बाद नगर निगम में चर्चा शुरू हो गई है हालांकि नगर आयुक्त अवनीश राय का कहना है कि निगम मेें उक्त सेवा के अधिकारी की कमी थी, इस वजह से उनकी तैनाती की गई है।
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