{"_id":"5852e4b84f1c1bd209649673","slug":"math-teachers-arrange-bigdega-aadhaar","type":"story","status":"publish","title_hn":"जुगाड़ के शिक्षकों का गणित बिगड़ेगा ‘आधार’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जुगाड़ के शिक्षकों का गणित बिगड़ेगा ‘आधार’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:15 AM IST
विज्ञापन
aadhar, jhansi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जुगाड़ के शिक्षकों से चल रहे कॉलेज का गणित आधार कार्ड बिगाड़ेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एआईएसएचई (ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजूकेशन) पोर्टल पर डीसीएफ-2 फॉर्म में शिक्षकों का नाम और उनके आधार कार्ड नंबर भी दर्ज करने के निर्देश दे दिए हैं। ऐसे में उन शिक्षण संस्थानों के सामने बड़ी मुसीबत आ गई है, जो किसी अन्य कॉलेज के शिक्षकों के नाम अपने यहां दर्शाकर महाविद्यालय चला रहे हैं।
कई कॉलेज एक शिक्षक को अपने यहां नियुक्त दिखाकर विश्वविद्यालय से कोर्सों की मान्यता ले लेते हैं। मुख्य खेल शिक्षक की जानकारी देने में किया जाता है। कभी शिक्षक का नाम, कभी हाईस्कूल का रोलनंबर तो कभी कुछ अन्य जानकारियों को बदल दिया जाता है। ऐसे में ऑनलाइन सिस्टम में कंप्यूटर कॉलेजों के इस खेल को पकड़ नहीं पाता। वहीं, विश्वविद्यालय द्वारा भौतिक सत्यापन न कराने से भी यह धंधा खूब फलफूल रहा है। अभी पूरे राज्य के विश्वविद्यालय ऑनलाइन सिस्टम लागू नहीं कर पाए हैं, इसलिए बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेज दूसरे विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की अपने यहां तैनाती दिखा रहे हैं।
एचआरडी मंत्रालय का नया आदेश कॉलेजों की नींद उड़ा देगा। एआईएसएचआई पोर्टल पर डीसीएफ-2 फॅर्म में कॉलेजों के शिक्षकों के नाम और आधार नंबर भी अपलोड करने होंगे। इससे शिक्षकों के नाम पर कॉलेजों द्वारा किया जा रहे फर्जीवाड़ा पर रोक लग जाएगी।
विज्ञापन
यह है डीसीएफ-2
एचआरडी मंत्रालय ने शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता का पता करने के लिए साल 2010 से डीसीएफ-2 फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया। इसमें अब तक छात्र-शिक्षक संख्या, बुनियादी ढांचा, लाइब्रेरी का ब्योरा, मैदान, आय-व्यय का ब्योरा आदि भरना होता है।
विज्ञापन
कई कॉलेज एक शिक्षक को अपने यहां नियुक्त दिखाकर विश्वविद्यालय से कोर्सों की मान्यता ले लेते हैं। मुख्य खेल शिक्षक की जानकारी देने में किया जाता है। कभी शिक्षक का नाम, कभी हाईस्कूल का रोलनंबर तो कभी कुछ अन्य जानकारियों को बदल दिया जाता है। ऐसे में ऑनलाइन सिस्टम में कंप्यूटर कॉलेजों के इस खेल को पकड़ नहीं पाता। वहीं, विश्वविद्यालय द्वारा भौतिक सत्यापन न कराने से भी यह धंधा खूब फलफूल रहा है। अभी पूरे राज्य के विश्वविद्यालय ऑनलाइन सिस्टम लागू नहीं कर पाए हैं, इसलिए बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेज दूसरे विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की अपने यहां तैनाती दिखा रहे हैं।
विज्ञापन
एचआरडी मंत्रालय का नया आदेश कॉलेजों की नींद उड़ा देगा। एआईएसएचआई पोर्टल पर डीसीएफ-2 फॅर्म में कॉलेजों के शिक्षकों के नाम और आधार नंबर भी अपलोड करने होंगे। इससे शिक्षकों के नाम पर कॉलेजों द्वारा किया जा रहे फर्जीवाड़ा पर रोक लग जाएगी।
विज्ञापन
यह है डीसीएफ-2
एचआरडी मंत्रालय ने शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता का पता करने के लिए साल 2010 से डीसीएफ-2 फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया। इसमें अब तक छात्र-शिक्षक संख्या, बुनियादी ढांचा, लाइब्रेरी का ब्योरा, मैदान, आय-व्यय का ब्योरा आदि भरना होता है।