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Lucknow Wall Colapsed: मासूम बच्ची समेत एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत से पसरा मातम, घरों में नहीं जले चूल्हे

Sat, 17 Sep 2022 01:12 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sat, 17 Sep 2022 01:12 AM IST
सार

लखनऊ में आर्मी कैंट इलाके में दीवार गिरने से उससे सटी झोपड़ी में सो रहे झांसी के ग्राम पचवारा के एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची वहां कोहराम मच गया।

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Lucknow Wall Colapsed child with dive people dead In lucknow
लखनऊ में हादसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखनऊ में आर्मी कैंट इलाके में दीवार गिरने से उससे सटी झोपड़ी में सो रहे झांसी के ग्राम पचवारा के एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची वहां कोहराम मच गया। गांव के लोगों ने घरों में चूल्हे भी नहीं जलाए। पूरे गांव में दिन भर मातम पसरा रहा।
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मऊरानीपुर तहसील के उल्दन थाना के ग्राम पचवारा निवासी गिरिजानंद आदिवासी उर्फ पप्पू (46) पिछले बीस साल से लखनऊ में मजदूरी करता था। हादसे में गिरिजानंद समेत उसकी पत्नी मानकुंवर (40), पुत्र प्रदीप (28), बहू रेशमा (25), पोती नैना (2) की मौत हो गई जबकि छोटा पुत्र गोलू (16) गंभीर रूप से घायल है। सुबह इस हादसे की खबर के पहुंचते ही परिवार में मातम छा गया।
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पप्पू की मां बुजुर्ग भगवती का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के लोग भी बिलखने लगे। गांव के लोगों ने कई बार भगवती को संभालने की कोशिश की लेकिन, वह अपने बेटे को याद करके बिलखती रही। एक साथ गांव के पांच लोगों की मौत ने सभी को झकझोड़ दिया। मौत से गमगीन गांव के किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला।
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कोई नैना को दिखा दो... मेरा कलेजा निकाल लिया
लखनऊ में आर्मी कैंट इलाके में दीवार गिरने से उससे सटी झोपड़ी में सो रहे झांसी के ग्राम पचवारा के एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची वहां कोहराम मच गया। गिरिजानंद की मां भगवती को हादसे पर भरोसा नहीं हुआ। मेरा कलेजा निकाल लिया.. कहते हुए वह बार-बार बेहोश हो जाती।

होश में आते ही सबसे पहले अपनी दो साल की परपोती नैना को पुकारने लगती। अपने बेटे गिरिजानंद और पोते प्रदीप को याद करके रोती रही। गांव वालों का कहना है गिरिजानंद पर ही परिवार के पालन पोषण का जिम्मा था। इस वजह से वह पढ़-लिख नहीं सका। होश संभालते ही उसने मजदूरी शुरू कर दी। कई साल से पूरे परिवार के साथ मजदूरी ही कर रहा था। गांव में उसका कच्चा झोपड़ीनुमा घर है। इसका आधा हिस्सा भी गिर चुका। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी गिरिजानंद को नहीं मिल सका। बताया गया कि आवास के लिए आवेदन किया था, परंतु सूची में नाम नहीं आया था जबकि, उसके अन्य तीन भाइयों के प्रधानमंत्री आवास हैं।

बुजुर्ग मां पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक गिरिजानंद के पिता घनश्याम की चार साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। तब से बुजुर्ग मां भगवती (70) गांव में ही रह रही थी। हादसे की जानकारी होने पर वह सदमे से काफी देर तक अचेत बनी रही। लोगों ने मुश्किल से बुजुर्ग को संभाला। भगवती के तीन बेटे रामकिशोर (45), आनंद मोहन (42) व चंद्रभान (38) भी हैं, जो कानपुर में रहकर मजदूरी करते हैं।

जॉब कार्ड हैं, पर काम नहीं
मृतक गिरिजानंद और उसके तीन भाइयों के मनरेगा के जॉब कार्ड बने हुए हैं। लेकिन, काम न मिलने की वजह से सभी अपने-अपने परिवारों के साथ बाहर शहरों में मजदूरी करते हैं। इसके अलावा चारों भाइयों के पास कुल मिलाकर महज 80 डिसमिल जमीन ही है।

टीकमगढ़ के चार रिश्तेदारों की भी गई जान
लखनऊ में हुए हादसे में पचवारा गांव के गिरिजानंद व उनके परिवार के चार लोगों की मौत हुई। इसके अलावा उनके साथ रह रहे टीकमगढ़ के सिमरा गांव निवासी उनके रिश्तेदार धर्मेंद्र उर्फ धीरन (26), पत्नी चंदा (22) तथा दो व एक साल के पुत्र की भी मौत हो गई।


जनप्रतिनिधियों ने पहुंचकर बंधाया ढांढस
पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। प्रधान अखिलेश ने भी परिजनों से मुलाकात करके मदद का भरोसा दिलाया। अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी परिजनों से मुलाकात की। पीड़ित परिवार की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सहूलियतें नियमानुसार पीड़ित परिवार को जल्द मुहैया कराई जाएंगी। - मृत्युंजय नारायण मिश्रा, एसडीएम

घटना बेहद दुखद है। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। साथ ही राहत राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।
- डा. रश्मि आर्य, विधायक
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