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मंडी बनीं पर खुली नहीं
jhansi
Updated Sun, 29 Jan 2017 12:53 AM IST
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मंडी
- फोटो : demo pic
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बुंदेलखंड के किसानों की दशा संवारने के लिए बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत क्षेत्र में 133 मंडियों का निर्माण किया गया था। जिले को भी 24 मंडियों की सौगात मिली। इनमें से अधिकांश मंडियों में ताले लटके हैं। इससे मंडियों का मकसद पूरा नहीं हो रहा है। इसकी बानगी अंबावाय व पुनावली में बनीं मंडियां हैं। यहां सन्नाटा पसरा है। कमोबेश यही स्थिति जिले की अधिकतर मंडियों की है। अमर उजाला संवाददाता ने ग्रामीण अवस्थापना केंद्र अंबावाय और पुनावलीकलां में बनी मंडी में किसानों बात की और जैसा देखा प्रस्तुत है-
दोपहर एक बजे: ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (कृषि मंडी) अंबावाय
झांसी जिले में दतिया रोड पर 1.983 हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक करोड़ 67 लाख की लागत से बनी कृषि मंडी की चारों दुकानें आवंटित हो चुकी हैं। मंडी के गेट पर ताला लगा है। सुरक्षाकर्मी भी नहीं मिला। मंडी परिसर में झाड़-झंकार खड़ेे हैं। इससे लगता है कि यहां महीनों से साफ-सफाई नहीं हुई है। करारी गांव के किसान जगदीश प्रसाद प्रजापति ने बताया कि मंडी दो साल पहले बन थी। यहां कोई नहीं आता है। मार्च और अप्रैल के महीने में पंद्रह दिनों के लिए एक-दो खरीदार ही आते हैं। अंबावाय गांव निवासी किसान लखन सिंह राजपूत ने बताया कि खरीदार हम लोगों के अनाज को खरीदने से मना कर देते हैं। कमीशन ज्यादा लेते हैं। इस कारण हम लोगों को बीस किलोमीटर दूर झांसी ही जाना पड़ता है।
दोपहर बाद तीन बजे: ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (कृषि मंडी) पुनावलीकलां
रक्सा से पांच किलोमीटर दूर पुनावलीकलां गांव 1.660 हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक करोड़ 56 लाख की लागत से बनी कृषि मंडी में एक पीआरडी का जवान तैनात है। लेकिन वह भी मौके पर नहीं मिला। परिसर के अंदर साफ-सफाई नहीं है। गांव के पास ही बनी मंडी का फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। पुनावलीकलां गांव निवासी गोविंद दास प्रजापति ने बताया कि मंडी का गांव के लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। झांसी ही अनाज बेचने जाना पड़ता है। यहां बनी चारों दुकानें तो आवंटित हो चुकी हैं, लेकिन एक ही अढ़तिया आता है। उसी गांव के दीपेंद्र सिंह ने बताया कि ज्यादा उपज वाले किसानों की फसल ही खरीदी जाती है। हम लोग उतना कमीशन दे नहीं पाते। इस कारण यहां नहीं बेचते हैं।
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दोपहर एक बजे: ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (कृषि मंडी) अंबावाय
झांसी जिले में दतिया रोड पर 1.983 हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक करोड़ 67 लाख की लागत से बनी कृषि मंडी की चारों दुकानें आवंटित हो चुकी हैं। मंडी के गेट पर ताला लगा है। सुरक्षाकर्मी भी नहीं मिला। मंडी परिसर में झाड़-झंकार खड़ेे हैं। इससे लगता है कि यहां महीनों से साफ-सफाई नहीं हुई है। करारी गांव के किसान जगदीश प्रसाद प्रजापति ने बताया कि मंडी दो साल पहले बन थी। यहां कोई नहीं आता है। मार्च और अप्रैल के महीने में पंद्रह दिनों के लिए एक-दो खरीदार ही आते हैं। अंबावाय गांव निवासी किसान लखन सिंह राजपूत ने बताया कि खरीदार हम लोगों के अनाज को खरीदने से मना कर देते हैं। कमीशन ज्यादा लेते हैं। इस कारण हम लोगों को बीस किलोमीटर दूर झांसी ही जाना पड़ता है।
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दोपहर बाद तीन बजे: ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (कृषि मंडी) पुनावलीकलां
रक्सा से पांच किलोमीटर दूर पुनावलीकलां गांव 1.660 हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक करोड़ 56 लाख की लागत से बनी कृषि मंडी में एक पीआरडी का जवान तैनात है। लेकिन वह भी मौके पर नहीं मिला। परिसर के अंदर साफ-सफाई नहीं है। गांव के पास ही बनी मंडी का फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है। पुनावलीकलां गांव निवासी गोविंद दास प्रजापति ने बताया कि मंडी का गांव के लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। झांसी ही अनाज बेचने जाना पड़ता है। यहां बनी चारों दुकानें तो आवंटित हो चुकी हैं, लेकिन एक ही अढ़तिया आता है। उसी गांव के दीपेंद्र सिंह ने बताया कि ज्यादा उपज वाले किसानों की फसल ही खरीदी जाती है। हम लोग उतना कमीशन दे नहीं पाते। इस कारण यहां नहीं बेचते हैं।
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