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मनरेगा में फिर मिली गड़बड़ी, प्रधान समेत सचिव से होगी वसूली

Fri, 25 Dec 2020 01:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Dec 2020 01:26 AM IST
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Manarega corruption pradam and sachiv recoverry
झांसी। मनरेगा के कार्यों की निगरानी न होने से लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। मऊरानीपुर के बिगौना गांव में मनरेगा से कराए कामों में गड़बड़ी पाई गई। जांच में ग्राम प्रधान, सचिव एवं रोजगार सेवक को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कुल 63 हजार रुपये की वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रवासी मजदूरों के वापस लौटने पर सरकार ने इस बार मनरेगा के जरिए करोड़ों रुपये से कार्य कराए लेकिन, अब सामने आ रहा कि इन कार्यों को कराने में जमकर मनमानी की गई। धीरे-धीरे इन गुणवत्ताविहीन कामों की कलई खुल रही। अब तक जांच पड़ताल के दौरान आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके। इनमें काम गुणवत्ता पूर्वक न होने के बावजूद भुगतान कर दिए गए। ताजा मामला मऊरानीपुर के बिगौना गांव का है।
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यहां मनरेगा के जरिए कई कच्चे काम कराए गए लेकिन, मानक की कोई परवाह नहीं की गई। शिकायत मिलने पर लखनऊ से इसकी तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए गए। तकनीकी जांच के दौरान इन कार्यों में गड़बड़ी की पुष्टि भी हो गई। टीएसी जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान राम प्रसाद, सचिव हरिश्चंद्र पटेल एवं रोजगार सेवक से कुल 63 हजार की रिकवरी करने के आदेश जिलाधिकारी की ओर से जारी कर दिए गए। प्रत्येक आरोपी से 21 हजार रुपये की वसूली की जाएगी।
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सिर्फ रिकवरी करके छोड़े जा रहे आरोपी
मनरेगा से कराए जा रहे कार्यों में लगातार गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं। जांच रिपोर्ट के जरिए साबित हो रहा कि आरोपी अफसरों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को चपत लगा रहे हैं लेकिन, इसके बावजूद न जिम्मेदार अफसरों पर कोई कार्रवाई हो रही है न आरोपियों के खिलाफ एफआईआर ही दर्ज कराई जा रही। इसी नरमदिली का फायदा उठाते हुए मनरेगा के कामों में लगातार गड़बड़ियां की जा रही हैं। कुछ दिनों पहले बमौर ब्लॉक के अलामपुरा गांव में बकरी आश्रय स्थल के नाम पर भी लाखों रुपये के घपले का मामला उजागर हुआ। आंतरिक रिपोर्ट में घपले की पुष्टि भी हो गई। यहां बकरी आश्रय स्थल के लिए जमीन तक न होने केबावजूद लाभर्थी के नाम पर लाखों रूपये का भुगतान कर दिया गया लेकिन, जिम्मेदार अफसरों को बचाने के लिए पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है।
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