{"_id":"610d81498ebc3ec1c43af850","slug":"major-dhyanchand-raised-the-head-of-slave-indians-with-pride-jhansi-news-jhs201325615","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुलाम भारतीयों का मेजर ध्यानचंद ने फक्र से ऊंचा किया था सिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुलाम भारतीयों का मेजर ध्यानचंद ने फक्र से ऊंचा किया था सिर
विज्ञापन
मेजर ध्यानचंद की खबर में ..... हीरोज ग्राउंड स्थित मेजर ध्यानचंद की समाधि स्थल। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर किए जाने से झांसी के नागरिकों को ठीक वैसे ही फक्र का अहसास हुआ, जैसा कि 1928 में दद्दा के करिश्माई खेल के बूते पर भारतीय टीम ने पहली बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल किया था। मेजर ने एक के बाद एक तीन ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिखाए थे।
मेजर ध्यानचंद वो नाम है, जिसने गुलाम भारत के नागरिकों का सिर अपने करिश्माई खेल के बूते पर पहली बार फक्र से ऊंचा कर दिया था। लगातार तीन ओलंपिक खेलों में दद्दा ने भारत को तीन गोल्ड मेडल दिलाए थे। 1928 में हुए ओलंपिक खेलों में खिताबी मुकाबले में हालैंड को 3-0 से शिकस्त देकर गोल्ड अपने नाम कर लिया था। इसके बाद 1932 में लॉस एंजल्स में खेले गए ओलंपिक में भी भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के फाइनल में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया था। इसमें 10 गोल अकेले मेजर ध्यानचंद ने ही दागे थे। इसके बाद 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कमान मेजर ध्यानचंद के हाथ में ही थी। फाइनल मैच में भारत ने उस दौर की दुनिया की सबसे सशक्त टीम जर्मनी को 8-1 से हराकर विश्व पटल पर भारत का परचम फहराया था। उनके खेल का मुरीद हिटलर भी हो गया था। उसने मेजर को जर्मनी की सेना में शामिल होने का प्रलोभन दिया था। लेकिन, मेजर ने इसे ये कहते हुए ठुकरा दिया था कि वे सिर्फ अपने देश के लिए ही खेलेंगे। शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद के नाम से करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही हर झांसी वाले की आंखों के सामने दद्दा के दौर का हॉकी का वो स्वर्णिम इतिहास सामने आ गया।
सरकार की घोषणा से बुंदेलों में छाया हर्ष
देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड के नाम से खिलाड़ियों को दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद झांसी के सभी खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और नगर वासियों में हर्ष की लहर दौड़ गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाईं। लोगों ने कहा कि हॉकी जादूगर मेजर झांसी की शान है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बाद झांसी की पहचान दद्दा ध्यानचंद से है। भारत सरकार के इस निर्णय से झांसी को गर्व की विशेष अनुभूति हो रही हैं। एक बार फिर उम्मीद जगी है कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिलेगा। इसके अलावा बुंदेलखंड के हॉकी खिलाड़ियों को भी नये अवसर प्रदान होंगे।
विज्ञापन
एक अति उत्तम निर्णय है। इससे युवाओं में खेल भावना को बल मिलेगा और वह खेलों के प्रति जागरूक होंगे।
- प्रोफेसर सुनील काविया
मेजर ध्यानचंद खेलों की दुनिया में अमर हैं। झांसी की पहचान ध्यानचंद से भी है। प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद।
- पन्नालाल असर, वरिष्ठ साहित्यकार
सरकार के इस निर्णय से बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि समूचे देश व प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।
- सुबोध खंडकर, पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी एवं सचिव झांसी हॉकी संघ
देश का सबसे बड़ा खेल रत्न अवॉर्ड ध्यान चंद जी के नाम से दिया जा रहा है, पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
- हिकमत उल्लाह, सचिव - भारतीय खिलाड़ी कल्याण संघ
पिछले कई सालों से मांग थी कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाए। सरकार का निर्णय सराहनीय है।
- पंकज शुक्ला व्यापारी नेता
खेल के सर्वोच्च सम्मान दद्दा के नाम से किए जाने से मेजर की कर्मभूमि का हर नागरिक गौरवान्वित है।
- संतोष निषाद, समाजसेवी
हम सभी के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। जल्द ही मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न भी मिलना चाहिए।
- अरविंद कपूर, सचिव-जेडीसीए
देश की हॉकी के लिए अगस्त का महीना बेहद अच्छा रहा। अब ध्यानचंद के नाम से देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान मिलेगा।
- जीएस भोगल, प्रधानाचार्य खालसा इंटर कॉलेज
बच्चों और युवाओं में हॉकी को लेकर विशेष आकर्षण बनेगा। बुंदेलखंड को बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है।
- मुकेश श्रीवास्तव सचिव सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट
मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न भी मिलना चाहिए। ध्यानचंद जी हम सभी खिलाड़ियों के लिए आदर्श हैं।
- नितिन कुमार, खिलाड़ी
देश का सर्वोच्च खेल सम्मान ध्यान चंद जी के नाम से मिलना हम सभी के लिए गौरव की बात है।
- संदीप, खिलाड़ी
हमारी झांसी ने हॉकी में कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं। सभी खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत दद्दा ध्यानचंद है।
- रोहित दिवाकर, खिलाड़ी
हॉकी और अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए हॉकी के जादूगर ध्यानचंद हमेशा आदर्श रहेंगे।
- मुफीद खान खिलाड़ी
विज्ञापन
मेजर ध्यानचंद वो नाम है, जिसने गुलाम भारत के नागरिकों का सिर अपने करिश्माई खेल के बूते पर पहली बार फक्र से ऊंचा कर दिया था। लगातार तीन ओलंपिक खेलों में दद्दा ने भारत को तीन गोल्ड मेडल दिलाए थे। 1928 में हुए ओलंपिक खेलों में खिताबी मुकाबले में हालैंड को 3-0 से शिकस्त देकर गोल्ड अपने नाम कर लिया था। इसके बाद 1932 में लॉस एंजल्स में खेले गए ओलंपिक में भी भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के फाइनल में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया था। इसमें 10 गोल अकेले मेजर ध्यानचंद ने ही दागे थे। इसके बाद 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कमान मेजर ध्यानचंद के हाथ में ही थी। फाइनल मैच में भारत ने उस दौर की दुनिया की सबसे सशक्त टीम जर्मनी को 8-1 से हराकर विश्व पटल पर भारत का परचम फहराया था। उनके खेल का मुरीद हिटलर भी हो गया था। उसने मेजर को जर्मनी की सेना में शामिल होने का प्रलोभन दिया था। लेकिन, मेजर ने इसे ये कहते हुए ठुकरा दिया था कि वे सिर्फ अपने देश के लिए ही खेलेंगे। शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद के नाम से करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही हर झांसी वाले की आंखों के सामने दद्दा के दौर का हॉकी का वो स्वर्णिम इतिहास सामने आ गया।
विज्ञापन
सरकार की घोषणा से बुंदेलों में छाया हर्ष
देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड के नाम से खिलाड़ियों को दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद झांसी के सभी खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और नगर वासियों में हर्ष की लहर दौड़ गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाईं। लोगों ने कहा कि हॉकी जादूगर मेजर झांसी की शान है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बाद झांसी की पहचान दद्दा ध्यानचंद से है। भारत सरकार के इस निर्णय से झांसी को गर्व की विशेष अनुभूति हो रही हैं। एक बार फिर उम्मीद जगी है कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिलेगा। इसके अलावा बुंदेलखंड के हॉकी खिलाड़ियों को भी नये अवसर प्रदान होंगे।
विज्ञापन
एक अति उत्तम निर्णय है। इससे युवाओं में खेल भावना को बल मिलेगा और वह खेलों के प्रति जागरूक होंगे।
- प्रोफेसर सुनील काविया
मेजर ध्यानचंद खेलों की दुनिया में अमर हैं। झांसी की पहचान ध्यानचंद से भी है। प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद।
- पन्नालाल असर, वरिष्ठ साहित्यकार
सरकार के इस निर्णय से बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि समूचे देश व प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।
- सुबोध खंडकर, पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी एवं सचिव झांसी हॉकी संघ
देश का सबसे बड़ा खेल रत्न अवॉर्ड ध्यान चंद जी के नाम से दिया जा रहा है, पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
- हिकमत उल्लाह, सचिव - भारतीय खिलाड़ी कल्याण संघ
पिछले कई सालों से मांग थी कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाए। सरकार का निर्णय सराहनीय है।
- पंकज शुक्ला व्यापारी नेता
खेल के सर्वोच्च सम्मान दद्दा के नाम से किए जाने से मेजर की कर्मभूमि का हर नागरिक गौरवान्वित है।
- संतोष निषाद, समाजसेवी
हम सभी के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। जल्द ही मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न भी मिलना चाहिए।
- अरविंद कपूर, सचिव-जेडीसीए
देश की हॉकी के लिए अगस्त का महीना बेहद अच्छा रहा। अब ध्यानचंद के नाम से देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान मिलेगा।
- जीएस भोगल, प्रधानाचार्य खालसा इंटर कॉलेज
बच्चों और युवाओं में हॉकी को लेकर विशेष आकर्षण बनेगा। बुंदेलखंड को बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है।
- मुकेश श्रीवास्तव सचिव सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट
मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न भी मिलना चाहिए। ध्यानचंद जी हम सभी खिलाड़ियों के लिए आदर्श हैं।
- नितिन कुमार, खिलाड़ी
देश का सर्वोच्च खेल सम्मान ध्यान चंद जी के नाम से मिलना हम सभी के लिए गौरव की बात है।
- संदीप, खिलाड़ी
हमारी झांसी ने हॉकी में कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं। सभी खिलाड़ियों के प्रेरणा स्रोत दद्दा ध्यानचंद है।
- रोहित दिवाकर, खिलाड़ी
हॉकी और अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए हॉकी के जादूगर ध्यानचंद हमेशा आदर्श रहेंगे।
- मुफीद खान खिलाड़ी