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महाशिवरात्रि आज, गूंजेंगे ‘बम-बम भोले’
Mon, 04 Mar 2019 01:01 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Mon, 04 Mar 2019 01:01 AM IST
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- फोटो : demo
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भगवान शिव और पार्वती जी के विवाह का पर्व महाशिवरात्रि सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। तड़के तीन बजे से महादेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगने लगेगा। शिव मंत्रों का जाप होगा और इसके बाद दूल्हा स्वरूप में भगवान भूतनाथ का मनोहारी श्रृंगार किया जाएगा। कई शिवालयों से गाजे-बाजे के बीच भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें भूत-प्रेत और देवी देवताओं के स्वरूपों के साथ श्रद्धालु भक्ति नृत्य में विभोर रहेंगे।
पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, बाहर बड़ागांव गेट स्थित राजा बाबा महाकालेश्वर मंदिर, भूतनाथ मंदिर, दीक्षित बाग स्थित हजारिया महादेव मंदिर, कालीबाड़ी स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में सोमवार की सुबह तड़के तीन बजे से हर-हर महादेव की गूंज के साथ श्रद्धालु दर्शन को आने लगेंगे। रविवार को दिन भर श्रद्धालु शिवालयों की साज सज्जा में लगे रहे और बिजली की रंग-बिरंगी झालरें लगाने में नजर आए। इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठान की भी तैयारियां कीं। पर्व की रात शिवालयों में भगवान शिव व पार्वती जी के विवाह के अनुष्ठान तथा पूजा होगी।
मध्य रात्रि हुई भस्म आरती
सिद्धेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि की पूर्व मध्य रात्रि में विशेष पूजा हुई, जो रात 11 से 12 बजे के बीच चली। श्रद्धालुओं ने भस्म आरती और मंत्रों की साधना की। आचार्य हरीओम पाठक ने बताया कि पर्व पर भगवान सिद्धेश्वर का 108 औषधियों से अभिषेक किया जाएगा। वहीं, मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए पूजा अनुष्ठान के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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किला में आज नि:शुल्क प्रवेश
महानगर के एतिहासिक किला में 17वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर है। हर साल हजारों श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर शिवालय में दर्शन को आते हैं। ऐसे में संपूर्ण किला परिसर मेला में तब्दील हो जाता है लेकिन किले में प्रवेश नि:शुल्क न होने से बीते वर्षों में कई बार श्रद्धालुओं व किला कर्मचारियों के बीच वाद-विवाद की स्थिति पैदा होती रही है। ऐसे में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता था लेकिन इस बार शिवरात्रि पर्व पर केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने संरक्षित एतिहासिक किले में श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश नि:शुल्क कर दिया है। किला प्रभारी अभिषेक कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए पर्व पर प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
मंदिरों से जुड़ीं मान्यताएं
- भूतनाथ मंदिर में भांग चढ़ाने और सोलह सोमवार एक निर्धारित समय पर पूजा दर्शन करने की मान्यता है। पुजारी राजकुमार मकड़ारिया के अनुसार ये बेहद प्राचीन मंदिर है।
- पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर में शिव रुद्र कोटि संहिता का पाठ करने की मान्यता है। इसमें भगवान शिव के सहस्त्र नाम है।
- सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण पुष्य नक्षत्र में हुआ था। पुष्य नक्षत्र में पूजा, अभिषेक का महत्व है। इससे उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, बाहर बड़ागांव गेट स्थित राजा बाबा महाकालेश्वर मंदिर, भूतनाथ मंदिर, दीक्षित बाग स्थित हजारिया महादेव मंदिर, कालीबाड़ी स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में सोमवार की सुबह तड़के तीन बजे से हर-हर महादेव की गूंज के साथ श्रद्धालु दर्शन को आने लगेंगे। रविवार को दिन भर श्रद्धालु शिवालयों की साज सज्जा में लगे रहे और बिजली की रंग-बिरंगी झालरें लगाने में नजर आए। इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठान की भी तैयारियां कीं। पर्व की रात शिवालयों में भगवान शिव व पार्वती जी के विवाह के अनुष्ठान तथा पूजा होगी।
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मध्य रात्रि हुई भस्म आरती
सिद्धेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि की पूर्व मध्य रात्रि में विशेष पूजा हुई, जो रात 11 से 12 बजे के बीच चली। श्रद्धालुओं ने भस्म आरती और मंत्रों की साधना की। आचार्य हरीओम पाठक ने बताया कि पर्व पर भगवान सिद्धेश्वर का 108 औषधियों से अभिषेक किया जाएगा। वहीं, मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए पूजा अनुष्ठान के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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महानगर के एतिहासिक किला में 17वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर है। हर साल हजारों श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर शिवालय में दर्शन को आते हैं। ऐसे में संपूर्ण किला परिसर मेला में तब्दील हो जाता है लेकिन किले में प्रवेश नि:शुल्क न होने से बीते वर्षों में कई बार श्रद्धालुओं व किला कर्मचारियों के बीच वाद-विवाद की स्थिति पैदा होती रही है। ऐसे में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता था लेकिन इस बार शिवरात्रि पर्व पर केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने संरक्षित एतिहासिक किले में श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश नि:शुल्क कर दिया है। किला प्रभारी अभिषेक कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए पर्व पर प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
मंदिरों से जुड़ीं मान्यताएं
- भूतनाथ मंदिर में भांग चढ़ाने और सोलह सोमवार एक निर्धारित समय पर पूजा दर्शन करने की मान्यता है। पुजारी राजकुमार मकड़ारिया के अनुसार ये बेहद प्राचीन मंदिर है।
- पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर में शिव रुद्र कोटि संहिता का पाठ करने की मान्यता है। इसमें भगवान शिव के सहस्त्र नाम है।
- सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण पुष्य नक्षत्र में हुआ था। पुष्य नक्षत्र में पूजा, अभिषेक का महत्व है। इससे उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।