फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   mahanagro me prdusan ke bech bundelkhand me rahat ki bayar

महानगरों में प्रदूषण के बीच बुंदेलखंड में राहत की बयार

Mon, 09 Nov 2020 01:50 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2020 01:50 AM IST
विज्ञापन
mahanagro me prdusan ke bech bundelkhand me rahat ki bayar
देश के अन्य प्रदूषित शहरों की तुलना में बुंदेलखंड के जिलों में कम प्रदूषण है। - फोटो : ???? ????
महानगरों में प्रदूषण के बीच बुंदेलखंड में राहत की बयार
विज्ञापन

झांसी। देश की राजधानी, महानगर और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख नगरों में इन दिनों जहरीली हवा ने लोगों का सांस लेना दूभर कर दिया है। वहीं, झांसी समेत बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में हाल बेहतर हैं। अन्य प्रदूषित शहरों की तुलना में बुंदेलखंड में प्रदूषण एक तिहाई से कम है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इस संतुलन को बनाए रखने की जरूरत है। यह एक चुनौती है और झांसी जैसे महानगर के लिए बेहतर जीवनशैली का देश भर में रोल मॉडल बनने का अवसर भी।
एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण ने जीवन नरक कर दिया है। पिछले चार दिनों से ये इलाके जहरीली हवा के चैंबर बनते जा रहे हैं। इनका वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 450 के आसपास जा पहुंचा है। दिवाली तक हालात और बिगड़ने के आसार हैं। पराली जलने के साथ ही पटाखों से प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी), पर्यावरण से जुड़ी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की चेतावनी के बावजूद हालात नियंत्रण से बाहर हैं।
विज्ञापन

इस सबके बावजूद तुलनात्मक रूप से बुंदेलखंड के हालात बहुत बेहतर हैं। वैसे हवा में प्रदूषण यहां भी बढ़ रहा है। सवा सौ के आसपास रहने वाला झांसी का एक्यूआई रविवार को बढ़कर 160 पहुंच गया। फिर भी हालात बहुत हद तक नियंत्रण में हैं। इस पर इतराने की नहीं, वायु प्रदूषण के स्तर को बनाए रखने और कम करने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसीलिए शादी व पार्टी के लिए ओरछा आते लोग: डॉ.विनीत कुमार
पर्यावरणविद और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.विनीत कुमार के अनुसार यहां महानगरीय जीवनशैली का हर दबाव है। इसके बावजूद यहां आगरा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, लखनऊ जैसे प्रदेश के अन्य शहरों जैसे हालात नहीं हैं। वहां एक्यूआई 400 से 450 तक पहुंच गया है। वहीं झांसी में यह 150 के आसपास है। ललितपुर में वन क्षेत्र अधिक है इसलिए वहां स्थिति और बेहतर है। लगभग पूरे बुंदेलखंड में स्थिति बेहतर है। क्योंकि यहां लोगों में विकास की होड़ नहीं है। गगनचुंबी इमारतों में शान ढूंढने, पेड़ों और जंगलों को काटने की ललक नहीं है। यही कारण है कि बड़े-बड़े सेमिनार, थीम वेडिंग के लिए देश के नामचीन सात सितारा होटल को छोड़ लोग बुंदेलखंड के ओरछा आते हैं। यही मौका है पूरे बुंदेलखंड के प्राकृतिक स्वरूप की छाप छोड़ने और इसके स्वरूप को बचाकर रखने का।
बुंदेलखंड में एक्यूआई
झांसी 160
ललितपुर 130
महोबा 145
हमीरपुर 140
बांदा 162
(नोट: इन दिनों, आम तौर पर और कम रहता है)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed