{"_id":"5f0234c88ebc3e432b5ac3f4","slug":"mafia-collect-gun-kartoos-jhansi-news-jhs1708113142","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिश्तेदारों के नाम पर बने लाइसेंसों से कारतूस बटोर रहे माफिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिश्तेदारों के नाम पर बने लाइसेंसों से कारतूस बटोर रहे माफिया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। बुंदेलखंड में माफियाओं ने अपने-अपने रिश्तेदारोें के नाम से असलहों के लाइसेंस बनवाकर खूब कारतूस बटोरे। इन कारतूसों से घटनाएं भी खूब हुईं। अब कानपुर में हुई घटना के बाद खुफिया जांच शुरू होने के बाद माफियाओं के पसीना छूटने लगा है। बुंदेलखंड के जिलों की पुलिस ने रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है।
हथियारों से लैैस बदमाश आए दिन किसी न किसी घटना को अंजाम दे रहे हैं। इनके पास से असलहों से लेकर कारतूस मिल रहे हैं। यह कारतूस कहां से आ रहे हैं, इस मामले में पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी। पड़ताल के बाद भी सरगना तक को पुलिस नहीं दबोच सकी। रेंज के झांसी, ललितपुर व जालौन की पुलिस ने एक साल में अठारह सौ से अधिक कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस ने बाकायदा चार्जशीट लगाकर थाने भी भेजी, लेकिन अब तक यह पता नहीं चला कि कारतूस कहां से आए थे।
झांसी रेंज के साथ-साथ यही हाल बुंदेलखंड के सभी जिलों का है। यहां भी बदमाशों के पास कारतूस पहुंच रहे हैं। जिससे घटनाएं हो रही हैं। बुंदेलखंड के जिलों की पुलिस द्वारा की गई पड़ताल में पता चला है कि रिश्तेदारों के नाम पर बदमाशों ने लाइसेंस बनवा रखे हैं। इनसे कारतूस लेेकर घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अभी पुलिस की जांच चल ही रही थी, तभी कानपुर में हुई घटना ने पोल खोलकर रख दी है। अब पुलिस आनन-फानन में कारतूसों की पड़ताल में जुटने लगी है। खुफिया जांच शुरू होने के बाद बदमाशों का पसीना छूटने लगा है।
विज्ञापन
अवैध नहीं बन सकते कारतूस
शस्त्र कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आए दिन फायरिंग व कारतूसों का बदमाशों के पास से पकड़ा जाना बड़ा सवाल खड़े करता है। आखिर ये कारतूस कहां से आ रहे हैं। इस सवाल के पीछे भी बड़ी वजह है। असलहे तो अवैध तरीके से बनाकर बेचे जा सकते हैं, लेकिन कारतूस तो सिर्फ फैक्ट्री में ही बनते हैं।
400 रुपये तक का कारतूस
पिस्टल के कारतूस महंगे मिलते हैं। इसमें 0.32 बोर का देशी कारतूस ही अवैध तरीके से 200 रुपये का मिलता है। जिसकी बाजार में कीमत करीब 100 रुपये है। प्रतिबंधित बोर 9 एमएम और 0.30 बोर का कारतूस 400 रुपये तक का मिलता है। यह कारतूस हथियार तस्कर ही उपलब्ध कराते हैं या कुछ बदमाशों की सेटिंग कुछ पुलिस वालों से होती है, जिनके जरिए कारतूस मिल जाते हैं।
झांसी का आंकड़ा
वर्ष 2019 से अब तक का आंकड़ा
मुकदमे : 221
तमंचे : 187
पिस्टल : 98
कारतूस : 862
ललितपुर का आंकड़ा
वर्ष 2019 से अब तक का आंकड़ा
मुकदमे :198
तमंचे : 111
पिस्टल : 44
कारतूस : 342
जालौन का आंकड़ा
वर्ष 2019 से अब तक का आंकड़ा
मुकदमे : 241
तमंचे : 176
पिस्टल : 129
कारतूस : 611
बदमाशों के रिश्तेदारों के नाम पर कारतूस के मामले पहले भी प्रदेश में उजागर हो चुके हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर जेल भेजना चाहिए।
एके जैन, पूर्व डीजीपी
वर्जन
.............................
ऐसे मामलों में पुलिस पड़ताल कर पूरी कार्रवाई करती है। कारतूस से संबंधित कई मामले ऐसे मामले भी हैं, जिनमें पुलिस पड़ताल कर रही है। जल्द ही पुलिस बड़ी कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेजेगी।
राहुल श्रीवास्तव, एसपी सिटी
विज्ञापन
हथियारों से लैैस बदमाश आए दिन किसी न किसी घटना को अंजाम दे रहे हैं। इनके पास से असलहों से लेकर कारतूस मिल रहे हैं। यह कारतूस कहां से आ रहे हैं, इस मामले में पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी। पड़ताल के बाद भी सरगना तक को पुलिस नहीं दबोच सकी। रेंज के झांसी, ललितपुर व जालौन की पुलिस ने एक साल में अठारह सौ से अधिक कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस ने बाकायदा चार्जशीट लगाकर थाने भी भेजी, लेकिन अब तक यह पता नहीं चला कि कारतूस कहां से आए थे।
विज्ञापन
झांसी रेंज के साथ-साथ यही हाल बुंदेलखंड के सभी जिलों का है। यहां भी बदमाशों के पास कारतूस पहुंच रहे हैं। जिससे घटनाएं हो रही हैं। बुंदेलखंड के जिलों की पुलिस द्वारा की गई पड़ताल में पता चला है कि रिश्तेदारों के नाम पर बदमाशों ने लाइसेंस बनवा रखे हैं। इनसे कारतूस लेेकर घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अभी पुलिस की जांच चल ही रही थी, तभी कानपुर में हुई घटना ने पोल खोलकर रख दी है। अब पुलिस आनन-फानन में कारतूसों की पड़ताल में जुटने लगी है। खुफिया जांच शुरू होने के बाद बदमाशों का पसीना छूटने लगा है।
विज्ञापन
अवैध नहीं बन सकते कारतूस
शस्त्र कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आए दिन फायरिंग व कारतूसों का बदमाशों के पास से पकड़ा जाना बड़ा सवाल खड़े करता है। आखिर ये कारतूस कहां से आ रहे हैं। इस सवाल के पीछे भी बड़ी वजह है। असलहे तो अवैध तरीके से बनाकर बेचे जा सकते हैं, लेकिन कारतूस तो सिर्फ फैक्ट्री में ही बनते हैं।
400 रुपये तक का कारतूस
पिस्टल के कारतूस महंगे मिलते हैं। इसमें 0.32 बोर का देशी कारतूस ही अवैध तरीके से 200 रुपये का मिलता है। जिसकी बाजार में कीमत करीब 100 रुपये है। प्रतिबंधित बोर 9 एमएम और 0.30 बोर का कारतूस 400 रुपये तक का मिलता है। यह कारतूस हथियार तस्कर ही उपलब्ध कराते हैं या कुछ बदमाशों की सेटिंग कुछ पुलिस वालों से होती है, जिनके जरिए कारतूस मिल जाते हैं।
झांसी का आंकड़ा
वर्ष 2019 से अब तक का आंकड़ा
मुकदमे : 221
तमंचे : 187
पिस्टल : 98
कारतूस : 862
ललितपुर का आंकड़ा
वर्ष 2019 से अब तक का आंकड़ा
मुकदमे :198
तमंचे : 111
पिस्टल : 44
कारतूस : 342
जालौन का आंकड़ा
वर्ष 2019 से अब तक का आंकड़ा
मुकदमे : 241
तमंचे : 176
पिस्टल : 129
कारतूस : 611
बदमाशों के रिश्तेदारों के नाम पर कारतूस के मामले पहले भी प्रदेश में उजागर हो चुके हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर जेल भेजना चाहिए।
एके जैन, पूर्व डीजीपी
वर्जन
.............................
ऐसे मामलों में पुलिस पड़ताल कर पूरी कार्रवाई करती है। कारतूस से संबंधित कई मामले ऐसे मामले भी हैं, जिनमें पुलिस पड़ताल कर रही है। जल्द ही पुलिस बड़ी कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेजेगी।
राहुल श्रीवास्तव, एसपी सिटी