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रेलवे बजट से बुंदेलखंडियों की उम्मीद, झांसी-बांदा के बीच चले लोकल ट्रेन, बर्थों की संख्या बढ़ाने की मांग
Fri, 29 Jan 2021 07:20 PM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2021 07:20 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना महामारी के बीच एक फरवरी को संसद में आम बजट के साथ पेश होने वाले रेलवे बजट से बुंदेलखंड वासियों को बहुत उम्मीदें हैं। वह चाहते हैं कि उनके क्षेत्र की रेल से जुड़ी समस्याएं खत्म हों। साथ ही, उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल सकें। झांसी रेल मंडल के यात्रियों की दर्जन भर से अधिक ऐसी मांगें हैं, जो सालों से उठाई जा रही हैं। उन्होंने झांसी के बांदा के लिए फास्ट से लेकर लोकल ट्रेनों के चलाने की मांग की है। इन मांगों का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड तो भेजा गया, लेकिन वह अब तक पूरी नहीं हुईं हैं। इस बजट से सभी को आशा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुंदेलखंड वासियों की मांगों पर सुनवाई जरूर करेंगी।
लोगों का कहना है कि आरक्षण बुकिंग कराने की सीमा जब से चार महीने होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि, चार माह पहले यात्रा का शेड्यूल बनाना मुमकिन नहीं होता है। रेलवे चाहे किराए में और बढ़ोत्तरी कर ले, लेकिन उसे यात्रियों की सहूलियत का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने ट्रेनों में बर्थों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में स्पोर्ट्स कांपलेक्स बनाया जाना चाहिए। अगर इस ग्राउंड को क्रिकेट के रणजी मैचों के लायक बना दिया जाए तो हुनरमंद खिलाड़ियों के लिए यह वरदान साबित होगा। खिलाड़ियों को तैयारी करने के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना होगा।
लोगों का कहना है कि देश के महत्वपूर्ण स्टेशनों में शुमार झांसी से रोजाना डेढ़ सौ से अधिक अप और डाउन ट्रेनें देश के विभिन्न राज्यों के लिए जाती हैं, लेकिन असम समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। यहां के लिए नई ट्रेन चलनी चाहिए। हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाले इन यात्रियों को आज भी ट्रेनों की कमी व डिब्बों की संख्या कम होने के कारण कोचों में क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को बैठना पड़ता है। इसलिए ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
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विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो के लिए शताब्दी एक्सप्रेस शुरू किए जाने की योजना थी, मगर अब इस पर अमल नहीं हो सका है। खजुराहो तक शताब्दी एक्सप्रेस की सुविधा जल्द शुरू होना चाहिए।
पवन तिवारी, खातीबाबा।
राजस्थान के अजमेर, अलवर, बीकानेर आदि पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों के लिए भी कोई सीधी ट्रेन अब तक नहीं मिल पाई है।
बबलू राय, छनियापुरा।
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लोगों का कहना है कि आरक्षण बुकिंग कराने की सीमा जब से चार महीने होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि, चार माह पहले यात्रा का शेड्यूल बनाना मुमकिन नहीं होता है। रेलवे चाहे किराए में और बढ़ोत्तरी कर ले, लेकिन उसे यात्रियों की सहूलियत का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने ट्रेनों में बर्थों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में स्पोर्ट्स कांपलेक्स बनाया जाना चाहिए। अगर इस ग्राउंड को क्रिकेट के रणजी मैचों के लायक बना दिया जाए तो हुनरमंद खिलाड़ियों के लिए यह वरदान साबित होगा। खिलाड़ियों को तैयारी करने के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना होगा।
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लोगों का कहना है कि देश के महत्वपूर्ण स्टेशनों में शुमार झांसी से रोजाना डेढ़ सौ से अधिक अप और डाउन ट्रेनें देश के विभिन्न राज्यों के लिए जाती हैं, लेकिन असम समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। यहां के लिए नई ट्रेन चलनी चाहिए। हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाले इन यात्रियों को आज भी ट्रेनों की कमी व डिब्बों की संख्या कम होने के कारण कोचों में क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को बैठना पड़ता है। इसलिए ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
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पवन तिवारी, खातीबाबा।
राजस्थान के अजमेर, अलवर, बीकानेर आदि पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों के लिए भी कोई सीधी ट्रेन अब तक नहीं मिल पाई है।
बबलू राय, छनियापुरा।