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काम मिला न मजदूरी, पलायन बना मजबूरी

Tue, 31 Dec 2019 02:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2019 02:21 AM IST
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lobour not work found in village
झांसी। सरकार मनरेगा मजदूरों को 15 दिन में मजदूरी न मिलने पर मुआवजा देने का दावा कर रही है, लेकिन जिले में मनरेगा श्रमिक पलायन को मजबूर हैं। आलम यह है कि समय पर काम और मजदूरी नहीं मिलने से मजदूर शहर की ओर दौड़ लगा रहे हैं। जिले में मौजूदा वर्ष में अब तक साढ़े तीन लाख मजदूरों में से महज 83 हजार को ही काम मिल सका है। वहीं, मजदूरी न मिलने से तमाम मजदूर प्रधानों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में मजदूरों को मनरेगा से ज्यादा शहर में मजदूरी करना रास आ रहा है।
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कांग्रेस सरकार में शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम (मनरेगा) के तहत जिले में तमाम मजदूरों को पंजीकृत कर जॉब कार्ड बनवाए गए। हर परिवार को 100 दिन का काम देने का वादा करते हुए न्यूनतम मजदूरी दर तय की गई। भाजपा सरकार ने गांवों में होने वाले तमाम सरकारी निर्माण कार्यों में मनरेगा मजदूरों को शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही, न्यूनतम मजदूरी दर 182 रुपये प्रतिदिन तय की, लेकिन इसके बाद भी जिले मेें मनरेगा का हाल सुधर नहीं सका।
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आलम यह है कि काम और मजदूरी नहीं मिलने से मनरेगा मजदूर पलायन को मजबूर हैं। जिले में कुल 356260 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन अब तक महज 83703 मजदूरों को काम मिल सका है। वहीं तमाम मजदूर काम नहीं मिलने से शहर आते हैं। शहर के बड़ा बाजार, सीपरी बाजार और सदर बाजार चौराहे पर सुबह-सुबह काम की तलाश मेें सैकड़ों मनरेगा मजदूर उमड़ते हैं। इससे साफ है कि मनरेगा से मजदूरों का मोहभंग होता जा रहा है।
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शहर में मिलती है अधिक मजदूरी
मनरेगा से मजदूरों का मोहभंग होने के पीछे मजदूरी बड़ा कारण है। शहर में मजदूर को 350 रुपये रोज के हिसाब से मजदूरी मिलती है। साथ ही, मजदूरी का भुगतान शाम को हो जाता है। जबकि मनरेगा में मजदूरी महज 182 रुपये है और काम खत्म होने के बाद भुगतान मिलने से 15 दिन का वक्त लग जाता है।
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2500 परिवारों को मिला सौ दिन काम
जिले में मनरेगा के तहत अब तक महज 2555 मजदूरों को सौ दिन काम मिल सका है। जबकि तमाम परिवार काम पाने के लिए भटक रहे हैं।
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ये है हाल
ब्लॉक पंजीकृत मजदूर काम मिला
बबीना 34503 5227
बड़ागांव 23930 4083
बामौर 52959 13625
बंगरा 55417 12829
चिरगांव 42605 11410
गुरसराय 54659 16991
मऊरानीपुर 56876 11317
मोंठ 35311 8221
कुल 356260 83703
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वर्जन
जिले में मनरेगा मजदूरों को काम दिया जा रहा है। मजदूरी कम होने से मजदूर काम की मांग कम करते हैं। ग्राम पंचायतों में तमाम कार्य मनरेगा मजदूरों से कराए जाते हैं। साथ ही मजदूरी भी जल्द से जल्द भेजी जाती है।
लोकनंद झा, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, मनरेगा
(फोटो हैं)
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कहते हैं श्रमिक
मनरेगा में काम करने के बाद मजदूरी मिलती नहीं है। एक साल से मजदूरी को भटक रहे हैं। इसके साथ ही शहर में काम करने पर शाम को तुरंत मजदूरी मिल जाती है। इसलिए मनरेगा में काम करना छोड़ दिया है।
सूरजराम, गांव परसुवा
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कई बार मजदूरी के लिए अधिकारियों और प्रधानों के चक्कर लगा चुके, लेकिन मजदूरी नहीं मिली। भटकने को मजबूर होना पड़ता है। इसलिए शहर आकर काम करते हैं। ताकि मजदूरी समय पर मिले।

गुरुचरण, गुरसराय
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इन श्रमिकों को नहीं मिली मजदूरी
बामौर ब्लॉक के गांव परसुवा निवासी मनरेगा मजदूर सूरजराम पुत्र बारे लाल, कपूरे पुत्र मुन्ना, प्रमोद पुत्र संतराम, दृगपाल पुत्र तिजई, बृजपाल पुत्र उम्मेद, रामप्रसाद पुत्र पुनू, भज्जू पुत्र तिजई, महेश पुत्र परमानंद को मजदूरी नहीं मिली है। कई बार तहसील में प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे में श्रमिक पलायन को मजबूर हैं।
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