{"_id":"5c8d5a7ebdec2214560116c8","slug":"light-pool-wire-come-to-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"आल्हा घाट का हाल, बल्लियों पर झूल रहे तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आल्हा घाट का हाल, बल्लियों पर झूल रहे तार
Sun, 17 Mar 2019 01:50 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
jhansi
Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sun, 17 Mar 2019 01:50 AM IST
विज्ञापन
alha ghat colony
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहूज नदी आल्हा घाट मंदिर के पास विकसित नई बस्ती के लोग स्थायी बिजली कनेक्शन पाने के लिए सालों से भटक रहे हैं। बस्ती के बीच से नगर निगम की सड़क निकली है। बावजूद बिजली विभाग बस्ती को गेट बंद कॉलोनी बता रहा है। इस कारण लोग अस्थायी कनेक्शन लेकर बिजली जला रहे हैं। बस्ती में बल्लियों पर केबल झूल रही हैं। इससे हर वक्त हादसे का डर बना रहता है। वहीं, विभाग ने सदर विधायक के कहने पर एस्टीमेट भी तैयार किया, लेकिन बाद में वह बजट देने से पीछे हट गए। यहां के लोगों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
शिवपुरी मार्ग पर पहूज नदी के पास आल्हा घाट मंदिर स्थित है। लहरगिर्द क्षेत्र में आने वाले इस मंदिर के पास नई बस्ती विकसित हो गई है। पिछले सात साल में विकसित इस बस्ती में वर्तमान में 60 से अधिक परिवार रह रहे हैं। कुछ मकान निर्माणाधीन हैं। इन परिवारों में अधिकांश रेल कर्मचारी हैं। इसमें भी 20 रेल चालक हैं। बस्ती के बीच से नगर निगम की सड़क निकली है जो एक तरफ पहूज नहर की मुख्य सड़क और दूसरी तरफ रक्सा दतिया हाइवे को जोड़ती है। बिजली विभाग इस इलाके को गेट बंद कॉलोनी बताकर स्थायी कनेक्शन नहीं दे रहा है। हालांकि, विभाग ने सबको अस्थायी कनेक्शन जरूर दे रखे हैं। जिसका भारी भरकम बिल उनको हर तीन महीने में भरना पड़ रहा है। लोगों ने बल्लियों के सहारे केबल अपने घरों तक डाल रखी हैं। यहां के लोगों ने अगस्त 2018 में बस्ती का विद्युतीकरण कराने के लिए सदर विधायक से निधि देने का आग्रह किया था। विधायक के कहने पर विभाग ने 11.81 लाख का एस्टीमेट तैयार कर दिया। मगर, विधायक ने कहा कि वह निधि से इतना बजट नहीं दे सकते। एक-दो लाख की बात होती तो चल जाता। इस उम्मीद पर भी पानी फिरने के बाद अब यहां के लोग बिजली अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है।
आल्हा घाट क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए लोगों ने उनको प्रार्थना पत्र दिया है। वह सर्वे कराके एस्टीमेट बनवाएंगे। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - आरएन सिंह, मुख्य अभियंता (वितरण)।
विज्ञापन
मैंने अपने अन्य साथियों के साथ जब प्लाट लिया था, तब बेचने वाले ने कहा था कि बस्ती का विद्युतीकरण कराने के लिए विभाग में पांच लाख रुपये जमा कर रखे हैं। घर बनाने के बाद धोखे का पता लगा। मैं दो साल से स्थायी कनेक्शन पाने के लिए भटक रहा हूं। - एके वर्मा, रेल चालक।
पहूज नहर के दूसरी तरफ भी इसी तरह की बस्ती बसी है। बिजली विभाग ने वहां का विद्युतीकरण कर दिया है। बस्ती में बिजली न होने के कारण शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। रात में निकलने तक में डर लगता है। अंधेरे में गिरकर कई लोग चुटहिल हो चुके हैं। - बीपी शर्मा, रिटायर्ड रेल कर्मचारी।
अस्थायी कनेक्शन में बिजली जलाना बहुत मंहगा पड़ता है। इससे एसी का प्रयोग नहीं कर पाता। इससे नींद तक पूरी नहीं हो पाती। स्वस्थ मन से नौकरी नहीं हर पा रहा हूं। बिजली विभाग ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर जबरन उनकी बस्ती के लोगों को परेशान कर रहा है। - किशोर साहू, रेल चालक।
हम बस्ती के लोग अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक गए हैं। मगर, कोई समस्या का निदान ही नहीं बताता। विधायक भी निधि से पैसा देने में पीछे हट गए। मजबूरन हम सभी लोगों ने चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
आरआर याद, लोको इंस्पेक्टर।
विज्ञापन
शिवपुरी मार्ग पर पहूज नदी के पास आल्हा घाट मंदिर स्थित है। लहरगिर्द क्षेत्र में आने वाले इस मंदिर के पास नई बस्ती विकसित हो गई है। पिछले सात साल में विकसित इस बस्ती में वर्तमान में 60 से अधिक परिवार रह रहे हैं। कुछ मकान निर्माणाधीन हैं। इन परिवारों में अधिकांश रेल कर्मचारी हैं। इसमें भी 20 रेल चालक हैं। बस्ती के बीच से नगर निगम की सड़क निकली है जो एक तरफ पहूज नहर की मुख्य सड़क और दूसरी तरफ रक्सा दतिया हाइवे को जोड़ती है। बिजली विभाग इस इलाके को गेट बंद कॉलोनी बताकर स्थायी कनेक्शन नहीं दे रहा है। हालांकि, विभाग ने सबको अस्थायी कनेक्शन जरूर दे रखे हैं। जिसका भारी भरकम बिल उनको हर तीन महीने में भरना पड़ रहा है। लोगों ने बल्लियों के सहारे केबल अपने घरों तक डाल रखी हैं। यहां के लोगों ने अगस्त 2018 में बस्ती का विद्युतीकरण कराने के लिए सदर विधायक से निधि देने का आग्रह किया था। विधायक के कहने पर विभाग ने 11.81 लाख का एस्टीमेट तैयार कर दिया। मगर, विधायक ने कहा कि वह निधि से इतना बजट नहीं दे सकते। एक-दो लाख की बात होती तो चल जाता। इस उम्मीद पर भी पानी फिरने के बाद अब यहां के लोग बिजली अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
आल्हा घाट क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए लोगों ने उनको प्रार्थना पत्र दिया है। वह सर्वे कराके एस्टीमेट बनवाएंगे। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - आरएन सिंह, मुख्य अभियंता (वितरण)।
विज्ञापन
मैंने अपने अन्य साथियों के साथ जब प्लाट लिया था, तब बेचने वाले ने कहा था कि बस्ती का विद्युतीकरण कराने के लिए विभाग में पांच लाख रुपये जमा कर रखे हैं। घर बनाने के बाद धोखे का पता लगा। मैं दो साल से स्थायी कनेक्शन पाने के लिए भटक रहा हूं। - एके वर्मा, रेल चालक।
पहूज नहर के दूसरी तरफ भी इसी तरह की बस्ती बसी है। बिजली विभाग ने वहां का विद्युतीकरण कर दिया है। बस्ती में बिजली न होने के कारण शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। रात में निकलने तक में डर लगता है। अंधेरे में गिरकर कई लोग चुटहिल हो चुके हैं। - बीपी शर्मा, रिटायर्ड रेल कर्मचारी।
अस्थायी कनेक्शन में बिजली जलाना बहुत मंहगा पड़ता है। इससे एसी का प्रयोग नहीं कर पाता। इससे नींद तक पूरी नहीं हो पाती। स्वस्थ मन से नौकरी नहीं हर पा रहा हूं। बिजली विभाग ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर जबरन उनकी बस्ती के लोगों को परेशान कर रहा है। - किशोर साहू, रेल चालक।
हम बस्ती के लोग अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक गए हैं। मगर, कोई समस्या का निदान ही नहीं बताता। विधायक भी निधि से पैसा देने में पीछे हट गए। मजबूरन हम सभी लोगों ने चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
आरआर याद, लोको इंस्पेक्टर।