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लक्ष्मीताल: पहाड़ियां काटकर बना लिए मकान, जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान

Fri, 16 Jul 2021 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jul 2021 01:03 AM IST
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Laxmital: The houses were built by cutting the hills, the responsibilities did not pay attention
झांसी। महानगर की बड़ी धरोहर लक्ष्मीताल का अस्तित्व अतिक्रमण की जद में सिमटकर रह गया है। आलम यह है कि ताल के आसपास बनीं पांच पहाड़ियाें को काटकर मकान बना लिए गए। इसके चलते तालाब का क्षेत्रफल कम होता चला गया। अफसरों ने लक्ष्मीताल के अतिक्रमण को ध्वस्त करने के लिए कभी कोई प्रयास नहीं किए। इसके विपरीत सौंदर्यीकरण के नाम पर इसे छोटा किया जाता रहा। अब ताल पर हुए अतिक्रमण को लेकर एनजीटी की सख्ती के बाद अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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महानगर के लक्ष्मीताल का विशेष महत्व रहा। एक समय में यह तालाब महानगर में पेयजल का प्रमुख स्रोत माना जाता था। 83 एकड़ में फैले इस ताल का मौजूदा स्वरूप महज 59 एकड़ में सिमटकर रह गया। 24 एकड़ का भाग कब्जों का शिकार हो गया। कहीं मकान बना लिए गए, तो कहीं अन्य निर्माण कर लिया गया। पुराने समय में तालाब के आसपास पांच पहाड़ियां बनी हुई थीं। इन पहाड़ियों पर प्रतीक स्वरूप मढ़िया (मंदिर) बने हुए थे। इस मंदिरों की ऊंचाई से तालाब का नजारा बेहद सुंदर लगता था। मगर अब न तो पहाड़ियां बची हैं और न ही कोई सुंदरता है। तालाब से सटी पांचों पहाड़ियों को काटकर निर्माण कर लिए गए हैं। मौजूदा समय में भी निर्माण के नाम पर पहाड़ियों का कटान होता रहता है। महानगर की धरोहरों को अतिक्रमण मुक्त कराने का दावा करने वाले प्रशासन ने लक्ष्मीताल के खोये स्वरूप को लौटाने की कभी जहमत ही नहीं उठाई।
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सड़क बनाकर तय कर दिया दायरा
लक्ष्मीताल की जमीन पर अतिक्रमण के पीछे सौंदर्यीकरण भी बड़ी वजह रहा है। सौंदर्यीकरण के नाम पर ताल में चारोें ओर गोलाई में एक सड़क बना दी गई है। इस सड़क के अंदर के हिस्से को तालाब माना जाता है, जबकि पहले इसके बाद का काफी हिस्सा भी ताल में शामिल रहा है।
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ठीक से हुई जांच, तो ताल को मिलेगा नया जीवन
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने लक्ष्मीताल पर हुए अतिक्रमण को लेकर प्रदेश सरकार से दो महीने में रिपोर्ट मांगी है। मंडलायुक्त ने इसकी जांच के लिए टीम का गठन किया है। अगर अब ठीक से जांच हुई, तो ताल को नया जीवन मिलने की उम्मीद है। बताया जाता है कि जांच पहले भी हुईं हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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