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गंदगी साफ कर लक्ष्मी तालाब में जाएगा 5 लाख लीटर पानी
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झांसी। महानगर की नालियों के माध्यम से आने वाले गंदे पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से साफ कर लक्ष्मी तालाब में भरा जाएगा। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल रन शुरू हो गया है। जल्द ही प्लांट अपनी रफ्तार पकड़ लेगा। शुरूआत में गंदगी साफ करके पांच एमएलडी (50 लाख लीटर) पानी लक्ष्मी तालाब में ही भरा जाएगा। इससे तालाब भरा रहेगा।
महानगर वर्ष 1967 में 45 एमएलडी पानी की खपत थी। इसमें भी पचास प्रतिशत पानी सेना के लिए उपयोग किया जाता था। लेकिन, धीरे- धीरे शहर का विकास हुआ तो पानी की जरूरत बढ़ गई और वर्तमान में पानी की आवश्यकता 78.51 एमएलडी की है। जबकि उपलब्धता 65.47 एमएलडी पानी है। पुराने शहर क्षेत्र का नालियों का गंदा पानी ऐतिहासिक लक्ष्मी तालाब में जाता है। इसकी वजह यह है कि तालाब की ओर ही शहर का ढाल है। इस कारण तालाब का पानी गंदा हो गया था।
इसे देखते हुए तालाब के पानी को साफ करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया, ताकि नालियों के गंदे पानी का साफ किया जा सके और पानी को उपयोगी बनाया जा सके। लक्ष्मी तालाब जब ओवरफ्लो हो जाता था तो पानी नारायण बाग से होते हुए गढ़मऊ, मुस्तरा और चिरगांव के किनारे नाले से बहता हुआ बेतवा नदी में पहुंचता था। लेकिन, अब स्थितियां बदल गई हैं। पानी अब गढ़मऊ के आगे नहीं जाता है। गंदे पानी की वजह से तालाब के आसपास रहने वालों को बदबू के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। आसपास के भूमिगत जलस्तर में खारा पन बढ़ रहा था। इसलिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया, ताकि पानी को फिल्टर करके शुद्ध किया जा सके। एसटीपी प्लांट अगले 15 साल (वर्ष 2035 तक) के लिए तैयार किया गया है, ताकि पानी की खपत बढ़ने के बाद भी नालियों में आने वाले पानी का फिल्टर किया जा सके। एसटीएम प्रतिदिन अधिकतम 26 एमएसडी पानी को शुद्ध करेगा, लेकिन वर्तमान में इससे पाच एमएलडी पानी शुद्ध किया जाएगा। इस पानी को लक्ष्मी तालाब में भरा जाएगा, ताकि पानी बरबाद नहीं होगा और तालाब भरा रहने से आसपास का भूजल स्तर भी रीचार्ज होगा और पानी की गंदगी साफ हो जाने से बदबू नहीं आएगी। बता दें कि एक एमएलडी में दस लाख लीटर पानी होता है।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल रन शुरू हो गया है। जल्द ही प्लांट अपनी रफ्तार पकड़ लेगा। इसके बाद तालाब को भरा जाएगा।
- आरके गुप्ता
सहायक अभियंता, जलनिगम
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महानगर वर्ष 1967 में 45 एमएलडी पानी की खपत थी। इसमें भी पचास प्रतिशत पानी सेना के लिए उपयोग किया जाता था। लेकिन, धीरे- धीरे शहर का विकास हुआ तो पानी की जरूरत बढ़ गई और वर्तमान में पानी की आवश्यकता 78.51 एमएलडी की है। जबकि उपलब्धता 65.47 एमएलडी पानी है। पुराने शहर क्षेत्र का नालियों का गंदा पानी ऐतिहासिक लक्ष्मी तालाब में जाता है। इसकी वजह यह है कि तालाब की ओर ही शहर का ढाल है। इस कारण तालाब का पानी गंदा हो गया था।
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इसे देखते हुए तालाब के पानी को साफ करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया, ताकि नालियों के गंदे पानी का साफ किया जा सके और पानी को उपयोगी बनाया जा सके। लक्ष्मी तालाब जब ओवरफ्लो हो जाता था तो पानी नारायण बाग से होते हुए गढ़मऊ, मुस्तरा और चिरगांव के किनारे नाले से बहता हुआ बेतवा नदी में पहुंचता था। लेकिन, अब स्थितियां बदल गई हैं। पानी अब गढ़मऊ के आगे नहीं जाता है। गंदे पानी की वजह से तालाब के आसपास रहने वालों को बदबू के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। आसपास के भूमिगत जलस्तर में खारा पन बढ़ रहा था। इसलिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया, ताकि पानी को फिल्टर करके शुद्ध किया जा सके। एसटीपी प्लांट अगले 15 साल (वर्ष 2035 तक) के लिए तैयार किया गया है, ताकि पानी की खपत बढ़ने के बाद भी नालियों में आने वाले पानी का फिल्टर किया जा सके। एसटीएम प्रतिदिन अधिकतम 26 एमएसडी पानी को शुद्ध करेगा, लेकिन वर्तमान में इससे पाच एमएलडी पानी शुद्ध किया जाएगा। इस पानी को लक्ष्मी तालाब में भरा जाएगा, ताकि पानी बरबाद नहीं होगा और तालाब भरा रहने से आसपास का भूजल स्तर भी रीचार्ज होगा और पानी की गंदगी साफ हो जाने से बदबू नहीं आएगी। बता दें कि एक एमएलडी में दस लाख लीटर पानी होता है।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल रन शुरू हो गया है। जल्द ही प्लांट अपनी रफ्तार पकड़ लेगा। इसके बाद तालाब को भरा जाएगा।
- आरके गुप्ता
सहायक अभियंता, जलनिगम