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बजट की कमी से लक्ष्मी ताल हाल-बेहाल

Mon, 27 Mar 2017 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 27 Mar 2017 01:01 AM IST
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 Laxmi rhythm due to lack of budget
pond, jhansi news - फोटो : demo
शहर के पांच नालों का गंदा पानी लक्ष्मी ताल के अस्तित्व पर रोजाना खतरा बढ़ा रहा है। इसके पर्यटन विकास की गति बेहद धीमी है। ढाई साल पहले योजना को मंजूरी मिलने के बाद भी अब तक सिर्फ बीस फीसदी काम ही हो पाया है। इसका कारण बजट की कमी है। 
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लक्ष्मी ताल को बचाने के लिए इसमें गंदे पानी के प्रवाह को रोका जाना जरूरी है। इसके लिए चार साल पहले योजना बनाई गई थी। इसके तहत लक्ष्मी ताल के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की जानी थी, जिसमें नालों का गंदा पानी डायवर्ट कर ले जाना था। 53 करोड़ रुपये की इस योजना को सात नवंबर 2014 को स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन बजट आवंटित नहीं किया गया था। बजट की पहली किस्त 2016 में जारी की गई।
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जबकि, दूसरी किस्त अभी हाल ही में मिली है। दो किस्तों में महज पांच करोड़ रुपये ही आवंटित हुए हैं। ऐसे में ताल के पर्यटन विकास की योजना धीमी गति से आगे बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि लक्ष्मी ताल का पर्यटन विकास केंद्र और प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से करना है। साठ फीसदी राशि केंद्र और चालीस फीसदी प्रदेश को उपलब्ध करानी है। 
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ये काम होने हैं 
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वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 
ताल में गिरने वाले शहर के गंदे पानी को सीधे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाया जाएगा। प्लांट में प्रतिदिन 26 एमएलडी पानी शुद्ध किया जाएगा। इसमें से 22 एमएलडी पानी 10 बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन) तक शुद्ध किया जाएगा। इस पानी को नारायण बाग से गुजरने वाले नाले के माध्यम से पहूज नदी में छोड़ा जाएगा। जबकि, शेष चार एमएलडी पानी का और भी अधिक शुद्धीकरण चार बीओडी (नहाने योग्य ) तक किया जाएगा, यह पानी लक्ष्मीताल में छोड़ा जाएगा।
 
मेडिटेशन सेंटर और पार्क 
लक्ष्मी ताल के पर्यटन विकास की योजना के तहत इसके पास मेडिटेशन सेंटर, पार्क व शौचालय बनाए जाने हैं। इसके अलावा ताल के चारों ओर ओर बाउंड्रीवॉल का निर्माण होगा, जिससे छुट्टा जानवर प्रवेश न कर सकें। पाथ वे बनाया जाएगा और लाइटिंग की जाएगी। ताल के भीतर फव्वारा लगेगा और वोटिंग की व्यवस्था होगी। जल कुंभी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।


तय अवधि में काम मुश्किल 
लक्ष्मी ताल का पर्यटन विकास और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण का काम 2018 में पूरा किया जाना था, लेकिन बजट के अभाव में तय अवधि में काम पूरा होने की संभावनाएं कम हैं। हालांकि, ट्रीटमेंट प्लांट का काम तेजी से जारी है। इसके बाद नालों को डायवर्ट किया जाएगा। जलकुंभी साफ की जाएगी। 
- राजेश मित्तल, मुख्य अभियंता - जल निगम 

 
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