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मजदूर जरूर लौटे पर गांव नहीं शहर में टूटा कोरोना का कहर

Sat, 12 Sep 2020 01:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2020 01:45 AM IST
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labour village
खैलार में कोरोना के खोफ से दूर सामान्य जीवन जी रहे ग्रामीण।
झांसी। कोरोना वायरस का कहर सबसे ज्यादा शहर के लोगों पर टूटा है, जबकि लॉकडाउन होने के कारण देशभर से मजदूर गांवों में लौटे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग 90 फीसदी संक्रमित शहरी इलाकों के हैं। जबकि, 85 प्रतिशत मौतें शहर के रहने वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों की हुई है।
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सितंबर की शुरूआत होते ही जिले में कोरोना वायरस की रफ्तार ने एक बार फिर जोर पकड़ ली है। इसके पीछे का कारण बफर जोन समाप्त होने के बाद बाजारों का खुल जाना भी बताया जा रहा है। बाजार खुलने से शहर में भीड़भाड़ बढ़ी है। इससे संक्रमण की गति भी तेज हो गई है। पिछले दस दिनों की ही बात करें तो लगभग 900 मामले सामने आ चुके हैं। यानी हर दिन औसतन 90 केस मिले हैं। वहीं, अब तक के कोरोना संक्रमितों के आंकड़े देखें तो लगभग 90 प्रतिशत केस शहरी इलाके से सामने आए हैं। इसी तरह, लगभग 85 फीसदी मौतें शहर में रहने वाले कोरोना पॉजिटिव की हुई हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भले ही ग्रामीण इलाकों में देशभर से लौटकर ग्रामीण आए हो लेकिन वायरस का कहर शहर में रहने वाले लोगों पर ही टूटा है।
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घूंघट प्रथा से लेकर जनसंख्या घनत्व तक कारण
शहर की तुलना में ग्रामीण इलाकों में कोरोना का ज्यादा असर न होने का मुख्य कारण घूंघट प्रथा भी है। दरअसल, महिलाओं के लिए घूंघट ही मास्क का काम करता है। वहीं, गांव के पुरुषों के लिए गमछा कोरोना से लड़ाई बड़ा हथियार बना है। गर्मी में ग्रामीणों ने गमछा से चेहरा ढके रहे। इसके अलावा शहर की तुलना में ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या घनत्व भी कम है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग भी बनी रहती है। एक मुख्य वजह शहरियों की तुलना में ग्रामीणों की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होना है।
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शहर में लोग कोरोना के लक्षण होने के बावजूद जांच कराना पसंद नहीं कर रहे हैं। घरों में रहकर दवाएं खा रहे हैं। यह स्थिति ठीक नहीं है, क्योंकि वह संक्रमण का वाहक बनने का काम कर रहे हैं। दूसरे लोगों को रिस्क में डाल रहे हैं। वहीं, कई लोग बीमारी छुपाने के कारण देर से मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो रहे हैं। तब तक वायरस उनके फेफड़ों तक पहुंच जाता है, इससे जान पर बन जाती है। - डॉ. पारस गुप्ता, सहायक नोडल अधिकारी, कोरोना।

लॉकडाउन जरूर खत्म हो गया है लेकिन कोरोना नहीं। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर मास्क लगाने तक का प्रोटोकॉल का शत-प्रतिशत पालन करना होगा। वरना वह खुद भी जोखिम में रहेंगे और कोरोना की चेन भी नहीं टूटेगी। वहीं, लोगों को जांच कराने के लिए भी आगे आना होगा। बिना लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन तक की सुविधा मिली हुई है। इसलिए डरें नहीं, जागरूक रहें। - डॉ. अमित सहगल, वरिष्ठ चिकित्सक।
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