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बंधक सात बालकों समेत 18 श्रमिक मुक्त
ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2015 01:39 AM IST
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झांसी। पंचायत चुनाव मतदान के बाद देहात से लौटते एसएसपी ने मऊरानीपुर के रूपा धमना रोड पर दो ट्रकों में बंधक सात बालकों समेत 18 श्रमिकों को मुक्त करा दिया। ट्रक समेत बंधक बनाकर मजदूरी करवाने ले जाते तमिलनाडु के दो आरोपियों को भी दबोच लिया। कड़ाई से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि दोनों उसी गिरोह के सदस्य हैं, जिनके कब्जे से तीन दिन पहले नौ बच्चे मुक्त कराए गए थे।
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे शनिवार की शाम मऊरानीपुर से पंचायत चुनाव मतदान के बाद लौट रहे थे। रूपा धमना के पास ट्रक नंबर टीएन28एके- 1877 में बोरिंग मशीन और टीएन28डीके- 2691 में सात बालकों समेत 18 श्रमिक सवार दिखे। एसएसपी ने गड़बड़ी की आशंका पर दोनों ट्रकों को रुकवाया। चेकिंग करने पर जब उन्होंने बच्चों को लेकर जा रहे दो लोगों से कड़ाई से पूछताछ की तो पता चला कि वे भी तमिलनाडु के हैं। पिछले दिनों पकड़े गए गिरोह के सदस्य हैं।
गिरफ्तार पशुपदी पुत्र सिनत तम्बी निवासी नामकली तमिलनाडु और कुमार पुत्र मरूदई निवासी तिरची तमिलनाडु ने बताया कि उन्हें बंधक बच्चों पर नजर रखने की तनख्वाह मिलती हैँ। यदि कोई कामचोरी करता है, तो उसके साथ मारपीट की जाती है। उनका मुखिया तमिलनाडु का संपति नामक व्यक्ति है। उसी ने बच्चे मजदूरी करवाने के लिए भेजे हैं। उसके पास बच्चे कैसे पहुंचे, यह उन्हें नहीं पता है। उनका काम सिर्फ मारपीट करके काम करवाना है।
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डेढ़ दर्जन मुक्त कराए श्रमिक छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र के हैं, जिनमें बालक चैनसिंह पुत्र रामसहाय निवासी गांव भटगांव छत्तीसगढ़, जीवन पुत्र इन्नू निवासी चिरौली महाराष्ट्र, रुकदूराम पुत्र देवूराम, अजीत कुमार पुत्र सिंह राम निवासीगण उपरपाल भटगांव छत्तीसगढ़, अशोक कुमार पुत्र श्याम निवासी भरीटोला मानपुर छत्तीसगढ़, हीरे सिंह पुत्र विदेशी निवासी मानपुर छत्तीसगढ़, रोमन कुमार पुत्र मिखाइल निवासी सिदेपुर छिनौरा चिरौली महाराष्ट्र हैं।
उल्लेखनीय है कि 15 अक्तूबर को टहरौली के लौड़ी गांव से नौ बंधक बाल श्रमिकों को पुलिस ने मुक्त कराया था। उन्हें सोनभद्र के गांव चौपन का देवनारायण काम दिलाने के बहाने घर से लेकर आया था। वह उन्हें लेकर तमिलनाडु पहुंचा, जहां सभी किशोरों को श्रीशक्ति नामक व्यक्ति के हाथों बेच दिया। वहां उनसे जबरदस्ती करीब 20 बोरिंग करवाए गए। अधिक काम से मना करने पर मुत्थू नामक व्यक्ति ने किशोरों को बेरहमी से पीटा। पिछले दिनों मऊरानीपुर निवासी महेश कुमार गुप्ता ने श्रीशक्ति से सभी किशोरों को खरीद लिया था। करीब 10 दिन पहले मुत्थू किशारों को लेकर टहरौली आ गया और उनसे बोरिंग करवाए ।
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एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे शनिवार की शाम मऊरानीपुर से पंचायत चुनाव मतदान के बाद लौट रहे थे। रूपा धमना के पास ट्रक नंबर टीएन28एके- 1877 में बोरिंग मशीन और टीएन28डीके- 2691 में सात बालकों समेत 18 श्रमिक सवार दिखे। एसएसपी ने गड़बड़ी की आशंका पर दोनों ट्रकों को रुकवाया। चेकिंग करने पर जब उन्होंने बच्चों को लेकर जा रहे दो लोगों से कड़ाई से पूछताछ की तो पता चला कि वे भी तमिलनाडु के हैं। पिछले दिनों पकड़े गए गिरोह के सदस्य हैं।
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गिरफ्तार पशुपदी पुत्र सिनत तम्बी निवासी नामकली तमिलनाडु और कुमार पुत्र मरूदई निवासी तिरची तमिलनाडु ने बताया कि उन्हें बंधक बच्चों पर नजर रखने की तनख्वाह मिलती हैँ। यदि कोई कामचोरी करता है, तो उसके साथ मारपीट की जाती है। उनका मुखिया तमिलनाडु का संपति नामक व्यक्ति है। उसी ने बच्चे मजदूरी करवाने के लिए भेजे हैं। उसके पास बच्चे कैसे पहुंचे, यह उन्हें नहीं पता है। उनका काम सिर्फ मारपीट करके काम करवाना है।
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डेढ़ दर्जन मुक्त कराए श्रमिक छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र के हैं, जिनमें बालक चैनसिंह पुत्र रामसहाय निवासी गांव भटगांव छत्तीसगढ़, जीवन पुत्र इन्नू निवासी चिरौली महाराष्ट्र, रुकदूराम पुत्र देवूराम, अजीत कुमार पुत्र सिंह राम निवासीगण उपरपाल भटगांव छत्तीसगढ़, अशोक कुमार पुत्र श्याम निवासी भरीटोला मानपुर छत्तीसगढ़, हीरे सिंह पुत्र विदेशी निवासी मानपुर छत्तीसगढ़, रोमन कुमार पुत्र मिखाइल निवासी सिदेपुर छिनौरा चिरौली महाराष्ट्र हैं।
उल्लेखनीय है कि 15 अक्तूबर को टहरौली के लौड़ी गांव से नौ बंधक बाल श्रमिकों को पुलिस ने मुक्त कराया था। उन्हें सोनभद्र के गांव चौपन का देवनारायण काम दिलाने के बहाने घर से लेकर आया था। वह उन्हें लेकर तमिलनाडु पहुंचा, जहां सभी किशोरों को श्रीशक्ति नामक व्यक्ति के हाथों बेच दिया। वहां उनसे जबरदस्ती करीब 20 बोरिंग करवाए गए। अधिक काम से मना करने पर मुत्थू नामक व्यक्ति ने किशोरों को बेरहमी से पीटा। पिछले दिनों मऊरानीपुर निवासी महेश कुमार गुप्ता ने श्रीशक्ति से सभी किशोरों को खरीद लिया था। करीब 10 दिन पहले मुत्थू किशारों को लेकर टहरौली आ गया और उनसे बोरिंग करवाए ।