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कृतिका और हुकुमेंद्र की हत्या के बाद खुद को भी खत्म करना चाहता था मंथन

Sat, 20 Feb 2021 01:10 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 01:10 AM IST
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Kritika and hukumendra shoot from gun after that his want sucide from pistol
झांसी। कृतिका और हुकुमेंद्र की हत्या के बाद मंथन खुद को भी गोली मारकर खत्म करना चाहता था। क्लासरूम में वो इसका पूरा प्लान तैयार कर दाखिल हुआ था। यही वजह थी कि घटना से पहले उसने ब्लैक बोर्ड पर ‘मंथन फिनिश’ भी लिखा था। लेकिन, वो अपने मंसूबों में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया। खुद को मारने के लिए उसने पिस्टल लोड करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसे पकड़ लिया था।
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छात्र मंथन सेंगर ने घटना को अंजाम देने का सुनियोजित प्लान तैयार किया था। क्लासरूम में वो कम ही आया करता था। हाल ही में वो क्लासरूम में बुधवार को नजर आया था और उसके बाद शुक्रवार को पहुंचा। कक्षा में महज छह ही विद्यार्थी थे। आगे की पंक्ति में बैठने की पर्याप्त जगह थी। बावजूद, हुकुमेंद्र के पीछे दूसरी पंक्ति में बैठ गया। पीरियड पूरा होने के बाद शिक्षिका क्लासरूम से निकल र्गइं। इसके बाद उसने चॉक से क्लास के ब्लैक बोर्ड पर ‘मंथन फिनिश’ लिखा और फिर से पीछे आकर बैठ गया। लेकिन, वहां मौजूद किसी ने भी ब्लैक बोर्ड पर मंथन द्वारा लिखे गए शब्दों पर ध्यान नहीं दिया। हुकुमेंद्र के पीछे बैठते ही उसने जैकेट के भीतर छुपाई पिस्टल निकाली और फायर झोंक दिया। हुकुमेंद्र कक्षा की टेबल पर धराशायी हो गया। अचानक हुई घटना से वहां मौजूद सभी लोग अवाक रह गए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, मंथन पिस्टल हाथ में लेकर कॉलेज कैंपस से बाहर निकल गया। छात्रा कृतिका के घर पहुंचने के लिए उसने शॉर्टकट अपनाया। विकास भवन के पीछे की गली से निकलकर जार पहाड़ होते हुए वो चाणक्यपुरम पहुंच गया। यहां उसने घर के बाहर दादी के साथ बैठी कृतिका के गले में सटाकर गोली मार दी और गली में आगे की ओर भाग गया। आगे का रास्ता उसे समझ नहीं आया तो फिर वो वापस लौटा। इसी दरम्यान कृतिका के पिता सुजीत ने उसे पकड़ लिया। इस दरम्यान मंथन ने खुद को गोली मारने की नीयत से एक बार फिर पिस्टल लोड करने की कोशिश की, उसके पास दो कारतूस थे। लेकिन, इस बार पड़ोसी रिटायर्ड ऑडिटर शिवनारायण मिश्रा ने उसका हाथ पकड़ लिया, जिससे वो खुद को मारने के अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया।
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अनुशासनिक कैडेट अनुशासनहीनता पर था उतारू
झांसी। आरोपी मंथन सेंगर की गिनती एनसीसी के अनुशासित कैडेटों में थीं। लेकिन, घटना वाले दिन वो अनुशासनहीनता पर उतारू था। वो फ्रूटी पीता हुआ क्लासरूम में दाखिल हुआ और अंदर क्लास चलने के दौरान सन ग्लासेस पहनकर बैठा रहा। अक्सर वो शिक्षिका के पैर छुआ करता था, लेकिन शुक्रवार को उसने ऐसा कुछ नहीं किया। उसके इस बदले हुए हावभाव को साथी छात्रों ने नोटिस भी किया। लेकिन, बाद में नजरअंदाज कर गए। उन्होंने नहीं मालूम था कि मंथन इतना बड़ा कदम उठाने वाला है।
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बोला मैं पागल हो रहा हूं, काउंसलिंग चाहिए
झांसी। घटना वाले दिन में कक्षा में मंथन सेंगर ने शिक्षिका से कहा मैं पागल हो रहा हूं, मुझे काउंसलिंग चाहिए। शिक्षिका ने कहा कि पीरियड के बाद तुम मुझसे मिलना। इस दरम्यान शिक्षिका ने अहं को शांत करने के विषय पर अपना व्याख्यान भी दिया, जिसे मंथन ने सुना भी, लेकिन उस पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

मनोविज्ञान की कक्षा में कोई नहीं समझ सका मनोदशा
झांसी। आरोपी मंथन और घायल छात्र हुकुमेंद्र सिंह एमए मनोविज्ञान द्वितीय वर्ष के छात्र है। कक्षा में मनोविज्ञान की शिक्षिका व अन्य छात्र भी मौजूद थे। कक्षा में मंथन के हावभाव एकदम बदले हुए थे। बावजूद, वहां कोई भी उसकी मनोदशा नहीं समझ सका।
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