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टीबी की स्टेज जानकर होगा मरीजों का सटीक इलाज
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झांसी। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के मरीजों को अब झांसी में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा, क्योंकि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में टीबी एंड सीडीएसटी लैब खुलने जा रही है। तीन महीने में लैब की स्थापना का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद टीबी के मरीजों की स्टेज जानकर उसी आधार पर इलाज किया जा सकेगा। यदि दवा बदलने की जरूरत पड़ेगी तो जांच में पता चला जाएगा। फिर समय रहते टीबी ठीक हो सकेगी।
जिला क्षय रोग केंद्र में अभी जीन एक्सपर्ट जांच की सुविधा है। जीन एक्सपर्ट मशीन से कुछ घंटे में पता चल जाता है कि मरीज को टीबी है अथवा नहीं। यदि टीबी निकल आती है तो तुरंत मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है। मगर, कई बार इलाज के दौरान मरीज को जो दवा चल रही होती है, उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। ऐसे में दवा का असर खत्म हो जाता है। इसका पता लगाने के लिए सीडीएसटी लैब की जरूरत होती है, जो अब मेडिकल कॉलेज में खुलने जा रही है। यह लैब खुलने के बाद मरीज के बलगम की जांच (कल्चर) कर पता लगाया जा सकेगा कि कहीं टीबी रोगी में दवा के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता तो विकसित नहीं हो गई। यदि ऐसा मिल जाता है तो मरीज की दवा बदल दी जाएगी। लैब खुलने के बाद एक-डेढ़ महीने में टीबी रोगियों का नियमित फॉलोअप के तौर पर जांच की जाएगी। लैब खुलने से मरीजों को इलाज में काफी मदद मिलेगी। समय रहते टीबी ठीक हो सकेगी।
अभी ये है व्यवस्था
अभी टीबी रोगियों का माहवार कल्चर (जांच) के लिए बलगम का सैंपल लेकर आगरा अथवा लखनऊ स्थित सीडीएसटी लैब में भेजा जाता है। यहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पर मरीज की दवा बदली जाती है।
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ये हैं टीबी के लक्षण
- दो हफ्ते से ज्यादा खांसी आ रही हो
- खांसी के साथ बलगम आ रहा हो
- कभी-कभार खून आना शुरू हो जाए
- भूख कम लगना
- वजन घटना
- शाम को बुखार आना
- सीने में दर्द
.
मेडिकल कॉलेज में तीन महीने में टीबी एंड सीडीएसटी लैब शुरू हो जाएगी। इससे एलपी, कल्चर एंड ड्रग सेंस्टिविटी टेस्टिंग हो सकेंगी। वहीं, ट्र नेट या सीबी नेट की जांच माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सोमवार से शनिवार सुबह नौ से शाम चार बजे तक होगी। सार्वजनिक अवकाश के दिन सैंपल नहीं लिए जाएंगे। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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जिला क्षय रोग केंद्र में अभी जीन एक्सपर्ट जांच की सुविधा है। जीन एक्सपर्ट मशीन से कुछ घंटे में पता चल जाता है कि मरीज को टीबी है अथवा नहीं। यदि टीबी निकल आती है तो तुरंत मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है। मगर, कई बार इलाज के दौरान मरीज को जो दवा चल रही होती है, उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। ऐसे में दवा का असर खत्म हो जाता है। इसका पता लगाने के लिए सीडीएसटी लैब की जरूरत होती है, जो अब मेडिकल कॉलेज में खुलने जा रही है। यह लैब खुलने के बाद मरीज के बलगम की जांच (कल्चर) कर पता लगाया जा सकेगा कि कहीं टीबी रोगी में दवा के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता तो विकसित नहीं हो गई। यदि ऐसा मिल जाता है तो मरीज की दवा बदल दी जाएगी। लैब खुलने के बाद एक-डेढ़ महीने में टीबी रोगियों का नियमित फॉलोअप के तौर पर जांच की जाएगी। लैब खुलने से मरीजों को इलाज में काफी मदद मिलेगी। समय रहते टीबी ठीक हो सकेगी।
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अभी ये है व्यवस्था
अभी टीबी रोगियों का माहवार कल्चर (जांच) के लिए बलगम का सैंपल लेकर आगरा अथवा लखनऊ स्थित सीडीएसटी लैब में भेजा जाता है। यहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पर मरीज की दवा बदली जाती है।
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ये हैं टीबी के लक्षण
- दो हफ्ते से ज्यादा खांसी आ रही हो
- खांसी के साथ बलगम आ रहा हो
- कभी-कभार खून आना शुरू हो जाए
- भूख कम लगना
- वजन घटना
- शाम को बुखार आना
- सीने में दर्द
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मेडिकल कॉलेज में तीन महीने में टीबी एंड सीडीएसटी लैब शुरू हो जाएगी। इससे एलपी, कल्चर एंड ड्रग सेंस्टिविटी टेस्टिंग हो सकेंगी। वहीं, ट्र नेट या सीबी नेट की जांच माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सोमवार से शनिवार सुबह नौ से शाम चार बजे तक होगी। सार्वजनिक अवकाश के दिन सैंपल नहीं लिए जाएंगे। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।