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केरल में चुनाव को देख केंद्र सरकार ने दिया बड़ा संदेश
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केरल में चुनाव देख केंद्र सरकार ने दिया बड़ा संदेश
झांसी। धर्मांतरण के आरोपों के बीच उत्कल एक्सप्रेस से ननों को उतारने और पूछताछ के मामले में अंचल अड़जरिया और पुरुकेश अमरया की गिरफ्तारी को अमित शाह का चुनावी ब्रह्मास्त्र माना जा रहा है। कट्टर हिंदूवादी समर्थक छवि वाले गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश पर यह सख्त कदम उठाया गया। यह, तब हुआ है जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। सूत्रों के अनुसार संघ व अन्य हिंदूवादी संगठनों के दिग्गजों ने धर्मांतरण का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय तक दबाव बनाने का प्रयास किया था। लेकिन भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने एक नहीं सुनी। मामले में केरल के मुख्यमंत्री की आपत्ति के बाद हर वर्ग और धर्म को साधने और विजयश्री हासिल करने के लिए केंद्र के इशारे पर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया। सत्ता के ठोस कदम के बाद हिंदूवादी संगठनों में अंदरखाने सुगबुगाहट तो है लेकिन कोई खुलकर विरोध नहीं कर रहा।
19 मार्च को उत्कल एक्सप्रेस से उतारी गईं नन भले ही ओडिशा के राउरकेला की रहने वाली हों लेकिन उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ केरल के मुख्यमंत्री ने आवाज बुलंद की थी। उन्होंने जनसभा के दौरान मामला उठाया और भाजपा की केंद्र और उप्र सरकार को घेरा था। यही नहीं, गृहमंत्री को पत्र लिखकर दोषियाें पर कार्रवाई की मांग की थी। मामले के सुर्खियों में आते ही घटनाक्रम ने राजनीतिक मोड़ ले लिया था। भाजपा की हिंदूवादी छवि के बावजूद गृहमंत्री ने मौके की नजाकत को समझा और धारा के विपरीत रुख अख्तियार किया। पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम में भी चुनावी बेला है। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते।
जांच में आ गई थी तेजी
गृहमंत्रालय की सख्त हिदायत के बाद जीआरपी हरकत में आई थी। एसपी जीआरपी ने लखनऊ से झांसी आकर डेरा डाला था। संबंधित पक्ष के बयान लिए थे। रेलवे ने भी जांच में तत्परता दिखाई। जांच में फंस रहे जीआरपी कर्मी बचाव की मुद्रा में आ गए और उन्होंने हवाला दिया कि अगर ननों को स्टेशन पर उतारा नहीं जाता तो उन पर हमला हो सकता था। यानी संबंधित हर पक्ष को अंदाजा हो गया था कि कार्रवाई तय है और जद में कोई भी आ सकता है।
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हां में हां मिलाने वाली जीआरपी ने ही किया गिरफ्तार
जो जीआरपी शिकायतकर्ताओं की हर बात में हां में हां मिला रही थी और बिना प्लेटफार्म टिकट व अन्य दस्तावेजों के सभी को ट्रेन तक लेकर पहुंची थी, उसी पुलिस बल ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस बात को लेकर बृहस्पतिवार की देर रात तक राजनीतिक गलियारों और हिंदूवादी संगठनों के नेताओं के फोन घनघनाते रहे। सभी इसे राजनीतिक हथकंडा बता रहे थे।
केरल में छह अप्रैल को है मतदान
केरल में छह अप्रैल को मतदान है। उससे ठीक पहले ही हिंदूवादी संगठनों के दो नेताओं की गिरफ्तारी दिखाकर भाजपा ने संदेश दिया है कि वह न्यायप्रिय पार्टी है। फिर दोषी किसी भी धर्म या पार्टी का समर्थक क्यों न हो। माना जा रहा है कि केरल में मतदान से पहले ईसाई समाज में बेहतर छवि बनाने और अधिक सीटें जीतने की गरज से यह कदम उठाया है।
हिंदूवादी संगठनों में झुंझलाहट
झांसी के तमाम हिंदूवादी संगठनों के नेताओं ने केंद्र व राज्य सरकार के रुख पर एतराज जताया है। उनका तर्क है कि इसके दूरगामी परिणाम घातक होंगे। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी को बहुसंख्यकों के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यह तक कह दिया कि इससे केरल या पश्चिम बंगाल में फायदा मिलेगा यह तो तय नहीं है लेकिन 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नुकसान होना तय है। अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सत्ता के लिए हिंदू विरोधी रुख अपनाएगा तो उसका जनाधार घटता जाएगा।
‘गृह मंत्रालय और जीआरपी ने नियमानुसार कदम उठाया है। लेकिन बिना किसी ठोस आधार के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ’
- विनोद अवस्थी, विभागाध्यक्ष हिंदू जागरण मंच
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झांसी। धर्मांतरण के आरोपों के बीच उत्कल एक्सप्रेस से ननों को उतारने और पूछताछ के मामले में अंचल अड़जरिया और पुरुकेश अमरया की गिरफ्तारी को अमित शाह का चुनावी ब्रह्मास्त्र माना जा रहा है। कट्टर हिंदूवादी समर्थक छवि वाले गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश पर यह सख्त कदम उठाया गया। यह, तब हुआ है जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। सूत्रों के अनुसार संघ व अन्य हिंदूवादी संगठनों के दिग्गजों ने धर्मांतरण का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय तक दबाव बनाने का प्रयास किया था। लेकिन भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने एक नहीं सुनी। मामले में केरल के मुख्यमंत्री की आपत्ति के बाद हर वर्ग और धर्म को साधने और विजयश्री हासिल करने के लिए केंद्र के इशारे पर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया। सत्ता के ठोस कदम के बाद हिंदूवादी संगठनों में अंदरखाने सुगबुगाहट तो है लेकिन कोई खुलकर विरोध नहीं कर रहा।
19 मार्च को उत्कल एक्सप्रेस से उतारी गईं नन भले ही ओडिशा के राउरकेला की रहने वाली हों लेकिन उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ केरल के मुख्यमंत्री ने आवाज बुलंद की थी। उन्होंने जनसभा के दौरान मामला उठाया और भाजपा की केंद्र और उप्र सरकार को घेरा था। यही नहीं, गृहमंत्री को पत्र लिखकर दोषियाें पर कार्रवाई की मांग की थी। मामले के सुर्खियों में आते ही घटनाक्रम ने राजनीतिक मोड़ ले लिया था। भाजपा की हिंदूवादी छवि के बावजूद गृहमंत्री ने मौके की नजाकत को समझा और धारा के विपरीत रुख अख्तियार किया। पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम में भी चुनावी बेला है। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते।
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जांच में आ गई थी तेजी
गृहमंत्रालय की सख्त हिदायत के बाद जीआरपी हरकत में आई थी। एसपी जीआरपी ने लखनऊ से झांसी आकर डेरा डाला था। संबंधित पक्ष के बयान लिए थे। रेलवे ने भी जांच में तत्परता दिखाई। जांच में फंस रहे जीआरपी कर्मी बचाव की मुद्रा में आ गए और उन्होंने हवाला दिया कि अगर ननों को स्टेशन पर उतारा नहीं जाता तो उन पर हमला हो सकता था। यानी संबंधित हर पक्ष को अंदाजा हो गया था कि कार्रवाई तय है और जद में कोई भी आ सकता है।
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हां में हां मिलाने वाली जीआरपी ने ही किया गिरफ्तार
जो जीआरपी शिकायतकर्ताओं की हर बात में हां में हां मिला रही थी और बिना प्लेटफार्म टिकट व अन्य दस्तावेजों के सभी को ट्रेन तक लेकर पहुंची थी, उसी पुलिस बल ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस बात को लेकर बृहस्पतिवार की देर रात तक राजनीतिक गलियारों और हिंदूवादी संगठनों के नेताओं के फोन घनघनाते रहे। सभी इसे राजनीतिक हथकंडा बता रहे थे।
केरल में छह अप्रैल को है मतदान
केरल में छह अप्रैल को मतदान है। उससे ठीक पहले ही हिंदूवादी संगठनों के दो नेताओं की गिरफ्तारी दिखाकर भाजपा ने संदेश दिया है कि वह न्यायप्रिय पार्टी है। फिर दोषी किसी भी धर्म या पार्टी का समर्थक क्यों न हो। माना जा रहा है कि केरल में मतदान से पहले ईसाई समाज में बेहतर छवि बनाने और अधिक सीटें जीतने की गरज से यह कदम उठाया है।
हिंदूवादी संगठनों में झुंझलाहट
झांसी के तमाम हिंदूवादी संगठनों के नेताओं ने केंद्र व राज्य सरकार के रुख पर एतराज जताया है। उनका तर्क है कि इसके दूरगामी परिणाम घातक होंगे। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी को बहुसंख्यकों के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यह तक कह दिया कि इससे केरल या पश्चिम बंगाल में फायदा मिलेगा यह तो तय नहीं है लेकिन 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नुकसान होना तय है। अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सत्ता के लिए हिंदू विरोधी रुख अपनाएगा तो उसका जनाधार घटता जाएगा।
‘गृह मंत्रालय और जीआरपी ने नियमानुसार कदम उठाया है। लेकिन बिना किसी ठोस आधार के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ’
- विनोद अवस्थी, विभागाध्यक्ष हिंदू जागरण मंच