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‘जिम्मेदार’ ही बने परकोटे के दुश्मन

Sat, 01 Jun 2019 12:59 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Sat, 01 Jun 2019 12:59 AM IST
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jimmedar hi bane parkote k dushman
parkota jhansi - फोटो : amarujala
‘जिम्मेदार’ ही बने परकोटे के दुश्मन
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झांसी। ऐतिहासिक परकोटों को संवारने के बजाए उन्हें नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है। जिम्मेदार अफसर ही इस ऐतिहासिक निशानी के प्रति उदासीन हैं। नगर निगम ही नहीं बल्कि कई सरकारी विभाग हैं, जिन्होंने कहीं शौचालय, मूत्रालय तो कहीं आंगनबाड़ी केंद्र बना दिए हैं। उन्होंने सरकारी नियमों पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। यह भी नहीं देखा कि इस निर्माण से ऐतिहासिक विरासत को कितना नुकसान हो रहा है। अफसरों की इसी कार्यप्रणाली के कारण अनेक लोगों ने भी इस परकोटे को ध्वस्त कर दिया। अफसरों तक यह मामले पहुंचे भी लेकिन उनके कान पर जू तक नहीं रेंगी। सख्ती न होने का असर आज सामने है।
खास तौर पर जिस ऐतिहासिक परकोटे के स्वरूप को संवारने के लिए कदम उठाने चाहिए, संरक्षित करना चाहिए, उसके विपरीत काम किया जा रहा है। नगर निगम परकोटे को पुरानी और बदहाल दीवार समझकर उसके अस्तित्व के लिए संकट खड़ा कर रहा है। अगर अब भी लगाम नहीं लगी तो एक दिन ऐसा भी आएगा कि परकोटे का नामोनिशान तक मिट जाएगा।
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ये हैं मामले
केस-1: वार्ड 20 अंतर्गत गुदरी मुहल्ले में परकोटे की ढही हुई दीवार के बगल से नगर निगम का सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। शौचालय के पीछे परकोटा क्षतिग्रस्त हो चुका है तथा ढहे परकोटे के बगल से ही दो शौचालय बने हैं।
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केस-2: बड़ागांव गेट पर एक मूत्रालय बनाया गया है, जो कि परकोटे की दीवार पर बना हुआ है। नगर निगम की तरफ से बनाए गए इस मूत्रालय के लगातार उपयोग से दीवार को नुकसान पहुंच रहा है। इसके रखरखाव की तरफ ध्यान नहीं है।

केस-3: दतिया गेट से अलीगोल खिड़की की तरफ जाने वाली सड़क पर परकोटे को ढहाकर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है। आंगनबाड़ी का एक हिस्सा दीवार के उस तरफ भी है तथा गेट अलीगोल की सड़क की तरफ है।

केस-4: भांडेरी गेट पर बिजली विभाग ने चबूतरा बनाकर ट्रांसफार्मर रख दिया है। साथ ही परकोटे से लगा हुआ हाईटेंशन लाइन का पोल लगा हुआ है। ट्रांसफार्मर के परकोटे के बगल से रखे होने से परकोटे की दीवार को क्षति पहुंच रही है।

केस-5: भांडेरी गेट पर परकोटे से लगा हुआ नगर निगम का सार्वजनिक शौचालय बना है। यह शौचालय उसी नाले के पास बना हुआ है, जहां पिछले दिनों नगर निगम ने परकोटे को ढहा दिया था। ऐसे कई और वाक्या मौजूद हैं।

बदहाल परकोटों का कुछ ही हिस्सा सुरक्षित
झांसी राज्य की स्थापना के साथ ही मराठाओं ने सन् 1796 से 1814 के मध्य लगभग 7.3 किलोमीटर की परिधि में नगर परकोटा और उसके  गेटों का निर्माण कराया था। इसका श्रेय सूबेदार नारो शंकर और सूबेदार शिव राम भाऊ को जाता है। नगर दीवार लगभग पांच से छह फीट चौड़ी है। इस पर कभी सैनिक खडे़ होकर चौकसी करते थे और छोटी तोपें भी इधर-उधर ले जाई जाती थीं। अंग्रेजों के समय में इस दीवार को अजेय माना जाता था। यही वजह है कि दीवार न तोड़ पाने पर अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई के एक प्रमुख मराठा सरदार को लालच दिया और ओरछा गेट के दरवाजे खुलवा दिए थे, जिसके बाद युद्ध का परिणाम अंग्रेजों के पक्ष में चला गया था। समय और आबादी बढ़ने के साथ ही परकोटों के अस्तित्व पर संकट खड़ा होने लगा और आज आलम ये है कि चंद किलोमीटर का हिस्सा ही सुरक्षित रह गया है। अब भी उसकी देखरेख नहीं की तो आगामी दिनों में उसका भी अस्तित्व नहीं रहेगा।

आज भी है चौड़ी सड़क
संपत्ति अधिकारी भांडेरी गेट के पास नाले के हिस्से के बगल से सरकारी रास्ता होने से इंकार कर रहे थे मगर अमर उजाला ने मामले की पड़ताल की तो मामला सही पाया गया। बड़ागांव गेट तक काफी चौड़ी सड़क है मगर उस पर भी कब्जा है।


वर्जन..
मामले की जानकारी नहीं है। देखने के बाद ही स्थिति को स्पष्ट कर सकूंगा। अगर शौचालय विभाग उसकी जद में बना है तो उसका जिम्मेदार निर्माण विभाग है। निर्माण विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। - डॉ. पुष्पराज गौतम, संपत्ति अधिकारी।  

गैर संरक्षित स्मारक से भी तीन से पांच मीटर दूरी पर ही निर्माण हो सकते हैं। इससे स्मारक की मौलिकता प्रभावित नहीं होती है।
- डा. एसके दुबे, पुरातत्व अधिकारी
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