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...थोड़ी सी और कोशिश हो तो नंबर वन बन जाएगी झांसी
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झांसी। झांसी ने पिछली बार के मुकाबले बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 27वें नंबर से सीधे 18वें नंबर की छलांग लगाई है। इसे देखकर कहा जा रहा कि अगर अगले माह दिसंबर में होने वाले नए स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान थोड़ी सी और कोशिश हो जाए तब झांसी को पूरे देश का सबसे साफ सुथरा शहर बनाया जा सकता है। इस दफे सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई की वजह से रैकिंग में जबर्दस्त सुधार हुआ। डोर-टू-डोर कूड़ा उठने से भी तयशुदा अंक मिले।
स्वच्छ भारत सर्वेक्षण के तहत केंद्रीय शहरी मंत्रालय वर्ष 2015 से शहरों की साफ-सफाई परख रहा है। झांसी को एक से दस लाख आबादी के शहरों में रखा गया। इस श्रेणी में पिछले तीन दफे से मप्र का अंबिकापुर शहर बाजी मारता आ रहा था लेकिन, अबकी बार नई दिल्ली ने कूड़ा निस्तारण में नए प्रयोग करके अंबिकापुर को पीछे छोड़ दिया। झांसी को पिछले वर्ष 27वां स्थान मिला लेकिन, इस दफे उसने अपने प्रदर्शन में नौ स्थानों का सुधार करते हुए 18वें नंबर पर छलांग लगा दी। निगम अफसरों का कहना है कि सुधार करते हुए पिछली बार सूबे में दूसरे नंबर पर रहा जबकि देशभर की रैकिंग में उसे 27वें नंबर पर संतोष करना पड़ा था। इस दफे सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई समेत घरों से कूड़ा उठान एवं सेकेंडरी गार्वेज प्वांइट खत्म करने से अंकों में इजाफा हुआ है। इसके अलावा फ्लिकर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी 6 केएलडी से बढ़ाकर 18 केएलडी होने से भी फायदा मिला। स्वच्छता सर्वेक्षण प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है कि सेकेंडरी गार्वेज प्वांइट पर कूड़ा खत्म करने के साथ ही नाइट स्वीपिंग से भी अंकों में सुधार हुआ है। उधर, नगर निगम की रैगिंग में सुधार होने से महापौर रामतीर्थ सिंघल समेत तमाम पार्षदों ने हर्ष जताया है। महापौर ने इसे सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। उपसभापति सुनील नैनवानी ने भी इसे सामूहिक प्रयास का फल बताते हुए निगम अफसरों की भूमिका की तारीफ की है।
एक नजर में झांसी
कुल वार्ड- 60
डोर-टू-डोर उठान वाले वार्ड- 40
सफाई कर्मचारी- 1600
रोजाना निकले वाला कूड़ा- 250 मीट्रिक टन
कूड़ा उठान- 70 प्रतिशत
प्रोसेसिंग- 40 प्रतिशत
1-10 लाख आबादी के शहरों को मिले अंक
रैकिंग शहर अंक
1- नई दिल्ली 5300.24
2- अंबिकापुर 5148.64
18- झांसी 4389.49
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स्वच्छ भारत सर्वेक्षण के तहत केंद्रीय शहरी मंत्रालय वर्ष 2015 से शहरों की साफ-सफाई परख रहा है। झांसी को एक से दस लाख आबादी के शहरों में रखा गया। इस श्रेणी में पिछले तीन दफे से मप्र का अंबिकापुर शहर बाजी मारता आ रहा था लेकिन, अबकी बार नई दिल्ली ने कूड़ा निस्तारण में नए प्रयोग करके अंबिकापुर को पीछे छोड़ दिया। झांसी को पिछले वर्ष 27वां स्थान मिला लेकिन, इस दफे उसने अपने प्रदर्शन में नौ स्थानों का सुधार करते हुए 18वें नंबर पर छलांग लगा दी। निगम अफसरों का कहना है कि सुधार करते हुए पिछली बार सूबे में दूसरे नंबर पर रहा जबकि देशभर की रैकिंग में उसे 27वें नंबर पर संतोष करना पड़ा था। इस दफे सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई समेत घरों से कूड़ा उठान एवं सेकेंडरी गार्वेज प्वांइट खत्म करने से अंकों में इजाफा हुआ है। इसके अलावा फ्लिकर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी 6 केएलडी से बढ़ाकर 18 केएलडी होने से भी फायदा मिला। स्वच्छता सर्वेक्षण प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है कि सेकेंडरी गार्वेज प्वांइट पर कूड़ा खत्म करने के साथ ही नाइट स्वीपिंग से भी अंकों में सुधार हुआ है। उधर, नगर निगम की रैगिंग में सुधार होने से महापौर रामतीर्थ सिंघल समेत तमाम पार्षदों ने हर्ष जताया है। महापौर ने इसे सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। उपसभापति सुनील नैनवानी ने भी इसे सामूहिक प्रयास का फल बताते हुए निगम अफसरों की भूमिका की तारीफ की है।
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एक नजर में झांसी
कुल वार्ड- 60
डोर-टू-डोर उठान वाले वार्ड- 40
सफाई कर्मचारी- 1600
रोजाना निकले वाला कूड़ा- 250 मीट्रिक टन
कूड़ा उठान- 70 प्रतिशत
प्रोसेसिंग- 40 प्रतिशत
1-10 लाख आबादी के शहरों को मिले अंक
रैकिंग शहर अंक
1- नई दिल्ली 5300.24
2- अंबिकापुर 5148.64
18- झांसी 4389.49