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Jhansi: तनाव में युवाओं को दिल भी दे रहा धोखा, ओपीडी में आने वाले रोगियों में 15 फीसदी से ज्यादा युवा
Sat, 07 Feb 2026 12:08 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 07 Feb 2026 12:08 PM IST
सार
तनाव का विपरीत प्रभाव सीधे दिल पर पड़ता है। इससे न सिर्फ रक्तचाप और दिल की धड़कन बढ़ती है बल्कि कॉर्टिसोल हार्मोन का स्राव होता है। इस हार्मोन से धमनियों में ब्लॉकेज या सूजन ही नहीं हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक भी होता है।
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हार्ट अटैक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
तंबाकू, धूम्रपान, जंक फूड, वसायुक्त भोजन ही नहीं अधिक तनाव के कारण 40 साल से कम उम्र के युवा हृदय रोग, हार्ट अटैक व स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी ही नहीं हृदय रोग विभाग की ओपीडी में भी युवा रोगियों की संख्या 15 फीसदी तक पहुंच गई है।
मेडिकल कॉलेज की हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऊषा किरन कुरै ने बताया कि अभी तक हृदय रोग, हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक उम्रदराज लोगों की बीमारी समझा जाता था मगर अब युवाओं में भी यह घर कर रही है। वह बताती हैं कि आमतौर पर सिर्फ यही समझा जाता है कि वसायुक्त भोजन की अधिकता, जंक फूड, तंबाकू के ज्यादा सेवन से हृदय रोग होता है। हृदय रोग होने की सबसे बड़ी वजह भागमभाग जिंदगी में तनाव का हावी होना है। तनाव का विपरीत प्रभाव सीधे दिल पर पड़ता है। इससे न सिर्फ रक्तचाप और दिल की धड़कन बढ़ती है बल्कि कॉर्टिसोल हार्मोन का स्राव होता है। इस हार्मोन से धमनियों में ब्लॉकेज या सूजन ही नहीं हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक भी होता है। वह बताती हैं कि यही वजह है कि इमरजेंसी में हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक के आने वाले रोगियों में 20 फीसदी से ज्यादा 40 साल से कम उम्र के हैं। ओपीडी में 15 फीसदी से ज्यादा इसी उम्र के लोग होते हैं। डा. किरन बताती हैं कि जब युवाओं से परीक्षण के दौरान बातचीत की जाती है तो 90 फीसदी तनाव की वजह से परेशान होने की बात बताते हैं।
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मेडिकल कॉलेज की हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऊषा किरन कुरै ने बताया कि अभी तक हृदय रोग, हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक उम्रदराज लोगों की बीमारी समझा जाता था मगर अब युवाओं में भी यह घर कर रही है। वह बताती हैं कि आमतौर पर सिर्फ यही समझा जाता है कि वसायुक्त भोजन की अधिकता, जंक फूड, तंबाकू के ज्यादा सेवन से हृदय रोग होता है। हृदय रोग होने की सबसे बड़ी वजह भागमभाग जिंदगी में तनाव का हावी होना है। तनाव का विपरीत प्रभाव सीधे दिल पर पड़ता है। इससे न सिर्फ रक्तचाप और दिल की धड़कन बढ़ती है बल्कि कॉर्टिसोल हार्मोन का स्राव होता है। इस हार्मोन से धमनियों में ब्लॉकेज या सूजन ही नहीं हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक भी होता है। वह बताती हैं कि यही वजह है कि इमरजेंसी में हार्ट अटैक व हार्ट स्ट्रोक के आने वाले रोगियों में 20 फीसदी से ज्यादा 40 साल से कम उम्र के हैं। ओपीडी में 15 फीसदी से ज्यादा इसी उम्र के लोग होते हैं। डा. किरन बताती हैं कि जब युवाओं से परीक्षण के दौरान बातचीत की जाती है तो 90 फीसदी तनाव की वजह से परेशान होने की बात बताते हैं।
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