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Jhansi: एसबीआई को ब्याज समेत राशि भुगतान का आदेश, मां के देहांत के बाद बैंक ने पुत्र को नहीं माना था वारिस
Sun, 25 Jan 2026 06:45 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 25 Jan 2026 06:45 AM IST
सार
मां के देहांत के बाद पुत्र ने बैंक में जमा लगभग 60 हजार रुपये निकालने के लिए आवेदन किया था। सारे जरूरी दस्तावेज लगाए थे। बैंक के प्रतिनिधि ने बिना वारिसाना दिए राशि देने से मना कर दिया था।
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उपभोक्ता न्यायालय, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मां के देहांत के बाद उसके खाते में जमा राशि का भुगतान पुत्र को न करने पर उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने मय ब्याज के राशि एसबीआई को देने का आदेश दिया है। पीड़ित को वाद व्यय व मानसिक कष्ट की राशि भी मिलेगी।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता गणेश कुमार खरे ने परिवाद दायर किया था। उल्लेख किया था कि दतिया गेट के बाहर निवासी मुकेश त्रिपाठी के सैनिक पिता का देहांत 2003 को हो गया था। पिता की जगह मां शकुंतला देवी को मृतक आश्रित पेंशन मिलने लगी। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के मानिक चौक शाखा में खाता खुलवाया गया था। जुलाई 2024 में मां के देहांत के बाद पुत्र मुकेश ने बैंक में जमा लगभग 60 हजार रुपये निकालने के लिए आवेदन किया था। सारे जरूरी दस्तावेज लगाए थे। इसके बाद भी बैंक ने और दस्तावेज मांगे तो आवेदक ने मां और स्वयं की संयुक्त कृषि भूमि का खसरा भी जमा कर दिया, लेकिन बैंक ने उसे जमा धनराशि का भुगतान नहीं किया। बैंक के प्रतिनिधि ने बिना वारिसाना दिए राशि देने से मना कर दिया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्यगण देवेश अग्निहोत्री एवं ज्योति प्रभा जैन ने अधिवक्ता के तर्कों को सही मानते हुए भारतीय स्टेट बैंक मानिक चौक शाखा के प्रबंधक को आदेश दिया कि बैंक में जमा पूरी राशि दो माह के अन्दर ब्याज सहित आयोग में चेक के माध्यम से जमा करें। साथ ही मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता गणेश कुमार खरे ने परिवाद दायर किया था। उल्लेख किया था कि दतिया गेट के बाहर निवासी मुकेश त्रिपाठी के सैनिक पिता का देहांत 2003 को हो गया था। पिता की जगह मां शकुंतला देवी को मृतक आश्रित पेंशन मिलने लगी। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के मानिक चौक शाखा में खाता खुलवाया गया था। जुलाई 2024 में मां के देहांत के बाद पुत्र मुकेश ने बैंक में जमा लगभग 60 हजार रुपये निकालने के लिए आवेदन किया था। सारे जरूरी दस्तावेज लगाए थे। इसके बाद भी बैंक ने और दस्तावेज मांगे तो आवेदक ने मां और स्वयं की संयुक्त कृषि भूमि का खसरा भी जमा कर दिया, लेकिन बैंक ने उसे जमा धनराशि का भुगतान नहीं किया। बैंक के प्रतिनिधि ने बिना वारिसाना दिए राशि देने से मना कर दिया।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्यगण देवेश अग्निहोत्री एवं ज्योति प्रभा जैन ने अधिवक्ता के तर्कों को सही मानते हुए भारतीय स्टेट बैंक मानिक चौक शाखा के प्रबंधक को आदेश दिया कि बैंक में जमा पूरी राशि दो माह के अन्दर ब्याज सहित आयोग में चेक के माध्यम से जमा करें। साथ ही मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया
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