'साहब! मेरे पति बाहर से आए हैं, जांच कराओ', झांसी को लोग पेश कर रहे जागरूकता की मिसाल
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इसे कोरोना वायरस का डर कहें या सतर्कता कि झांसी के मऊरानीपुर के एक गांव की रहने वाली महिला ने कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन करके बताया कि उसका पति पंजाब से लौटा है। घर में बच्चे और अन्य सदस्य हैं। ऐसे में उसके पति की जांच कराई जाए। कहीं उसे कोरोना वायरस तो नहीं है।
इसी तरह, कई अन्य मामले पूरे बुंदेलखंड से स्वास्थ्य विभाग के सामने आ रहे हैं। इससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लोगों की ट्रैकिंग करने में भी मदद मिल रही है। सोमवार रात बड़ागांव निवासी एक व्यक्ति ने खुद पहल करते हुए कंट्रोल रूम में फोन किया और बताया कि वह दिल्ली से आया है। उसका स्वास्थ्य परीक्षण करवा लिया जाए।
इसके अलावा एक पिता ने बाहर से लौटे अपने बेटे की भी जानकारी दी। बताया कि उसे वायरल नहीं है लेकिन फिर भी जांच करवा ली जाए। ग्रामीण क्षेत्र में भी लोग बाहर से आने वालों को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं। ग्राम खिलारा में 12, धायपुरा में 28, बसरिया में 13, बिरगुआं में 32, भंडरा में 45, देवरीघाट में 35, हरपुरा में 37, पंचमपुरा में 20, मथुपुरा में 60, पठा में 45, खकौरा कुअरपुरा में 41 लोगों के दूसरे राज्यों से आने की सूचना ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को दी।
वहीं, भदरवारा खुर्द में रविवार रात दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद से लौटे लगभग 40 श्रमिकों की सूचना स्वास्थ्य विभाग व पुलिस को दी गई। टोड़ीफतेहपुर कस्बे में बाहर से आने वालों की संख्या 200 से भी आगे निकल गई है। ग्रामीणों ने इनकी जांच कराने की मांग की है।
इसी तरह, ललितपुर के एक गांव निवासी कृषक ने अपने बेटे के दिल्ली से लौटने पर इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी। वहीं, आसपड़ोस के लोग भी विदेश या गैर राज्यों से आने वालों की सूचना कंट्रोल रूम को दे रहे हैं। इन सूचनाओं से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लोगों की ट्रैकिंग में मदद मिल रही है।
ऐसे लोगों को तुरंत ही क्वारंटीन कर दिया जाता है। वहीं, किसी को भी सर्दी, खांसी, बुखार होता है तो उसे अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है। गंभीर मरीजों की कोरोना जांच के लिए सैंपल भेजा जाता है।
ग्रामीणों ने खींची लक्ष्मण रेखा
कोरोना वायरस को हराने के लिए ग्रामीणों ने खुद लक्ष्मण रेखा खींच ली है। बाहर से गांव आने वाले हर व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उनका नाम, पता दर्ज किया जा रहा है। यही नहीं, गांव के प्रधान लोगों से स्क्रीनिंग के बाबत भी पूछताछ कर रहे हैं। जिनकी स्क्रीनिंग नहीं हुई है, उनकी सूचना भी अधिकारियों को दे रहे हैं।