{"_id":"6a02da6140057c3ce30aaf2f","slug":"jhansi-order-to-give-rs-3-000-per-month-to-elderly-parents-who-were-thrown-out-of-the-house-four-years-ago-2026-05-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi: वृद्ध मां-बाप को हर माह 3,000 रुपये देने के आदेश, चार साल पहले बेटे ने निकाल दिया था घर से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi: वृद्ध मां-बाप को हर माह 3,000 रुपये देने के आदेश, चार साल पहले बेटे ने निकाल दिया था घर से
Tue, 12 May 2026 01:14 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 12 May 2026 01:14 PM IST
सार
बेटे ने बहू के कहने पर माता-पिता को 4 साल पहले घर से निकाल दिया था। अब मध्यस्थता केंद्र ने बेटे को मां-बाप को हर महीने तीन हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
माता-पिता बच्चों की बेहतर परवरिश करते हैं, लेकिन जब उनकी सेवा करने की बारी आती है तो कई बेटे मुंह मोड़ लेते हैं। ऐसा ही एक मामला परिवार न्यायालय में आया। बेटे ने बहू के कहने पर माता-पिता को 4 साल पहले घर से निकाल दिया था। अब मध्यस्थता केंद्र ने बेटे को मां-बाप को हर महीने तीन हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।
शहर के पाल कॉलोनी निवासी पिता ने परिवार न्यायालय में वाद दायर किया था। मांग की थी कि मेहनत से उसने घर बनाया, उसमें उसे रहने दिया जाए, साथ ही हर माह भरण-पोषण के रूप में 15 हजार रुपये दिलाया जाए। यह मामला परिवार न्यायालय ने मध्यस्थता केंद्र में भेजा। जनपद न्यायाधीश कमलेश कच्छल व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव सुमित पाराशर के निर्देश पर मध्यस्थता केंद्र में मास्टर ट्रेनर अधिवक्ता मुकेश सिंघल के सहयोग से आपसी सुलह हुई। बेटे को आदेश दिया कि वह पिता को साथ में रखे और हर माह दो हजार पिता को व माता को एक हजार रुपये अदा करे। साथ ही दवा व अन्य खर्च भी उठाए।
विज्ञापन
शहर के पाल कॉलोनी निवासी पिता ने परिवार न्यायालय में वाद दायर किया था। मांग की थी कि मेहनत से उसने घर बनाया, उसमें उसे रहने दिया जाए, साथ ही हर माह भरण-पोषण के रूप में 15 हजार रुपये दिलाया जाए। यह मामला परिवार न्यायालय ने मध्यस्थता केंद्र में भेजा। जनपद न्यायाधीश कमलेश कच्छल व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव सुमित पाराशर के निर्देश पर मध्यस्थता केंद्र में मास्टर ट्रेनर अधिवक्ता मुकेश सिंघल के सहयोग से आपसी सुलह हुई। बेटे को आदेश दिया कि वह पिता को साथ में रखे और हर माह दो हजार पिता को व माता को एक हजार रुपये अदा करे। साथ ही दवा व अन्य खर्च भी उठाए।
विज्ञापन