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Jhansi: श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास ने बताई दान की महिमा, कहा- यह आत्मशुद्धि और कल्याण का मार्ग

Fri, 28 Nov 2025 09:41 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Fri, 28 Nov 2025 09:41 PM IST
सार

कथा व्यास पंडित रमाकांत व्यास ने भागवत के श्लोकों और महाभारत के संस्मरणों के माध्यम से जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला। साथ ही दान की महिमा का वर्णन किया।

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Jhansi: On the second day of Bhagwat Katha, Katha Vyas told the glory of charity.
कथा का गान करते रमाकांत व्यास महाराज - फोटो : संवाद

विस्तार

चिरगांव के ग्राम पहाड़ी बुजुर्ग स्थित रायसेनिया बाबा मंदिर पर किशोरी शरण दांगी की पांचवीं पुण्य स्मृति पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का कार्यक्रम शुक्रवार को धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कथा व्यास पंडित रमाकांत व्यास ने भागवत के श्लोकों और महाभारत के संस्मरणों के माध्यम से जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने द्वारा अर्जित धन का कम से कम दसवां हिस्सा दान अवश्य करना चाहिए। यह दान केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्म शुद्धि और समाज कल्याण का मार्ग भी है। दान व्यक्ति को सांसारिक आसक्ति से ऊपर उठाकर परोपकार और संतोष की ओर प्रेरित करता है।
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कथा के मध्य उन्होंने भीष्म पितामह के जीवन प्रसंगों का स्मरण कराया और बताया कि मृत्यु शैय्या पर उन्होंने अपने परिवार और समाज को उपदेश दिया था कि राजा का प्रथम कर्तव्य है कि वह प्रजा का पालन पुत्रवत करे, न्याय और धर्म को सर्वोपरि रखे और अंत में प्रभु भक्ति के बल पर मोक्ष को प्राप्त करे। श्रीकृष्ण के समक्ष भीष्म का देहावसान त्याग, तप, क्षमा और दया का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अंत समय में भीष्म अपने कर्मों का चिंतन करते हुए स्वयं को दोषमुक्त नहीं मानते, लेकिन भक्ति, सत्य और समर्पण के बल पर कृष्ण के सम्मुख उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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व्यास जी ने कलयुग के दुर्गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि आज मन में क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और छल का वास बढ़ता जा रहा है। इससे बचने का सबसे सरल और सिद्ध मार्ग है राम नाम का जप। इस अवसर पर घनाराम सिंह बारे परीक्षा, भगवत सिंह सारौल, जागेश्वर मिश्रा, राजू दांगी कुन्हरिया तथा संत विश्व भूषण दास महाराज , महावीर दास ब्रह्मचारी ,स्वामी दांगी जरियाई ,जय शरण सोनी, कमल राजपूत मुराटा, रमेश सिंह बापू पहाड़ी, ईश्वर सिंह दांगी बहादुरपुर, डॉ विजय भारद्वाज, डॉ आर आर सक्सेना, अवधेश निरंजन,रामानंद तिवारी,हिमांशु पटेल मौजूद रहे। अंत में आरती, भजन और प्रसाद वितरण के साथ कथा विराम हुआ।
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