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झांसी- कानपुर डबल ट्रैक अब दो हजार करोड़ का, नौ सौ करोड़ बढ़ी लागत
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झांसी। स्टेशनों पर काम बढ़ने के कारण झांसी - कानपुर डबल ट्रैक की लागत दस साल में नौ सौ करोड़ रुपये बढ़ गई है। रास्ते के सभी स्टेशनों के प्लेटफार्म ऊंचे और दो की जगह इक्कीस फुट ओवरब्रिज बनाए गए। यमुना ब्रिज बनाने में ही सौ करोड़ रुपये खर्च हो गए। यह योजना 2010 में स्वीकृत हुई थी, उस समय 1100 करोड़ अनुमानित लागत थी। अभी तक 206 में 87 किलोमीटर का रास्ता खोला जा चुका है। मार्च तक 49 किलोमीटर और रास्ता खोलने की तैयारी चल रही है।
साल 2010 में झांसी- कानपुर दूसरी लाइन डालने की योजना तैयार की गई थी, उस समय अनुमानित लागत 1100 करोड़ थी। योजना के लिए 2013-14 के बजट में उक्त धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसमें झांसी-भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। यह काम तीन कंपनियों को सौंपा। झांसी से एरच रोड स्टेशन (66 किलोमीटर) तक 265 करोड़ रुपये का काम मुंबई की कंपनी जीएमआर और एरच रोड से उसरगांव (70 किलोमीटर) तक 288 करोड़ रुपये का काम बंगलूरू की कंपनी केईसी कर रही है। उसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। छूटे काम को चीन की चाइना रेल कंपनी डी 21 और हैदराबाद की श्री श्रीनिवासन कंस्ट्रक्शन (एससीएल) कंपनी पूरा कर रही है।
इस योजना की लागत अब दो हजार करोड़ पर पहुंच गई है। अभी तक 17 सौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। दरअसल, रास्ते में पड़ने वाले सभी स्टेशनों के प्लेटफार्म कोच की सीढ़ियों के बराबर तैयार किए जा रहे हैं। पहले इसमें बदलाव नहीं होना था। प्लेटफार्म ऊंचे होने से हर स्टेशन पर नए फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं। पहले दो फुट ओवरब्रिज बनने थे, जिनकी संख्या अब 21 पर पहुंच गई है। एक फुट ओवरब्रिज को बनाने में करीब चार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। स्टेशनों की बिल्डिंग में बदलाव व पांच स्टेशन नए बनाए गए हैं।
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मार्च तक खुलेगा 49 किलोमीटर डबल ट्रैक
झांसी-कानपुर डबल ट्रैक पर 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। अभी तक 87 किलोमीटर ट्रैक का काम ही पूरा हो सका है। पूर्व मेेें इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर, पारीछा से नंदखास के बीच 19 और पिरौना- एट, भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर व सरसोकी व उसरगांव तक डबल ट्रैक (17.585) रेल लाइन चालू हो चुकी है। आरवीएनएल अब मार्च 2021 तक नंदखास से पिरौना के बीच 32 किलोमीटर और भुआ से सरसोकी के बीच 17 किलोमीटर ट्रैक खोलने जा रहा है। रेल लाइन डालने का काम पूरा कर लिया गया है। संबंधित स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम बाकी रह गया है।
संक्षेप में जानिए
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- झांसी- कानपुर डबल ट्रैक की योजना 2010 में तैयार की गई।
- 2013-14 के बजट में 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
- दस साल में योजना की लागत बढ़कर दो हजार करोड़ पर पहुंची।
- झांसी से कानपुर के बीच 206 किलोमीटर में दूसरी पटरी डल रही है।
- तीन हिस्सों में तीन अलग- अलग कंपनियां काम कर रहीं हैं।
- छह साल में 87 किलोमीटर रेल मार्ग खुला।
- कालपी के निकट यमुना ब्रिज को बनाने में सौ करोड़ रुपये का खर्चा आया।
- दिसंबर 2021 तक पूरे रेल मार्ग को चालू करने का लक्ष्य बनाया गया है।
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साल 2010 में झांसी- कानपुर दूसरी लाइन डालने की योजना तैयार की गई थी, उस समय अनुमानित लागत 1100 करोड़ थी। योजना के लिए 2013-14 के बजट में उक्त धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसमें झांसी-भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। यह काम तीन कंपनियों को सौंपा। झांसी से एरच रोड स्टेशन (66 किलोमीटर) तक 265 करोड़ रुपये का काम मुंबई की कंपनी जीएमआर और एरच रोड से उसरगांव (70 किलोमीटर) तक 288 करोड़ रुपये का काम बंगलूरू की कंपनी केईसी कर रही है। उसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। छूटे काम को चीन की चाइना रेल कंपनी डी 21 और हैदराबाद की श्री श्रीनिवासन कंस्ट्रक्शन (एससीएल) कंपनी पूरा कर रही है।
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इस योजना की लागत अब दो हजार करोड़ पर पहुंच गई है। अभी तक 17 सौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। दरअसल, रास्ते में पड़ने वाले सभी स्टेशनों के प्लेटफार्म कोच की सीढ़ियों के बराबर तैयार किए जा रहे हैं। पहले इसमें बदलाव नहीं होना था। प्लेटफार्म ऊंचे होने से हर स्टेशन पर नए फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं। पहले दो फुट ओवरब्रिज बनने थे, जिनकी संख्या अब 21 पर पहुंच गई है। एक फुट ओवरब्रिज को बनाने में करीब चार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। स्टेशनों की बिल्डिंग में बदलाव व पांच स्टेशन नए बनाए गए हैं।
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मार्च तक खुलेगा 49 किलोमीटर डबल ट्रैक
झांसी-कानपुर डबल ट्रैक पर 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। अभी तक 87 किलोमीटर ट्रैक का काम ही पूरा हो सका है। पूर्व मेेें इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर, पारीछा से नंदखास के बीच 19 और पिरौना- एट, भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर व सरसोकी व उसरगांव तक डबल ट्रैक (17.585) रेल लाइन चालू हो चुकी है। आरवीएनएल अब मार्च 2021 तक नंदखास से पिरौना के बीच 32 किलोमीटर और भुआ से सरसोकी के बीच 17 किलोमीटर ट्रैक खोलने जा रहा है। रेल लाइन डालने का काम पूरा कर लिया गया है। संबंधित स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम बाकी रह गया है।
संक्षेप में जानिए
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- झांसी- कानपुर डबल ट्रैक की योजना 2010 में तैयार की गई।
- 2013-14 के बजट में 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
- दस साल में योजना की लागत बढ़कर दो हजार करोड़ पर पहुंची।
- झांसी से कानपुर के बीच 206 किलोमीटर में दूसरी पटरी डल रही है।
- तीन हिस्सों में तीन अलग- अलग कंपनियां काम कर रहीं हैं।
- छह साल में 87 किलोमीटर रेल मार्ग खुला।
- कालपी के निकट यमुना ब्रिज को बनाने में सौ करोड़ रुपये का खर्चा आया।
- दिसंबर 2021 तक पूरे रेल मार्ग को चालू करने का लक्ष्य बनाया गया है।