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Jhansi: बीमा कंपनी को दिया सूद सहित 3.91 लाख अदा करने का आदेश, कार क्षतिग्रस्त होने पर अदालत ने सुनाया फैसला
Sat, 25 Jul 2026 12:51 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 25 Jul 2026 12:51 PM IST
सार
कार के दुर्घटनाग्रस्त होने पर भी बीमा कंपनी कंपनी ने क्लेम की राशि नहीं दी। स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को सूद सहित क्लेम की आंशिक राशि अदा करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
कार के दुर्घटनाग्रस्त होने पर भी बीमा कंपनी कंपनी ने क्लेम की राशि नहीं दी। स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को सूद सहित क्लेम की आंशिक राशि अदा करने का आदेश दिया है।
वाद के मुताबिक मई 2019 में गंग वाली निवासी शेषराम सिंह यादव कहीं जा रहे थे। तभी कानपुर रोड पर मवेशी को बचाने में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। घटना के वक्त नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कार का बीमा था। दुर्घटना के बाद जब कार मालिक ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम की राशि मांगी तो उन्होंने देने से मना कर दिया। तर्क दिया कि सूचना देर में दी गई। कुछ महीने बाद वादी ने अधिवक्ता गणेश कुमार खरे के माध्यम से स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। इसमें 5.40 लाख रुपये का दावा किया गया था। क्षतिपूर्ति राशि भी मांगी गई थी। अदालत ने दावे को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह वादी को आठ फीसदी ब्याज सहित 3.91 लाख रुपये अदा करे। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी वादी को वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करे।
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वाद के मुताबिक मई 2019 में गंग वाली निवासी शेषराम सिंह यादव कहीं जा रहे थे। तभी कानपुर रोड पर मवेशी को बचाने में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। घटना के वक्त नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कार का बीमा था। दुर्घटना के बाद जब कार मालिक ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम की राशि मांगी तो उन्होंने देने से मना कर दिया। तर्क दिया कि सूचना देर में दी गई। कुछ महीने बाद वादी ने अधिवक्ता गणेश कुमार खरे के माध्यम से स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। इसमें 5.40 लाख रुपये का दावा किया गया था। क्षतिपूर्ति राशि भी मांगी गई थी। अदालत ने दावे को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह वादी को आठ फीसदी ब्याज सहित 3.91 लाख रुपये अदा करे। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी वादी को वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करे।
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