फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Jhansi : Animal research lab made of two crores, not a single research done

Jhansi : दो करोड़ से बनी एनिमल रिसर्च लैब, नहीं हुआ एक भी शोध, पूछने पर कुलपति ने दिया गोलमोल जवाब

Sun, 18 Dec 2022 04:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 18 Dec 2022 04:15 AM IST
सार

Jhansi : यहां पर राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से मिले दो करोड़ रुपये से एनिमल रिसर्च लैब (पशु अनुसंधान प्रयोगशाला) बनाकर तैयार की गई। दो साल बीत जाने के बावजूद यहां पर किसी भी शिक्षक ने शोध कार्य नहीं किया है।

विज्ञापन
Jhansi : Animal research lab made of two crores, not a single research done
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निर्माण कार्य के नाम पर किस तरह पैसों की बर्बादी की जाती है, इसका ताजा उदाहरण देखना है तो बुंदेलखंड विश्वविद्यालय आइये। यहां पर राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से मिले दो करोड़ रुपये से एनिमल रिसर्च लैब (पशु अनुसंधान प्रयोगशाला) बनाकर तैयार की गई। दो साल बीत जाने के बावजूद यहां पर किसी भी शिक्षक ने शोध कार्य नहीं किया है।

विज्ञापन


एनिमल रिसर्च लैब बनाने के पीछे उद्देश्य था कि नई-नई दवाएं बनाने के बाद इनका ट्रायल जानवर (चूहों) पर किया जाए। ताकि, पता चल सके कि ये दवाएं मनुष्यों के लिए हानिकारक तो नहीं हैं। ट्रायल के आधार पर ही तय होता है कि दवा का डोज कितना रखा जाना चाहिए। बीयू में फार्मेसी विभाग है, जहां पर दवाओं पर शोध कार्य किया जाता है। इसके अलावा बायोमेडिकल साइंस विभाग में भी आयुर्वेदिक दवाओं पर रिसर्च होती है। जंतु विज्ञान विभाग द्वारा भी जानवरों पर कीटनाशक आदि के प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। 
विज्ञापन


इसके अलावा भी कई विभाग इस लैब के माध्यम से शोध कार्य कर सकते हैं। मगर दो साल बीत जाने के बावजूद इस लैब पर किसी विभाग या फिर शिक्षक द्वारा शोध कार्य शुरू नहीं किया गया है। फार्मेसी विभाग के शिक्षकों का कहना है कि लैब के संचालन के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति चाहिए होती है, जो कि अभी नहीं मिल पा रही है। यहां पर जनरेटर भी नहीं है। इसी वजह से किसी शिक्षक ने तो प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं किया है। मगर पीएचडी शोधार्थी समय-समय पर काम करते रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनिमल रिसर्च लैब में किसी भी शिक्षक ने शोध कार्य क्यों नहीं किया, इसका पता लगाया जाएगा। अगर निर्बाध विद्युत आपूर्ति नहीं मिल पा रही है तो इसकी व्यवस्था कराई जाएगी। 
-प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बीयू

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed