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जीवन के सात दशक साथ जीए और साथ ही हुए दुनिया से विदा
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फाइल फोटो (मृतक दंपती) --- दयाराम गुप्ता व कुसुम देवी।
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। सात दशक पहले दोनों ने एकदूसरे का हाथ थामकर साथ जीने मरने की कसम खाई थी। सोमवार की सुबह दोनों अपनी ये कसम पूरी कर इस दुनिया से विदा हो लिए। यहां बात हो रही है मिशन कंपाउंड में रहने वाले 95 वर्षीय दयाराम गुप्ता की, जिनकी सोमवार की सुबह मृत्यु हो गई और इसके कुछ घंटों बाद ही उनकी 90 वर्षीय पत्नी कुसुम देवी भी इस दुनिया से विदा हो लीं। परिजनों ने वृद्ध दंपती का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया। ये देखकर और सुनकर सभी की आंखें नम हो उठीं।
दयाराम गुप्ता की शादी 73 साल पहले कुुसुम देवी से हुई थी। पहले वे रानी महल के पास रहते थे। सन 2000 से वे परिवार के साथ मिशन कंपाउंड में रहने लगे थे। पहले वे राशन की दुकान का संचालन किया करते थे। लेकिन, पारिवारिक जिम्मेदारियों से निवृत्त होने के बाद उन्होंने ये काम छोड़ दिया था। लेकिन, घर में अपना सारा काम वे खुद ही किया करते थे। इसमें उन्हें किसी की जरूरत नहीं पड़ती थी। इसी प्रकार उनकी पत्नी कुसुम देवी भी अपने कामों के लिए किसी की मोहताज नहीं थीं।
रविवार की रात दंपती रात में रोज की तरह सोया। सुबह तकरीबन तीन बजे दयाराम वॉशरूम गए और यहीं बैठे रह गए। दयाराम की पत्नी कुसुम ने इसकी सूचना अपने पुत्र सतीश को दी। सतीश पहले पिता को जिला अस्पताल लेकर गए और फिर मेडिकल कॉलेज लेकर भागे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुबह सात बजे पति के निधन की जानकारी कुसुम देवी को हुई। पति की मृत्यु का समाचार सुनते ही वे अचेत हो गईं। पहले उन्हें एक निजी अस्पताल और बाद में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। लेकिन, उनकी भी सांसें थम गईं। इसकी जानकारी होने पर पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया। दोनों की अर्थियां एकसाथ उठाई गईं और नंदनपुरा मुक्तिधाम पर एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
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सुख-दुख में हमेशा साथ रहे, साथ ही हुए विदा
झांसी। दंपती के पुत्र रेलवे में कार्यरत सतीश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी माता - पिता को आपस में झगड़ते हुए नहीं देखा। दोनों में बड़ा प्रेम था। हर जगह दोनों साथ ही जाते थे। सतीश ने बताया कि उनके एक भाई की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद जब पिता दुखी होते थे तो उन्हें मां ढांढस बंधाती थीं और मां के दुखी होने के पिता उन्हें समझाते थे। इस आयु में भी वे अपने सभी दैनिक काम खुद किया करते थे। इसके लिए उन्हें किसी की जरूरत नहीं पड़ती थी। कभी सोचा नहीं था कि एक साथ सिर से माता-पिता का साया उठ जाएगा।
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दयाराम गुप्ता की शादी 73 साल पहले कुुसुम देवी से हुई थी। पहले वे रानी महल के पास रहते थे। सन 2000 से वे परिवार के साथ मिशन कंपाउंड में रहने लगे थे। पहले वे राशन की दुकान का संचालन किया करते थे। लेकिन, पारिवारिक जिम्मेदारियों से निवृत्त होने के बाद उन्होंने ये काम छोड़ दिया था। लेकिन, घर में अपना सारा काम वे खुद ही किया करते थे। इसमें उन्हें किसी की जरूरत नहीं पड़ती थी। इसी प्रकार उनकी पत्नी कुसुम देवी भी अपने कामों के लिए किसी की मोहताज नहीं थीं।
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रविवार की रात दंपती रात में रोज की तरह सोया। सुबह तकरीबन तीन बजे दयाराम वॉशरूम गए और यहीं बैठे रह गए। दयाराम की पत्नी कुसुम ने इसकी सूचना अपने पुत्र सतीश को दी। सतीश पहले पिता को जिला अस्पताल लेकर गए और फिर मेडिकल कॉलेज लेकर भागे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुबह सात बजे पति के निधन की जानकारी कुसुम देवी को हुई। पति की मृत्यु का समाचार सुनते ही वे अचेत हो गईं। पहले उन्हें एक निजी अस्पताल और बाद में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। लेकिन, उनकी भी सांसें थम गईं। इसकी जानकारी होने पर पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया। दोनों की अर्थियां एकसाथ उठाई गईं और नंदनपुरा मुक्तिधाम पर एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
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सुख-दुख में हमेशा साथ रहे, साथ ही हुए विदा
झांसी। दंपती के पुत्र रेलवे में कार्यरत सतीश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी माता - पिता को आपस में झगड़ते हुए नहीं देखा। दोनों में बड़ा प्रेम था। हर जगह दोनों साथ ही जाते थे। सतीश ने बताया कि उनके एक भाई की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद जब पिता दुखी होते थे तो उन्हें मां ढांढस बंधाती थीं और मां के दुखी होने के पिता उन्हें समझाते थे। इस आयु में भी वे अपने सभी दैनिक काम खुद किया करते थे। इसके लिए उन्हें किसी की जरूरत नहीं पड़ती थी। कभी सोचा नहीं था कि एक साथ सिर से माता-पिता का साया उठ जाएगा।