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Jhansi: 34 साल बाद बरी हुए 16 आरोपी, तीन की पहले ही हो चुकी है मौत, फैसला सुन आंखों से छलक पड़े आंसू

Tue, 11 Nov 2025 12:18 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Tue, 11 Nov 2025 12:18 PM IST
सार

उम्र ढल गई, बाल सफेद हो गए, तीन आरोपी दुनिया छोड़ गए लेकिन न्याय की चौखट पर हाजिरी लगती रही। मारपीट एवं बलवा के 34 साल पुराने मामले में अदालत ने सभी 16 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। 

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Jhansi: 16 accused acquitted after 34 years, tears welled up in eyes after hearing the verdict
कोर्ट का आदेश

विस्तार

 उम्र ढल गई, बाल सफेद हो गए, तीन आरोपी दुनिया छोड़ गए लेकिन न्याय की चौखट पर हाजिरी लगती रही। मारपीट एवं बलवा के 34 साल पुराने मामले में टहरौली के ग्राम न्यायालय के न्यायाधीश श्रेयांस निगम की अदालत ने सोमवार को सभी 16 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में 28 साल पहले आरोप तय हो चुके थे।
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21 मार्च, 1991 को हुआ था मामला दर्ज
21 मार्च, 1991 को सितौरा गांव निवासी हाकिम सिंह ने टहरौली थाने में 16 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हाकिम सिंह का आरोप था कि उसकी मां के मकान की दीवार पर कूड़ा रखने को लेकर पड़ोस में रहने वाले करन दांगी एवं उसके साथियों ने विवाद किया। विवाद बढ़ने के बाद गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों से मारपीट की गई। उसके पक्ष के कई लोगों को चोट आ गई। हाकिम की तहरीर पर पुलिस ने प्रताप सिंह, रघुवीर सिंह, स्वरूप सिंह, करन सिंह, राजेंद्र सिंह, चरन सिंह, गंगा प्रसाद, भगवान दास उर्फ दाखी, इमरत, रामकुमार, रघुराज, नारायण, शिवदयाल, पूरन सिंह, कुंजी और स्वरूप सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।
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पुलिस ने मामले की विवेचना कर 1991 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने छह साल बाद सभी के खिलाफ आरोप तय कर दिए। इसके बाद से लगातार मामले की सुनवाई चल रही थी। कोर्ट से तारीख पर तारीख मिल रही थी लेकिन कभी वादी की तरह से गवाह पेश नहीं होते तो कभी प्रतिवादी गवाह पेश नहीं कर पाता। इस वजह से मामले की सुनवाई लंबी खिंचती चली गई। मुकदमे की सुनवाई की अवधि में आरोपी शिवदयाल, इमरत सिंह और हीरालाल की मौत हो गई।
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आखिरकार कोर्ट ने इस मामले में निर्णय सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपियों ने किसी साझा उद्देश्य से या साजिशन हमला किया हो। इस आधार पर कोर्ट ने सभी 16 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

विरोधाभासी बयानों के चलते कोर्ट ने खारिज की अभियोजन की दलील
न्यायालय ने अपने निर्णय में अभियोजन पक्ष की कहानी को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष यह तथ्य स्थापित करने में नाकाम रहा कि घटना की शुरुआत किसने की। दोनों पक्षों के बीच परस्पर झगड़ा हुआ। कोर्ट में हाजिर हुए किसी गवाह ने कहा कि पत्थर चले, किसी ने कहा कि लाठी चली जबकि कुछ ने कहा कि वह घटना के समय वहां नहीं थे बल्कि बाद में पहुंचे। इन विरोधाभासी बयानों से अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा हुआ। न्यायालय ने माना कि घटना आकस्मिक झगड़े और भीड़ के उन्माद की वजह से घटी।


दूसरे पक्ष ने कोर्ट के बाहर कर लिया था समझौता
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, प्रतिवादी प्रताप सिंह ने भी टहरौली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी लेकिन इस मामले में दोनों ने कोर्ट के बाहर ही समझौता कर लिया था। हाकिम पक्ष ने भी अपना मुकदमा वापस लेने की बात कही थी लेकिन उन्होंने अपना मुकदमा वापस नहीं लिया। इस वजह से कोर्ट में यह मामला चलता रहा। हाकिम पक्ष की ओर से समझौता तोड़ने की वजह से भी कई गवाह कोर्ट में पेश होने को राजी नहीं हुए।



34 साल बाद बरी होने पर आंखों से छलक पड़े आंसू
इस मामले में टहरौली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। इनमें सबसे अधिक सजा धारा 504 में अधिकतम दो साल की है लेकिन आरोपियों को इस मामले से बरी होने में ही 34 साल लग गए। तीन दशक से ज्यादा समय तक सभी कोर्ट के चक्कर काट रहे थे। उनके परिजनों का कहना है कि जिस समय इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, उस समय सभी की उम्र करीब 35-40 साल थी। अब इनकी उम्र करीब 70 साल हो गई। नियमित अंतराल पर तारीख पर तारीख लगने की वजह से इन्हें कोर्ट आना पड़ता था। प्रताप, रघुवीर, स्वरूप, करन सिंह, राजेंद्र सिंह की उम्र भी करीब 70 साल हो गई है। अब इनका स्वास्थ्य भी खराब रहता है लेकिन कोर्ट में हाजिर होना पड़ता था। 34 साल बाद कोर्ट से बरी होने की बात सुनकर उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे।
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