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Jhansi: नाबालिग को फुसलाकर ले जाने पर 10 साल की जेल, न्यायालय ने दस साल पुराने मामले में फैसला सुनाया
Fri, 14 Nov 2025 02:08 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 14 Nov 2025 02:08 PM IST
सार
नाबालिग को फुसलाकर ले जाने का आरोप सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद नेयाज अंसारी की अदालत ने अभियुक्त को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने 10 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।
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कोर्ट ने सुनाई सजा
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
नाबालिग को फुसलाकर ले जाने का आरोप सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद नेयाज अंसारी की अदालत ने अभियुक्त को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 65 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने 10 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।
एक युवक ने 18 नवंबर 2025 को बरुआसागर थाने में तहरीर दी थी, जिसके जरिये बताया था कि दो दिन पहले दोपहर में उसकी नाबालिग बहन लापता हो गई थी। काफी तलाशने के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसी बीच पता चला कि मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ थाना पृथ्वीपुर ग्राम जलंधर निवासी धर्मेंद्र उर्फ धरमदास कुशवाहा उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। शिकायत पर पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया था। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था।
न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को धारा 363 में सात साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि, धारा 366 में 10 साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि, पॉस्को एक्ट में पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने सभी सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दिया। इसके अलावा अर्थदंड अदा न देने पर दोषी को अलग-अलग धारा में अलग-अलग अवधि में अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगा।
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एक युवक ने 18 नवंबर 2025 को बरुआसागर थाने में तहरीर दी थी, जिसके जरिये बताया था कि दो दिन पहले दोपहर में उसकी नाबालिग बहन लापता हो गई थी। काफी तलाशने के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसी बीच पता चला कि मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ थाना पृथ्वीपुर ग्राम जलंधर निवासी धर्मेंद्र उर्फ धरमदास कुशवाहा उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। शिकायत पर पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया था। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था।
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न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को धारा 363 में सात साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि, धारा 366 में 10 साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि, पॉस्को एक्ट में पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने सभी सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दिया। इसके अलावा अर्थदंड अदा न देने पर दोषी को अलग-अलग धारा में अलग-अलग अवधि में अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगा।
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