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Jhansi News: पिन नंबर शेयर किए बिना जामताड़ा हैकर्स ने 29 बैंक खातों से निकाली रकम
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झांसी। जामताड़ा जैसे सुदूर इलाके में अपने घरों मेें बैठकर शातिर साइबर अपराधी लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। नई तकनीक की मदद से ओटीपी एवं पिन नंबर पूछे बिना जालसाज चंद मिनट में अकाउंट खंगाल लेते हैं। झांसी रेंज की अगर बात करें तो तीन माह के भीतर कुल 29 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें भुक्तभोगियों ने पिन नंबर शेयर नहीं किया लेकिन, जालसाज पूरा बैंक अकाउंट ही खाली कर गए।
सीपरी बाजार निवासी नीलेश कुमार मोटर पार्ट्स विक्रेता हैं। उनका कहना है पिछले महीने उनके मोबाइल पर लिंक आया। कारोबारी की ओर से भेजा लिंक समझकर उन्होंने क्लिक किया। नेट पर एक दूसरा पेज खुल गया। उसके करीब नौ मिनट बाद मेसेज से मालूम चला कि खाते से 72 हजार रुपये निकल गए। चार मिनट बाद फिर से 10 हजार रुपये निकाल लिए गए। जब तक कुछ समझ पाते जालसाज ने खाते से करीब 1.36 लाख रुपये उड़ा दिए। पुलिस की पड़ताल में मालूम चला कि जामताड़ा, नालंदा, बिहार शरीफ जैसे इलाकों में बैठे शातिर बदमाश नई तकनीक की मदद से सिम क्लोन तैयार करते हैं। इसकी मदद से मोबाइल हैक करके पूरे मोबाइल को नियंत्रण में ले लेते हैं। इसके बाद रकम आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के माध्यम से निकाल ली गई। नंदनपुरा निवासी शिवांश रास्तोगी भी सिम क्लोन करके जालसाजी करने वाले बदमाशों के शिकार बनकर 2.18 लाख रुपये गवां चुके। पुलिस आज तक बदमाशों की लोकेशन भी नहीं तलाश सकी। अभी तक सामने आए अन्य मामलों में पुलिस बदमाशों के खिलाफ कुछ नहीं कर सकी है।
सिम स्वाइप करना बना नया हथकंडा
जालसाज अब नई तकनीक सिम स्वाइप का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक जालसाज अकाउंट तक पहुंचने के लिए पहले कई सारे फोन नंबर चिन्हित करते हैं। इसके बाद साफ्टवेयर की मदद से सिम स्वाइप कर लेते हैं। सिम स्वाइप होते ही मोबाइल उनके नियंत्रण में आ जाता है और वह मनमाने तरीके से इसका इस्तेमाल शुरू कर देते हैं।
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जालसाजों से बचने के लिए इनका करें पालन
- अपने सिम को अपडेट करने के लिए समय-समय पर आउटलेट में जाकर केवाईसी कराएं
- किसी भी अनजान कॉल अथवा मेसेज का जवाब न दें
- अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक पर कभी क्लिक न करें
- मोबाइल फोन में अपने बैंक का अधिकृत कस्टमर केयर का नंबर सेव करके रखें। फ्राड होने का पता चलते ही तत्काल कस्टमर केयर को सूचित करके अकाउंट लॉक कराएं
- 1930 पर तत्काल से फोन करके साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें
- मोबाइल पर अपनी संवेदनशील जानकारी सेव करके न रखें
- अनावश्यक किसी वेबसाइट पर न जाएं
- बैंक अकाउंट के लिए एक प्राइवेट मोबाइल नंबर अलग से रखें
साइबर जालसाज नए-नए तरीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। इससे बचने का आसान तरीका यही है कि अनजान लिंक एवं नंबरों पर भरोसा न करें। अगर फ्राड होता है तब बैंक को तत्काल सूचित करने के साथ ही साइबर पुलिस को भी इसकी सूचना दें।
शिव शंकर सिंह
साइबर थाना प्रभारी
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सीपरी बाजार निवासी नीलेश कुमार मोटर पार्ट्स विक्रेता हैं। उनका कहना है पिछले महीने उनके मोबाइल पर लिंक आया। कारोबारी की ओर से भेजा लिंक समझकर उन्होंने क्लिक किया। नेट पर एक दूसरा पेज खुल गया। उसके करीब नौ मिनट बाद मेसेज से मालूम चला कि खाते से 72 हजार रुपये निकल गए। चार मिनट बाद फिर से 10 हजार रुपये निकाल लिए गए। जब तक कुछ समझ पाते जालसाज ने खाते से करीब 1.36 लाख रुपये उड़ा दिए। पुलिस की पड़ताल में मालूम चला कि जामताड़ा, नालंदा, बिहार शरीफ जैसे इलाकों में बैठे शातिर बदमाश नई तकनीक की मदद से सिम क्लोन तैयार करते हैं। इसकी मदद से मोबाइल हैक करके पूरे मोबाइल को नियंत्रण में ले लेते हैं। इसके बाद रकम आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के माध्यम से निकाल ली गई। नंदनपुरा निवासी शिवांश रास्तोगी भी सिम क्लोन करके जालसाजी करने वाले बदमाशों के शिकार बनकर 2.18 लाख रुपये गवां चुके। पुलिस आज तक बदमाशों की लोकेशन भी नहीं तलाश सकी। अभी तक सामने आए अन्य मामलों में पुलिस बदमाशों के खिलाफ कुछ नहीं कर सकी है।
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सिम स्वाइप करना बना नया हथकंडा
जालसाज अब नई तकनीक सिम स्वाइप का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक जालसाज अकाउंट तक पहुंचने के लिए पहले कई सारे फोन नंबर चिन्हित करते हैं। इसके बाद साफ्टवेयर की मदद से सिम स्वाइप कर लेते हैं। सिम स्वाइप होते ही मोबाइल उनके नियंत्रण में आ जाता है और वह मनमाने तरीके से इसका इस्तेमाल शुरू कर देते हैं।
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जालसाजों से बचने के लिए इनका करें पालन
- अपने सिम को अपडेट करने के लिए समय-समय पर आउटलेट में जाकर केवाईसी कराएं
- किसी भी अनजान कॉल अथवा मेसेज का जवाब न दें
- अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक पर कभी क्लिक न करें
- मोबाइल फोन में अपने बैंक का अधिकृत कस्टमर केयर का नंबर सेव करके रखें। फ्राड होने का पता चलते ही तत्काल कस्टमर केयर को सूचित करके अकाउंट लॉक कराएं
- 1930 पर तत्काल से फोन करके साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें
- मोबाइल पर अपनी संवेदनशील जानकारी सेव करके न रखें
- अनावश्यक किसी वेबसाइट पर न जाएं
- बैंक अकाउंट के लिए एक प्राइवेट मोबाइल नंबर अलग से रखें
साइबर जालसाज नए-नए तरीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। इससे बचने का आसान तरीका यही है कि अनजान लिंक एवं नंबरों पर भरोसा न करें। अगर फ्राड होता है तब बैंक को तत्काल सूचित करने के साथ ही साइबर पुलिस को भी इसकी सूचना दें।
शिव शंकर सिंह
साइबर थाना प्रभारी