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जल विहार को आज निकलेंगे देवता
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जल विहार को आज निकलेंगे देवता
झांसी। महानगर में सोमवार को डोल एकादशी धूमधाम से मनायी जाएगी। देर शाम शहर गंधीगर के टपरा से भगवान श्रीकृष्ण एवं विष्णु के अन्य अवतारों के विग्रह भव्य सिंहासनों पर विराजमान होकर जल विहार के लिए निकलेंगे। उनके स्वागत में जगह - जगह युवाओं द्वारा चाचर नृत्य को प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, कई पंडालों में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी जलाशयों में विसर्जित की जाएंगी।
बुंदेलखंड में डोल एकादशी का पर्व धार्मिक उत्साह से मनाया जाता है। कई छोटे - बडे़ कस्बों और नगरों में जल विहार मेलों को आयोजन होता है। मंदिरों में विराजमान भगवान के दिव्य विग्रह जल विहार के लिए निकलते हैं। इनके दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि भाद्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलाशयों में भगवान के जल विहार के बाद बरसात का पानी शुद्ध होने लगता हैं। महानगर में जल विहार आयोजन के अंतर्गत शाम सात बजे से मंदिरों के विमान लक्ष्मी तालाब पर जाने के लिए गंधीगर के टपरा पर एकत्रित होंगे। जल विहार समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल के अनुसार इस बार लगभग 18 मंदिरों के विमान शोभायात्रा में शामिल होंगे। सर्वप्रथम अग्रवाल समाज के मंदिर का विमान रहेगा। विमान शोभायात्रा सराफा बाजार, बड़ा बाजार, लक्ष्मी गेट से होकर लक्ष्मी तालाब पर पहुंचेगी। यहां पूजा अर्चना के बाद भगवान के यह विमान रात में ही मंदिरों के लिए लौट जाएंगे। इस दौरान मोहन लाल चाचर कमेटी, बाबूलाल चौधरी चाचर कमेटी और बड़ा मठ स्वर्णकार समाज की चाचर कमेटी के सदस्य चाचर नृत्य को प्रस्तुत करेंगे।
यह मंदिर होंगे जल विहार शोभायात्रा में शामिल
जल विहार शोभायात्रा में विभिन्न समाजों के मंदिरों के विमान हर साल की तरह इस बार भी शामिल होंगे। इनमें चौधरयाना स्थित महंत का मंदिर, चौरसिया समाज का राम जानकी मंदिर, खटीक समाज का राम जानकी मंदिर, मैथिल समाज का राधा जी का मंदिर, नामदेव समाज का बांके बिहारी जी का मंदिर, झा समाज का राधा कृष्ण का मंदिर, शाक्यवार कोरी समाज का राम जानकी का मंदिर, हयारण समाज का राम जानकी मंदिर, कुशवाहा समाज का राम जानकी मंदिर, डरू भौंडेला स्थित लूला बाबा का मंदिर, अंदर दतिया गेट स्थित श्री बांके बिहारी जी का मंदिर, अंदर सैंयर गेट कुष्टयाना स्थित राम जानकी का मंदिर, गुदरी स्थित श्री राधा कृष्ण का मंदिर, बंगला घाट स्थित राम जानकी का मंदिर आदि है।
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कई नाम है डोल एकादशी के
डोल एकादशी पर्व को डोल ग्यारस भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते है। इसलिए यह परिवर्तनी एकादशी भी कही जाती हैं। इसके अलावा पद्मा एकादशी, जल झूलनी एकादशी भी कहा जाता है। पर्व पर भगवान श्री कृष्ण को जल विहार के लिए ले जाया जाता है।
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झांसी। महानगर में सोमवार को डोल एकादशी धूमधाम से मनायी जाएगी। देर शाम शहर गंधीगर के टपरा से भगवान श्रीकृष्ण एवं विष्णु के अन्य अवतारों के विग्रह भव्य सिंहासनों पर विराजमान होकर जल विहार के लिए निकलेंगे। उनके स्वागत में जगह - जगह युवाओं द्वारा चाचर नृत्य को प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, कई पंडालों में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी जलाशयों में विसर्जित की जाएंगी।
बुंदेलखंड में डोल एकादशी का पर्व धार्मिक उत्साह से मनाया जाता है। कई छोटे - बडे़ कस्बों और नगरों में जल विहार मेलों को आयोजन होता है। मंदिरों में विराजमान भगवान के दिव्य विग्रह जल विहार के लिए निकलते हैं। इनके दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि भाद्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलाशयों में भगवान के जल विहार के बाद बरसात का पानी शुद्ध होने लगता हैं। महानगर में जल विहार आयोजन के अंतर्गत शाम सात बजे से मंदिरों के विमान लक्ष्मी तालाब पर जाने के लिए गंधीगर के टपरा पर एकत्रित होंगे। जल विहार समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल के अनुसार इस बार लगभग 18 मंदिरों के विमान शोभायात्रा में शामिल होंगे। सर्वप्रथम अग्रवाल समाज के मंदिर का विमान रहेगा। विमान शोभायात्रा सराफा बाजार, बड़ा बाजार, लक्ष्मी गेट से होकर लक्ष्मी तालाब पर पहुंचेगी। यहां पूजा अर्चना के बाद भगवान के यह विमान रात में ही मंदिरों के लिए लौट जाएंगे। इस दौरान मोहन लाल चाचर कमेटी, बाबूलाल चौधरी चाचर कमेटी और बड़ा मठ स्वर्णकार समाज की चाचर कमेटी के सदस्य चाचर नृत्य को प्रस्तुत करेंगे।
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यह मंदिर होंगे जल विहार शोभायात्रा में शामिल
जल विहार शोभायात्रा में विभिन्न समाजों के मंदिरों के विमान हर साल की तरह इस बार भी शामिल होंगे। इनमें चौधरयाना स्थित महंत का मंदिर, चौरसिया समाज का राम जानकी मंदिर, खटीक समाज का राम जानकी मंदिर, मैथिल समाज का राधा जी का मंदिर, नामदेव समाज का बांके बिहारी जी का मंदिर, झा समाज का राधा कृष्ण का मंदिर, शाक्यवार कोरी समाज का राम जानकी का मंदिर, हयारण समाज का राम जानकी मंदिर, कुशवाहा समाज का राम जानकी मंदिर, डरू भौंडेला स्थित लूला बाबा का मंदिर, अंदर दतिया गेट स्थित श्री बांके बिहारी जी का मंदिर, अंदर सैंयर गेट कुष्टयाना स्थित राम जानकी का मंदिर, गुदरी स्थित श्री राधा कृष्ण का मंदिर, बंगला घाट स्थित राम जानकी का मंदिर आदि है।
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कई नाम है डोल एकादशी के
डोल एकादशी पर्व को डोल ग्यारस भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते है। इसलिए यह परिवर्तनी एकादशी भी कही जाती हैं। इसके अलावा पद्मा एकादशी, जल झूलनी एकादशी भी कहा जाता है। पर्व पर भगवान श्री कृष्ण को जल विहार के लिए ले जाया जाता है।