{"_id":"5e139fe98ebc3e879f4a9b4e","slug":"jain-samj-confrence-jhansi-news-jhs1568591181","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कारों से मुस्कुराती है जिंदगी: विशुद्ध सागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कारों से मुस्कुराती है जिंदगी: विशुद्ध सागर
विज्ञापन
जैन तीर्थ स्थल करगुर्वा जी में हुई सर्वधर्म सभा में भाग लेते विभिन्न धर्मों के लोग के लोग।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। जैन तीर्थ करगुवांजी में सोमवार को आचार्य विशुद्घ सागर महाराज के सानिध्य में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार को लेकर चर्चा की गई। आचार्य विशुद्घ सागर महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को संस्कार और संस्कृति के महत्व ने परिचित कराया। साथ ही, वक्ताओं ने भी बच्चों को संस्कारों का बोध कराने के लिए प्रेरित किया।
सोमवार सुबह भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, पूजन के उपरांत सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर आचार्य विशुद्घ सागर महाराज ने कहा कि धर्म एक होता है, लेकिन लोगों ने धर्म में भेद कर दिया है। संस्कृति और संस्कार को स्वभाव में लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधर्म टिक नहीं सकता और धर्म का नाश नहीं होता। आचार्यश्री ने कहा कि सुसंस्कारों से संस्कृति मुस्कुराती है। इसलिए संस्कारों को अपनाकर संस्कृति को आगे बढ़ाएं। संस्कार डाले जाते हैं, संस्कृति होती है और धर्म उसका गुण है।
इस मौके पर आचार्यश्री ने श्रावक-श्राविकाओं को बच्चों को संस्कार देने का संकल्प दिलाया। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, विधायक सदर रवि शर्मा, विधायक बबीना राजीव सिंह पारीछा, भाजपा महानगर अध्यक्ष मुकेश मिश्रा और बुंदेलखंड विकास बोर्ड के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, पद्मश्री कैलाश मड़वैया, महापौर रामतीर्थ सिंघल ने दीप प्रज्ज्वलन किया। इस मौके पर श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट किया। कार्यक्रम में रंगोली बनाने वाली रिचा, प्रज्ञा, युक्ति, सिंकी और मीना को सम्मानित किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, महामंत्री प्रवीण जैन, अतुल जैन बंटी, दिनेश जैन डीके, प्रदीप जैन सरावगी, अरविंद वशिष्ठ, सुभाष चंद्र जैन, कमल जैन, सिंघई मनोज जैन, रिषभ जैन, गौरव जैन, कल्पना जैन, मनीषा जैन, सरिता जैन, सुनीता जैन, डॉ. नीलम जैन, शशि जैन, राशि जैन मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद आचार्यश्री का मंगल विहार चिरगांव की ओर हो गया।
विज्ञापन
-----------------
श्रद्घालुओं का कहना है
संस्कारों और संस्कृति के बारे में जो सीख मिली है, उसे जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। - प्रतिभा जैन
----------
बच्चों को संस्कार देने के लिए पहल करेंगे। हमारी संस्कृति से आने वाली पीढ़ी परिचित हो सके।- संगीता जैन
----------
वर्तमान दौर में संस्कारों से बच्चे अनजान हैं। इसके लिए पहल करेंगे। बच्चों को संस्कार बोध कराएंगे।- दीप्ति जैन
----------
संस्कारित समाज से देश का विकास होता है। संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए संस्कारों को अपनाएंगे।- प्रज्ञा जैन
-----------
जीवन को सही दिशा देने के लिए संस्कारों का बोध बेहद आवश्यक है। सबको इसे जीवन में अपनाना चाहिए।- आभा जैन
-----------
आचार्यश्री के मंगल प्रवास के दौरान धर्म का काफी ज्ञान मिला। जैन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए पहल करेंगे।- सिंकी जैन
-----------
संस्कारोें और संस्कृति के विषय में आचार्यश्री द्वारा दिया गया ज्ञान जीवन को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा।- अनूप जैन
-----------
गोष्ठी में संस्कार का विषय चुना गया। इस पर आचार्यश्री द्वारा दिए गए प्रवचनों से काफी कुछ सीखने को मिला।- वरुण जैन
---------
जैन धर्म में संस्कारों का बोध पाठशाला में कराया जाता है। इसका परिणाम है कि आज धर्म की पताका पूरे देश में लहरा रही है।- सिंघई संजय जैन
------------
आचार्यश्री के प्रवचनों को जीवन में अपनाने का प्रयास करेंगे। संस्कारों को जीवन में उतारकर संस्कृति को मजबूत करेंगे।- शिरोमणि जैन, एडवोकेट
---------
संस्कारों का प्रभाव बहुत होता है। संस्कार मनुष्य को सम्मान दिलाते हैं। आचार्यश्री की बातों को मन में उतारेंगे।- सचिन जैन, भिंड
------------
आचार्यश्री का झांसी में प्रवास के दौरान काफी कुछ सीखने को मिला। जैन संतों ने जैन धर्म का गौरव बढ़ाया है।- सनी जैन
विज्ञापन
सोमवार सुबह भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, पूजन के उपरांत सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर आचार्य विशुद्घ सागर महाराज ने कहा कि धर्म एक होता है, लेकिन लोगों ने धर्म में भेद कर दिया है। संस्कृति और संस्कार को स्वभाव में लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधर्म टिक नहीं सकता और धर्म का नाश नहीं होता। आचार्यश्री ने कहा कि सुसंस्कारों से संस्कृति मुस्कुराती है। इसलिए संस्कारों को अपनाकर संस्कृति को आगे बढ़ाएं। संस्कार डाले जाते हैं, संस्कृति होती है और धर्म उसका गुण है।
विज्ञापन
इस मौके पर आचार्यश्री ने श्रावक-श्राविकाओं को बच्चों को संस्कार देने का संकल्प दिलाया। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, विधायक सदर रवि शर्मा, विधायक बबीना राजीव सिंह पारीछा, भाजपा महानगर अध्यक्ष मुकेश मिश्रा और बुंदेलखंड विकास बोर्ड के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, पद्मश्री कैलाश मड़वैया, महापौर रामतीर्थ सिंघल ने दीप प्रज्ज्वलन किया। इस मौके पर श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट किया। कार्यक्रम में रंगोली बनाने वाली रिचा, प्रज्ञा, युक्ति, सिंकी और मीना को सम्मानित किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, महामंत्री प्रवीण जैन, अतुल जैन बंटी, दिनेश जैन डीके, प्रदीप जैन सरावगी, अरविंद वशिष्ठ, सुभाष चंद्र जैन, कमल जैन, सिंघई मनोज जैन, रिषभ जैन, गौरव जैन, कल्पना जैन, मनीषा जैन, सरिता जैन, सुनीता जैन, डॉ. नीलम जैन, शशि जैन, राशि जैन मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद आचार्यश्री का मंगल विहार चिरगांव की ओर हो गया।
विज्ञापन
-----------------
श्रद्घालुओं का कहना है
संस्कारों और संस्कृति के बारे में जो सीख मिली है, उसे जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे। - प्रतिभा जैन
----------
बच्चों को संस्कार देने के लिए पहल करेंगे। हमारी संस्कृति से आने वाली पीढ़ी परिचित हो सके।- संगीता जैन
----------
वर्तमान दौर में संस्कारों से बच्चे अनजान हैं। इसके लिए पहल करेंगे। बच्चों को संस्कार बोध कराएंगे।- दीप्ति जैन
----------
संस्कारित समाज से देश का विकास होता है। संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए संस्कारों को अपनाएंगे।- प्रज्ञा जैन
-----------
जीवन को सही दिशा देने के लिए संस्कारों का बोध बेहद आवश्यक है। सबको इसे जीवन में अपनाना चाहिए।- आभा जैन
-----------
आचार्यश्री के मंगल प्रवास के दौरान धर्म का काफी ज्ञान मिला। जैन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए पहल करेंगे।- सिंकी जैन
-----------
संस्कारोें और संस्कृति के विषय में आचार्यश्री द्वारा दिया गया ज्ञान जीवन को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा।- अनूप जैन
-----------
गोष्ठी में संस्कार का विषय चुना गया। इस पर आचार्यश्री द्वारा दिए गए प्रवचनों से काफी कुछ सीखने को मिला।- वरुण जैन
---------
जैन धर्म में संस्कारों का बोध पाठशाला में कराया जाता है। इसका परिणाम है कि आज धर्म की पताका पूरे देश में लहरा रही है।- सिंघई संजय जैन
------------
आचार्यश्री के प्रवचनों को जीवन में अपनाने का प्रयास करेंगे। संस्कारों को जीवन में उतारकर संस्कृति को मजबूत करेंगे।- शिरोमणि जैन, एडवोकेट
---------
संस्कारों का प्रभाव बहुत होता है। संस्कार मनुष्य को सम्मान दिलाते हैं। आचार्यश्री की बातों को मन में उतारेंगे।- सचिन जैन, भिंड
------------
आचार्यश्री का झांसी में प्रवास के दौरान काफी कुछ सीखने को मिला। जैन संतों ने जैन धर्म का गौरव बढ़ाया है।- सनी जैन