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जेल के अंधेरे में ‘रोशनी’ लाएंगी किताबें
Sat, 13 Apr 2019 01:39 AM IST
देवेंद्र कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 13 Apr 2019 01:39 AM IST
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जेेल के अंदर कैदियों के लिए किताबें प्रेरणा का स्त्रोत बनेंगी। जेल में भगत सिंह, महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर, चेतन भगत आदि की किताबें कैदियों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करेंगी। ऐसे तमाम महान लेखकों के विचारों को पढ़कर वे न सिर्फ अपने व्यक्तित्व को सुधार सकेंगे बल्कि सजा पूरी होने पर समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे। जेल प्रशासन की तरफ से कैदियों को 1,130 किताबेें उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें करीब 437 धार्मिक किताबें भी हैं।
वर्तमान में जेल मेें 1,250 कैदी हैं। बंदियों की सोच बदलकर उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए जेल प्रशासन ने किताबों की दुनिया बसाई है। महीने भर तक बंदियों के बीच रहकर जेल प्रशासन ने पहले बंदियों की धार्मिक सोच को समझा। उसके बाद उनकी सोच के हिसाब से धार्मिक व अन्य पाठ्य पुस्तकों की व्यवस्था कारागार में बनाई गई पुस्तकालय में ही करा दी। जेल के एक हिस्से में ही सभी सुविधाओं से लैस लाइब्रेरी की व्यवस्था है, जहां 1,130 किताबों की व्यवस्था कराई गई है। जिस बंदी को जो पुस्तक पढ़नी है, उसे लाइब्रेरी से उपलब्ध करा दी जाती है। बंदियों की शंका समाधान के लिए लाइब्रेरी में कर्मचारी भी तैनात रहता है। जो समय- समय पर बंदियों को भगवत गीता का ज्ञान देने के साथ उन्हें पैगंबर का संदेश भी पढ़कर सुना रहे हैं।
ऐसे मिलती किताबें
जेल में पुस्तकालय का समय निर्धारित किया गया है। पुस्तकालय सुबह 8 से 10 बजे और शाम 4 से 5 बजे तक खुलता है। किताबें एक कैदी को आठ दिन के लिए मिलती हैं। इसके लिए बाकायदा रजिस्टर बनाया गया है, जिसमें कैदी का नाम, किताब का नाम व ले जाने की तिथि व जमा करने की तिथि अंकित करनी होती है।
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यह किताबें मिलेंगी
जेल की लाइब्रेरी में धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक समेत भगत सिंह, महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर, जवाहर लाल नेहरू, स्वामी विवेकानंद, चेतन भगत, मनु भंडारी, प्रेमचंद, कालीदास, महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, भारतेंद्र हरिश्चंद्र, जय शंकर प्रसाद के साथ - साथ उर्दू के अमीर खुसरो, मिर्जा गालिब, कैफी आजमी, निदा फाजली समेत दर्जनों लेखकों की पुस्तकें हैं।
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बंदियों की सोच बदलने के लिए जेल में लाइब्रेरी बनवाई गई है। सभी प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। इसमें गायत्री परिवार से भी मदद मिली है। कई एनजीओ और कई समाजसेवी भी पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए आने लगे हैं। हमारा मुख्य प्रयास कैदियों को अपराध की दुनिया से दूर ले जाकर धर्म और आपसी भाईचारे का विकास करना है।
राजीव शुक्ल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
अपराध के बाद अपराधी जेल में तनाव का जीवन गुजारते हैं। इस कारण वे मानसिक चिंता से घिरे होते हैं। मानसिक आघात से उन्हें उबारने में ये धार्मिक व साहित्यिक पुस्तकें मददगार साबित होंगी। ये धार्मिक पुस्तकें पढ़कर बंदी रचनात्मक कार्यों के प्रति प्रेरित होंगे। उनकी तरफ से जल्द ही करीब सौ अलग अलग किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।
मोहम्मद आबिद खान, मजिस्ट्रेट/सदस्य बाल कल्याण समिति
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वर्तमान में जेल मेें 1,250 कैदी हैं। बंदियों की सोच बदलकर उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए जेल प्रशासन ने किताबों की दुनिया बसाई है। महीने भर तक बंदियों के बीच रहकर जेल प्रशासन ने पहले बंदियों की धार्मिक सोच को समझा। उसके बाद उनकी सोच के हिसाब से धार्मिक व अन्य पाठ्य पुस्तकों की व्यवस्था कारागार में बनाई गई पुस्तकालय में ही करा दी। जेल के एक हिस्से में ही सभी सुविधाओं से लैस लाइब्रेरी की व्यवस्था है, जहां 1,130 किताबों की व्यवस्था कराई गई है। जिस बंदी को जो पुस्तक पढ़नी है, उसे लाइब्रेरी से उपलब्ध करा दी जाती है। बंदियों की शंका समाधान के लिए लाइब्रेरी में कर्मचारी भी तैनात रहता है। जो समय- समय पर बंदियों को भगवत गीता का ज्ञान देने के साथ उन्हें पैगंबर का संदेश भी पढ़कर सुना रहे हैं।
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ऐसे मिलती किताबें
जेल में पुस्तकालय का समय निर्धारित किया गया है। पुस्तकालय सुबह 8 से 10 बजे और शाम 4 से 5 बजे तक खुलता है। किताबें एक कैदी को आठ दिन के लिए मिलती हैं। इसके लिए बाकायदा रजिस्टर बनाया गया है, जिसमें कैदी का नाम, किताब का नाम व ले जाने की तिथि व जमा करने की तिथि अंकित करनी होती है।
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यह किताबें मिलेंगी
जेल की लाइब्रेरी में धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक समेत भगत सिंह, महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर, जवाहर लाल नेहरू, स्वामी विवेकानंद, चेतन भगत, मनु भंडारी, प्रेमचंद, कालीदास, महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, भारतेंद्र हरिश्चंद्र, जय शंकर प्रसाद के साथ - साथ उर्दू के अमीर खुसरो, मिर्जा गालिब, कैफी आजमी, निदा फाजली समेत दर्जनों लेखकों की पुस्तकें हैं।
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बंदियों की सोच बदलने के लिए जेल में लाइब्रेरी बनवाई गई है। सभी प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। इसमें गायत्री परिवार से भी मदद मिली है। कई एनजीओ और कई समाजसेवी भी पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए आने लगे हैं। हमारा मुख्य प्रयास कैदियों को अपराध की दुनिया से दूर ले जाकर धर्म और आपसी भाईचारे का विकास करना है।
राजीव शुक्ल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
अपराध के बाद अपराधी जेल में तनाव का जीवन गुजारते हैं। इस कारण वे मानसिक चिंता से घिरे होते हैं। मानसिक आघात से उन्हें उबारने में ये धार्मिक व साहित्यिक पुस्तकें मददगार साबित होंगी। ये धार्मिक पुस्तकें पढ़कर बंदी रचनात्मक कार्यों के प्रति प्रेरित होंगे। उनकी तरफ से जल्द ही करीब सौ अलग अलग किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी।
मोहम्मद आबिद खान, मजिस्ट्रेट/सदस्य बाल कल्याण समिति