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सॉफ्टवेयर में ही बंद अंतर्राष्ट्रीय भाषा लैब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:45 AM IST
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- फोटो : demo
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय भाषा लैब सॉफ्टवेयर में ही बंद पड़ी है। फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश और अंग्रेजी सीखने के लिए वर्ष 2014 में तत्कालीन कुलपति ने इसके सॉफ्टवेयर को 34 कंप्यूटरों में अपलोड करवाया था, लेकिन अटेंडेंट और एक्सपर्ट न होने से अब तक इसका लाभ छात्र नहीं उठा पा रहे हैं।
पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भाषा लैब खोली थी। लंदन की एक कंपनी से आठ लाख रुपये खर्च कर इसके लिए सॉफ्टवेयर खरीदा गया था। सॉफ्टवेयर को यूटिलिटी बिल्डिंग में स्थित कंप्यूटर लैब में अपलोड किया गया। लैब खोलने का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चल रहे होटल मैनेजमेंट, एमबीए, फॉरेंसिक साइंस समेत विभिन्न व्यावसायिक कोर्सों के छात्र-छात्राओं को बोल चाल में विशेषज्ञता हासिल कराना था। अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश में ही महारत के लिए सॉफ्टवेयर में बेसिक, धाराप्रवाह, आत्मविश्वास, नियंत्रण स्तरों में ट्रेनिंग दी जानी थी। इसके लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया गया। कुछ समय लैब में क्लासेस शुरू भी की गईं लेकिन बाद में यह बंद हो गई। अब इस दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। कुलसचिव वीएन सिंह का कहना है कि यह मामला संज्ञान में नहीं है। लैब के बारे में पता करवाया जाएगा।
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पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भाषा लैब खोली थी। लंदन की एक कंपनी से आठ लाख रुपये खर्च कर इसके लिए सॉफ्टवेयर खरीदा गया था। सॉफ्टवेयर को यूटिलिटी बिल्डिंग में स्थित कंप्यूटर लैब में अपलोड किया गया। लैब खोलने का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चल रहे होटल मैनेजमेंट, एमबीए, फॉरेंसिक साइंस समेत विभिन्न व्यावसायिक कोर्सों के छात्र-छात्राओं को बोल चाल में विशेषज्ञता हासिल कराना था। अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश में ही महारत के लिए सॉफ्टवेयर में बेसिक, धाराप्रवाह, आत्मविश्वास, नियंत्रण स्तरों में ट्रेनिंग दी जानी थी। इसके लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया गया। कुछ समय लैब में क्लासेस शुरू भी की गईं लेकिन बाद में यह बंद हो गई। अब इस दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। कुलसचिव वीएन सिंह का कहना है कि यह मामला संज्ञान में नहीं है। लैब के बारे में पता करवाया जाएगा।
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