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घर बैठे मिलेगी मजदूरी की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2016 12:59 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को अपनी मजदूरी मिलने की जानकारी अब घर बैठे हो जाएगी। इसके लिए उन्हें बैंक तक नहीं भागना पड़ेगा। सरकार ने उनके लिए एनई-एसएमएस योजना प्रारंभ की है। एक अप्रैल से शुरू होने वाली यह योजना मजदूरों के भुगतान में पारदर्शिता का काम करेगी।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश में जुटे अधिकारी भुगतान करते समय कोई न कोई गड़बड़ी कर देते हैं। इससे कभी मजदूर के खाते में रुपये नहीं पहुंचते, तो कभी किसी का पैसा किसी और के खाते में पहुंच जाता है। कभी कम रुपये आते हैं तो कभी अधिक रुपये पहुंच जाते हैं। इन सबका खामियाजा उस मजदूर को उठाना पड़ता है, जिसे रुपयों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
मनरेगा उपायुक्त विकास कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर मनरेगा के तहत होने वाले भुगतान का तरीका बदल दिया गया है। अभी तक तो खामियां भुगतान में होती थीं, उन्हें दूर कर अब अत्याधुनिक तरीके से ई-पेमेंट के जरिए भुगतान किया जाएगा। इससे गलत ट्रांजेक्शन, खातों की गड़बड़ी और मेहनताना कम अथवा अधिक आने की शिकायतों पर अंकुश लगेगा।
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उन्होंने बताया कि अब किसानों/ मजदूरों के खातों में सीधे पैसा पहुंचेगा और इसका एसएमएस उनके मोबाइल नंबर पर आएगा। इस सेवा को एनई-एसएमएस का नाम दिया गया है। इस नाम से आने वाले मैसेज में मजदूर के भुगतान संबंधी सभी जानकारी होगी। इसके लिए बैंकों में प्रक्रिया जारी है। इसे एक अप्रैल से इसे लागू कर दिया जाएगा।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश में जुटे अधिकारी भुगतान करते समय कोई न कोई गड़बड़ी कर देते हैं। इससे कभी मजदूर के खाते में रुपये नहीं पहुंचते, तो कभी किसी का पैसा किसी और के खाते में पहुंच जाता है। कभी कम रुपये आते हैं तो कभी अधिक रुपये पहुंच जाते हैं। इन सबका खामियाजा उस मजदूर को उठाना पड़ता है, जिसे रुपयों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
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मनरेगा उपायुक्त विकास कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर मनरेगा के तहत होने वाले भुगतान का तरीका बदल दिया गया है। अभी तक तो खामियां भुगतान में होती थीं, उन्हें दूर कर अब अत्याधुनिक तरीके से ई-पेमेंट के जरिए भुगतान किया जाएगा। इससे गलत ट्रांजेक्शन, खातों की गड़बड़ी और मेहनताना कम अथवा अधिक आने की शिकायतों पर अंकुश लगेगा।
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उन्होंने बताया कि अब किसानों/ मजदूरों के खातों में सीधे पैसा पहुंचेगा और इसका एसएमएस उनके मोबाइल नंबर पर आएगा। इस सेवा को एनई-एसएमएस का नाम दिया गया है। इस नाम से आने वाले मैसेज में मजदूर के भुगतान संबंधी सभी जानकारी होगी। इसके लिए बैंकों में प्रक्रिया जारी है। इसे एक अप्रैल से इसे लागू कर दिया जाएगा।