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इंदौर अग्निकांड: शुभम के बदले की आग में झांसी का आशीष भी चढ़ भेंट, कड़ा और अंगूठी से पहचाना में आया शव

Mon, 09 May 2022 08:47 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 09 May 2022 08:47 PM IST
सार

जांच-पड़ताल में मालूम चला इनमें एक युवक आशीष राठौर (28) पुत्र विनोद झांसी में पुलिया नंबर नौ के पास का रहने वाला था। हादसे की सूचना उसके परिजनों को शनिवार दोपहर लगी। बदहवास हाल में पिता विनोद एवं मां कल्पना तुरंत इंदौर रवाना हो गए। 

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indore fire ashish of Jhansi also died due to the fire set by shubham
मृतक आशीष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर में इमारत में आग लगाकर सात लोगों की जिंदगी लील जाने वाले शुभम के बदले की आग में झांसी का एक युवक आशीष भी भेंट चढ़ गया। इस दर्दनाक हादसे की चपेट में आने के बाद बड़ी मुश्किल से उसके शव की शिनाख्त हो सकी। परिजनों ने उसके हाथ में पहने कड़े एवं अंगूठी से शिनाख्त की। शव को झांसी लाना संभव न होने से मजबूरी में इंदौर में अंतिम संस्कार कर देना पड़ा।

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इकतरफा प्यार में पागल झांसी के खातीबाबा निवासी शुभम दीक्षित ने शुक्रवार देर रात इंदौर के विजय नगर थाना के स्वर्ण बाग कॉलोनी के पार्किंग एरिया में खड़ी एक लड़की की स्कूटी में आग लगा दी थी। इस आग ने थोड़ी देर में पूरी कॉलोनी को चपेट में लिया। इसमें सात लोगों की जलकर मौत हो गई। 
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जांच-पड़ताल में मालूम चला इनमें एक युवक आशीष राठौर (28) पुत्र विनोद झांसी में पुलिया नंबर नौ के पास का रहने वाला था। हादसे की सूचना उसके परिजनों को शनिवार दोपहर लगी। बदहवास हाल में पिता विनोद एवं मां कल्पना तुरंत इंदौर रवाना हो गए। वहां जाकर उन्होंने आशीष की तलाश की लेकिन, उसका पता नहीं चला। अस्पताल पहुंचने पर उनको मृत लोगों की वस्तुएं दिखाई गईं। इनमें कड़ा, अंगूठी समेत अन्य वस्तुएं देखकर आशीष के पिता ने उसके शव की शिनाख्त की। अंतिम संस्कार भी उसका वहीं कर दिया गया।
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हादसे की सूचना मिलते ही आशीष के मां-बाप बदहवास हो उठे। तुरंत वह लोग इंदौर पहुंचे लेकिन, अपने जवान बेटे का मुंह नहीं देख सके। उसके सिर पर सेहरा देखने की तमन्ना बांधे मां-बाप को एक सिरफिरे की करतूत की वजह से उसके नाममात्र बचे शरीर का अंतिम संस्कार करके वापस लौट आना पड़ा। पूरे रास्ते आशीष को याद करते हुए मां कल्पना बिलखती रहीं। पिता किसी तरह चुप कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन, उनके आंखें भी डबडबाई थीं।

सोमवार को इंदौर से वापस लौटने के बाद उन्होंने बताया कि आशीष झांसी में उनके साथ आरओ वाटर प्लांट के काम में हाथ बंटता था लेकिन, पिछले कुछ महीने से वह अपना काम शुरू करने की धुन में था। फरवरी माह में ही वह इंदौर चला गया। यहां उसने शेयर ट्रेडिंग टर्मिनल शुरू किया था। पिता का कहना है आशीष पढ़ने-लिखने में जहीन था। उधर, नाते-रिश्तेदारों तक जैसे ही यहखबर पहुंची उनका भी जमावड़ा लगना शुरू हो गया। घर में आशीष से छोटे दो ओम और वसु हैं।

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