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समय पर हो मिर्गी का इलाज तो रोगी जी सकता है सामान्य जीवन
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर बुंदेलखंड न्यूरोलॉजी फाउंडेशन, एनएमओ, आईएपी की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान न्यूरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद कनकने ने कहा कि मिर्गी एक मस्तिष्क रोग है। अज्ञानता एवं सामाजिक रूढ़िवादिता की वजह से कई भ्रांतियां इस बीमारी से जुड़ी होने से लोग समय से समुचित इलाज नहीं लेते हैं। कई बार इसे दैवीय प्रकोप एवं अंधविश्वास के कारण इलाज न लेने से बीमारी लाइलाज हो जाती है। जबकि, इसे रोग की तरह समझकर इसका सही इलाज लेने से रोगी अपना जीवन सामान्य तरीके से व्यतीत कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न अनुसंधानों के आधार पर भारत में सौ में से एक व्यक्ति को मिर्गी की बीमारी है। इस हिसाब से लगभग चार करोड़ देश में इस बीमारी से ग्रसित हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि मिर्गी दो प्रकार की होती है, आंशिक और पूर्ण मिर्गी। आंशिक मिर्गी में मस्तिष्क का एक भाग ज्यादा प्रभावित होता है, जबकि पूर्ण मिर्गी में विद्युत तरंगें मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को प्रभावित करती है। इसमें रोगी अपनी चेतना खो देता है। शरीर में अत्यधिक तनाव होता है, मुंह से झाग निकल आता है। मल, पेशाब भी निकल सकता है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि नवजात शिशु में पैदा होते ही रोना जरूरी होता है। यदि बच्चा एक मिनट से ज्यादा देर से रोता है तो 80 प्रतिशत नवजात शिशु में दौरे आने की संभावना रहती है। इसके अलावा छह माह से पांच साल तक के बच्चों में बुखार के दौरे आते हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें। बुखार आते ही तुरंत उतारना जरूरी होता है। कभी भी बच्चे को चलती मशीन, पानी या छत पर अकेले न छोड़ें। वीडियो गेम, टीवी ज्यादा न दिखाएं। इलाज पूरा कराए, बीच में न छोड़ें। सभी चिकित्सकों ने जोर दिया कि मिर्गी रोग का सही समय में इलाज कराया जाए तो व्यक्ति अपने सभी कार्य, पढ़ाई, नौकरी, शादी तथा सभी कार्यक्षेत्र में सफलतापूर्वक सामान्य जीवन जी सकता है। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन, एमआरआई और ईसीजी व अन्य जांचें नियमानुसार उपलब्ध हैं। जल्दी ही लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू किया जाएगा। इस दौरान डॉ. पारस गुप्ता, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. आराधना कनकने, डॉ. अनुज सेठी, डॉ. हरिशचंद्र आर्या, प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ. सुनील पांडेय, डॉ. क्षितिज नाथ, डॉ. राजकुमार वर्मा मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि विभिन्न अनुसंधानों के आधार पर भारत में सौ में से एक व्यक्ति को मिर्गी की बीमारी है। इस हिसाब से लगभग चार करोड़ देश में इस बीमारी से ग्रसित हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि मिर्गी दो प्रकार की होती है, आंशिक और पूर्ण मिर्गी। आंशिक मिर्गी में मस्तिष्क का एक भाग ज्यादा प्रभावित होता है, जबकि पूर्ण मिर्गी में विद्युत तरंगें मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को प्रभावित करती है। इसमें रोगी अपनी चेतना खो देता है। शरीर में अत्यधिक तनाव होता है, मुंह से झाग निकल आता है। मल, पेशाब भी निकल सकता है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि नवजात शिशु में पैदा होते ही रोना जरूरी होता है। यदि बच्चा एक मिनट से ज्यादा देर से रोता है तो 80 प्रतिशत नवजात शिशु में दौरे आने की संभावना रहती है। इसके अलावा छह माह से पांच साल तक के बच्चों में बुखार के दौरे आते हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें। बुखार आते ही तुरंत उतारना जरूरी होता है। कभी भी बच्चे को चलती मशीन, पानी या छत पर अकेले न छोड़ें। वीडियो गेम, टीवी ज्यादा न दिखाएं। इलाज पूरा कराए, बीच में न छोड़ें। सभी चिकित्सकों ने जोर दिया कि मिर्गी रोग का सही समय में इलाज कराया जाए तो व्यक्ति अपने सभी कार्य, पढ़ाई, नौकरी, शादी तथा सभी कार्यक्षेत्र में सफलतापूर्वक सामान्य जीवन जी सकता है। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन, एमआरआई और ईसीजी व अन्य जांचें नियमानुसार उपलब्ध हैं। जल्दी ही लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू किया जाएगा। इस दौरान डॉ. पारस गुप्ता, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. आराधना कनकने, डॉ. अनुज सेठी, डॉ. हरिशचंद्र आर्या, प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ. सुनील पांडेय, डॉ. क्षितिज नाथ, डॉ. राजकुमार वर्मा मौजूद रहे।
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