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इधर चोरी, उधर एफआर, वाह री पुलिस

Mon, 01 Mar 2021 02:19 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 02:19 AM IST
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idhar chori, udhar FR, waah ree police
झांसी। वाहन चोरी की घटनाओं में पुलिस सबसे तेज एफआर लगाती है। घटना के बाद पीड़ित मुकदमा दर्ज कराने और एफआर लगवाने के लिए जनप्रतिनिधियों व अफसरों से सिफारिशें लगवाते हैं। एक साल में 91 वाहन चोरी की घटनाओं में 64 मामलों में पुलिस ने एक माह के भीतर एफआर लगा दी है। आश्चर्य की बात यह है कि इन मामलों में पुलिस पुलिस की नाकामी से पीड़ित को दुख नहीं बल्कि खुशी होती है। वाहन चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के बाद पीड़ित क्लेम की धनराशि पाने के बाद पैरवी में दिलचस्पी नहीं दिखाते।
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जिले में वाहन चोरों के कई गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस ने कई गैंग पकड़ने के बाद जेल भेजे। बावजूद, इसके वारदातें थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। बीते एक साल में 91 वाहन चोरी हो चुके हैं। पुलिस एक माह के भीतर ही 64 मामलों में एफआर लगा चुकी है। बकाया मामलों में पुलिस की विवेचना जारी है। चोर पुलिस की सुरक्षा वाले स्थान जिला अस्पताल, बस स्टैंड, बैंक के बाहर व अन्य स्थानों पर भी आसानी से वारदात को अंजाम दे गए। बात खुलासे की करें तो पुलिस के हाथ अधिकतर मामलों में खाली हैं। इसकी एक वजह वाहन स्वामी की ओर से पैरवी न किए जाना भी है।
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वाहन चोरी में पहले मुकदमा दर्ज कराने को थाने का चक्कर फिर अगले ही दिन से मुकदमे की फाइल बंद करने के लिए पीड़ित अपना जुगाड़ लगाना शुरू कर देता है। यह इसीलिए होता है कि पीड़ित को भी पता है कि पुलिस उसकी गाड़ी तलाश नहीं पाएगी पर वह अपनी इस नाकामी को जितनी जल्दी कागजों में साबित करेगी उसके इंश्योरेंस की फाइल की रफ्तार भी उतनी ही जल्दी आगे बढ़ेगी। इससे उसे समय पर रकम मिलेगी और वह नई बाइक खरीद सकेगा।
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90 दिन में पुलिस को लगानी होती है चार्जशीट या एफआर
दर्ज मुकदमों में चार्जशीट लगाने के लिए 90 दिन का समय होता है। यानी इन 90 दिन के अंदर चार्जशीट या फिर फाइनल रिपोर्ट लगानी होती है। बाइक चोरी होने के बाद मिलना आसान नहीं होता है, लेकिन जब तक पुलिस की तलाश जारी रहती है तब तक इंश्योरेंस कंपनी पैसा नहीं देती है। एफआर लगने के बाद यह माना जाता है कि गाड़ी अब नहीं मिल पाएगी जिससे इंश्योरेंस की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यही वजह है कि पीड़ित चाहता है कि पुलिस 90 दिन का समय काटने की जगह कम से कम समय में एफआर लगा दे।
सीसीटीवी फुटेज तक देखती पुलिस
वाहन चोरी की घटनाओं में अमूमन पीड़ित ही सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराते हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगालती तक नहीं है। कई बार आरोपी सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुए, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ घटनाओं में खाली हैं। समय बीतने के साथ ही पुलिस इन मामलों को भी भूलती जा रही है।
नंबर 1
रेलकर्मी रवि चौबे दिसंबर माह में अपनी बाइक सीनियर इंस्टीट्यूट के बाहर खड़ी कर अंदर चले गए थेे। वापस लौटने पर उनकी बाइक गायब थी। आज तक उनकी बाइक नहीं मिल सकी।
नंबर 2
दो साल पहले शिवाजी नगर निवासी शिक्षक देवेंद्र दीक्षित के मकान के बाहर से लॉक तोड़कर चोर बाइक ले गए थे। दो साल बीतने के बाद आज तक पुलिस बाइक का कोई सुराग नहीं लगा सकी।

वाहन चोरी पर काफी हद तक अंकुश लगा है। पुलिस ने गैंग के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। कई गैंग पुलिस के रडार पर हैं। चोरी वाले स्थानों को चिह्नित कर सादा वर्दी में पुलिसकर्मी लगाए गए हैं।
विवेक कुमार त्रिपाठी, एसपी सिटी
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